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जेपी ग्रुप पर ताला लगाने से कोई मकसद हल नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट 

Fri, 20 Jul 2018 02:27 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 20 Jul 2018 02:27 AM IST
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No motive will be resolved by locking JP Group: Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि रियल एस्टेट कंपनी जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) पर तालाबंदी से न तो घर खरीदारों, न वित्तीय संस्थानों और न ही प्रमोटरों का कोई मकसद हल हो पाएगा। शीर्ष अदालत ने जेआईएल और जेएएल समेत विभिन्न पक्षों द्वारा ‘अंतरिम राहत’ देने की गुहार पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कंपनी की ओर से वरिष्ठ वकील एफएस नरीमन ने जब अदालत को कंपनी के पुनरुत्थान के लिए कानूनी विकल्प गिनाए तो चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कर्जदाताओं की समिति ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया है।

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जेआईएल को बंद कर देने से किसी का मकसद हल नहीं होगा। नरीमन ने पीठ को बताया कि न्याय के हित में किसी स्वतंत्र व्यक्ति या व्यक्तियों को जेएएल या जेआईएल की वित्तीय क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए नियुक्त किया जा सकता है ताकि मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रह सके। इसके बाद यदि विशेषज्ञ समिति कहती है कि कंपनी इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है, तब विचार किया जाए कि अगला कदम क्या उठाया जाना चाहिए। 
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उन्होंने पीठ को बताया कि कुल 21 हजार 532 यानी 92 फीसदी घर खरीदारों ने कंपनी में भरोसा जताया है क्योंकि वे रिफंड नहीं चाहते। अदालत को आदेश जारी करते वक्त उनके हितों का ख्याल रखना चाहिए। आईडीबीआई बैंक ने 526 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान नहीं करने पर कर्ज में डूबी जेआईएल के खिलाफ एनसीएलटी में कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजोल्यूशन आवेदन किया था। 

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