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Shodhganga: अध्ययन में नहीं चलेगा कॉपी-पेस्ट, डिजिटल प्लेटफॉर्म 'शोधगंगा' तैयार, अब एक जैसे विषय होंगे खारिज
Sat, 18 Nov 2023 06:09 AM IST
यशोधन शर्मा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sat, 18 Nov 2023 06:09 AM IST
सार
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) नेमंं (एनएमसी) के साथ मिलकर मेडिकल शोधगंगा प्लेटफॉर्म तैयार किया है। आईसीएमआर के अनुसार, जल्द ही चिकित्सा छात्रों के पंजीयन के लिए देश के सभी मेडिकल कॉलेजों को आदेश भी जारी किए जाएंगे।
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विस्तार
शोध के नाम पर अब कॉपी-पेस्ट नहीं चल पाएगा। न ही एक ही विषय पर कई शोध पत्र सामने आएंगे। सरकार ने चिकित्सा क्षेत्र में शोध की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए मेडिकल शोधगंगा को शुरू किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रत्येक चिकित्सा छात्र का पंजीयन अनिवार्य है। अगर उक्त विषय पहले से पंजीकृत है तो छात्र को शोध की अनुमति नहीं मिलेगी।
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जानकारी के अनुसार, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) नेमंं (एनएमसी) के साथ मिलकर मेडिकल शोधगंगा प्लेटफॉर्म तैयार किया है। आईसीएमआर के अनुसार, जल्द ही चिकित्सा छात्रों के पंजीयन के लिए देश के सभी मेडिकल कॉलेजों को आदेश भी जारी किए जाएंगे। आईसीएमआर ने बताया कि एक से अधिक स्नातकोत्तर अपने शोध प्रबंध के लिए एक विशेष विषय चुन सकते हैं और अपने मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सैंपल साइज पर निर्णय ले सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि चिकित्सा स्नातकोत्तरों की क्षमता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर), एनएमसी और आईसीएमआर पिछले काफी समय से इस पर काम कर रहा है। प्रस्तावित शोध प्रबंध विषयों की पहचान करने के लिए विशेषज्ञ संकायों के साथ परामर्शी बैठकों की एक पूरी शृंखला बुलाई, जिसके बाद चिकित्सा विज्ञान की समझ में सुधार के लिए मेडिकल शोध गंगा की स्थापना का फैसला लिया गया।
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गुणवत्ता में आएगा सुधार
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हर साल एक ही विषय की बार-बार खपत से बचने के लिए मेडिकल शोध गंगा में हर साल नए विषय शामिल होने की संभावना है। इससे न सिर्फ चिकित्सा के क्षेत्र में शोध की गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि भविष्य के लिहाज से भारत के लिए नैदानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य में अहम योगदान भी दे सकता है।