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खुल सकेगा निजामुद्दीन मरकज: त्योहारी दिनों में कर सकेंगे 50 लोग नमाज अदा, केंद्र की सशर्त पेशकश

Wed, 24 Mar 2021 07:37 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 24 Mar 2021 07:37 PM IST
सार

कोरोना काल में तबलीगी जमात के आयोजन व बड़ी संख्या में संक्रमित मिलने के बाद चर्चित हुए निजामुद्दीन मरकज को दोबारा खोले जाने की मंजूरी मिल सकती है। केंद्र सरकार ने इसके लिए कुछ शर्तें रखी हैं। दिल्ली हाईकोर्ट मामले में 12 अप्रैल को निर्णय करेगी। 

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Nizamuddin Markaz: 50 people can perform namaz on festive days, the Center has placed this condition
निजामुद्दीन मरकज - फोटो : Social Media

विस्तार

करीब साल भर बाद दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज को खोला जा सकेगा। केंद्र सरकार ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में इसे खोलने की सशर्त मंजूरी देने की पेशकश की। केंद्र ने कहा कि आने वाले त्योहारी दिनों यानी रमजान में निजामुद्दीन मरकज में 50 लोगों को तब नमाज अदा करने की अनुमति दी जा सकती है, जब उन व्यक्तियों के नाम क्षेत्र के एसएचओ को प्रदान किए जाएं। इन 50 लोगों का चयन भी वक्फ बोर्ड करेगा। 

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निजामुद्दीन मरकज को खोलने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार द्वारा न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता के समक्ष यह बात कही गई। मरकज में कोविड-19 महामारी के दौरान तबलीगी जमात का कार्यक्रम आयोजित किया गया था और मरकज पिछले साल 31 मार्च से बंद है। केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता रजत नायर ने अदालत को बताया कि दिल्ली वक्फ बोर्ड को क्षेत्र के पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी (एसएचओ) को 50 नामों से युक्त एक आवेदन देना होगा और उसके बाद ही केवल उन लोगों को नमाज अदा करने के लिए मस्जिद में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी।

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शब-ए-बारात' के लिए मांगी अनुमति
केंद्र की ओर से यह बात तक कही गई जब वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता और वकील वजीह शफीक ने अदालत से आग्रह किया कि सप्ताहांत में 'शब-ए-बारात' के दौरान मस्जिद में कुछ लोगों को नमाज अदा करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि केवल मस्जिद का उपयोग किया जाएगा, वहां स्थित मदरसे का नहीं।
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13 अप्रैल से शुरू हो रहे रमजान के पहले लें फैसला
गुप्ता ने अदालत से यह भी आग्रह किया कि 13 अप्रैल से शुरू होने वाले रमजान के पवित्र महीने से पहले इस मामले में फैसला किया जाए क्योंकि उस दौरान और ज्यादा लोग मस्जिद में नमाज अदा करना चाहेंगे। इसके बाद, अदालत ने मामले को 12 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। 
दिल्ली वक्फ बोर्ड की दलील
बोर्ड ने अपनी दलील में कहा है कि अनलॉक -1 दिशानिर्देशों के बाद भी निषिद्ध क्षेत्र के बाहर स्थित धार्मिक स्थलों को खोलने की अनुमति दी गई जबकि मरकज अभी भी बंद हैं जिसमें मस्जिद बंगले वाली, मदरसा काशिफ-उल-उलूम और छात्रावास शामिल है। इसमें कहा गया कि भले ही यह परिसर किसी भी आपराधिक जांच या सुनवाई का हिस्सा हो, लेकिन इसे बंद करना जांच प्रक्रिया का एक पुराना तरीका है।

कोविड-19 के दौरान हुई थी तबलीगी जमात
कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान मरकज में आयोजित तबलीगी जमात कार्यक्रम और विदेशियों के ठहरने के संबंध में महामारी रोग अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम, विदेश अधिनियम और दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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