29 साल के तेजस्वी ने बढ़ा दी इंजीनियर नीतीश चाचा की मुसीबत
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सत्ता, राजनेता, अपराधी के कॉकटेल और चमड़ी के धंधे ने बिहार में किसी को भी शर्मसार कर देने वाला चोखा रंग दिखाया है। मुजफ्फरपुर में सरकारी बल पर चल रहे ब्रजेश ठाकुर के स्वामित्व वाले शेल्टर होम ने अपनी सारी हदें पार कर दी हैं। करीब 12 साल (2005 से) बिहार के मुख्यमंत्री को इस घटना के सामने आने पर शर्म जाहिर करने में करीब 90 दिन लग गए।
हालांकि यह मामला कुछ दिन पहले संसद के मानसून सत्र में बिहार से सांसद पप्पू यादव और उनकी पत्नी रंजीता रंजन ने उठाया था, लेकिन 29 साल के तेजस्वी यादव ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है। इतना ही नहीं नौवीं पास तेजस्वी ने इंजीनियर चाचा नीतीश कुमार की मुसीबत भी बढ़ा दी है।
शनिवार को तेजस्वी इस मुद्दे को लेकर दिल्ली आए। जंतर-मंतर पर धरना, विरोध-प्रदर्शन किया। यह तेजस्वी का पहला राष्ट्रीय स्तर का प्रदर्शन का था। बेहद सफल रहा।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, भाकपा के डी राजा, माकपा के सीताराम येचुरी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, इनेलो के दुष्यंत चौटाला, समाजवादी पार्टी के सुरेन्द्र नागर. तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी, जद(यू ) संस्थापक रहे शरद यादव समेत अन्य दलों के धर्म निरपेक्ष तथा समाजवादी, जनतादली विचारधारा के लोगों ने नीतीश कुमार, उनकी सरकार और सरकार के प्रयास पर करारा हमला बोला।
नीतीश कुमार के खिलाफ
धर्म निरपेक्ष दलों की यह पहली एकजुटता नीतीश कुमार की सरकार के खिलाफ है। यह एकजुटता लालू प्रसाद यादव की राजद द्वारा उठाए गए मुद्दे के समर्थन में है।
असल में राजनीतिक रूप से देखा जाए तो यह नीतीश कुमार की राजनीति में कमजोर हो रही साख की ओर इशारा कर रही है। यह उनके राजनीतिक रूप से कमजोर हो जाने का संकेत है।
जद(यू) के एक महासचिव आफ द रिकार्ड मानते हैं कि नीतीश कुमार ने पाकिस्तान के जनरल नियाजी की तरह बांग्लादेश युद्ध में भारत की फौज के सामने सरेंडर कर दिया है।
नीतीश कुमार की यह सोच अब राजनीतिक एकता का नया मंच तैयार कर रही है। सच में देखा जाए तो नौंवी पास तेजस्वी ने अपने इंजीनियर चाचा की चूलें हिला दी हैं। इसका असर बिहार में आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकता है।
सुशासन बाबू की छवि पर असर
नीतीश 2005 से राज्य के मुख्यमंत्री हैं। पटना से छन कर आ रही खबरों के मुताबिक पिछले दस साल में भाजपा और जद(यू) नेताओं के कंधे पर पांव रखकर टटपुंजिया अखबार चलाने वाले ब्रजेश ठाकुर ने काफी कुछ बना लिया है। उसके इस रसूख में सरकार के वित्तीय सहयोग से चल रहे शेल्टर होम की काफी अहम भूमिका रही है।
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने इसका खुलासा किया है और सूचना यही है कि अबोध, मासूम बच्चियों को नेताओं, अफसरों और लेने के लिए हर रसूखदार सफेद चेहरे के सामने परोसा गया है। सबकुछ नीतीश सरकार की नाक के नीचे हुआ है।
पप्पू यादव तो साफ आरोप लगाते हैं कि यदि ईमानदारी से जांच हो जाए तो पूरी नीतीश सरकार ताश के पत्ते की तरह भरभराकर गिर जाएगी। क्योंकि इस मकडज़ाल में उनकी कैबिनेट के मंत्री भी शामिल हैं।
गले में अटका मछली का कांटा
जद(यू) की परेशानी और तिलमिलाहट का शेल्टर होम अपराध के खुलासे से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। तेजस्वी यादव के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के बाद रविवार को ही जद(यू) ने अपने नेताओं की फौज उतार दी है।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी सफाई देने उतर आए हैं। त्यागी तेजस्वी के प्रयास को वोटों की लालच बता रहे हैं। नेताओं के विरोध को सत्ता के भूखे लोगों का जमावड़ा बता रहे हैं। इससे भी बड़े अफसोस की बात है कि अब केसी त्यागी को जेएनयू के छात्रनेता चंद्रशेखर की हत्या याद आ रही है। वह वामदलों के नेताओं को तेजस्वी के मंच पर आने के लिए कोस रहे हैं। लेकिन केसी त्यागी यह नहीं बता पा रहे हैं कि मजफ्फरपुर के इस जघन्य और घृणित शर्मसार कर देने वाले प्रकरण को वह चंद्रशेखर की हत्या से किस नैतिकता के आधार पर जोड़ रहे हैं।
जद(यू) की तिलमिलाहट तब और साफ दिखाई दे रही है, जब वह कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा इस घटना का विरोध करने के लिए तेजस्वी के साथ मंच साझा करने का विरोध करते हैं। राहुल गांधी को उनकी नैतिकता याद दिलाते हैं। केसी त्यागी को इसमें बच्चियों के साथ हुई दरिंदगी की घटना में राजनीतिक दलों की राजनीति दिखाई दे रही है।
दरअसल जद(यू) न तो इस घृणित अपराध के पीछे हुई चूक को पचा पा रही है और न ही अपने मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार को नैतिक बल दे पा रही है। इसका कारण जद(यू) के नेताओं को मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में खतरनाक दलदल का एहसास होना बताया जा रहा है। राजद के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि यह मछली का कांटा अब नीतीश कुमार के गले में अटक गया है।
क्यों अटक गई बिहार सरकार की सांस
राधामोहन ठाकुर के बेटे ब्रजेश ठाकुर का जो कद बढ़ा है, वह नीतीश कुमार की सरकार में बढ़ा है। अब ठाकुर परिवार कोई एक प्रात: कमल अखबार ही नहीं निकालता। बल्कि उसकी बेटी अंग्रेजी अखबार की प्रमुख है तो उर्दू अखबार भी निकाल रहा है। चंद पेजों के संक्षिप्त सर्कुलेशन वाले अखबार में सरकारी विज्ञापन की कमी नहीं रहती। कभी ठाकुर ने टीवी चैनल शुरू करने की भी मुहिम चलाई थी, लेकिन कामयाब नहीं हो पाया।
2012 में उसने अंग्रेजी का अखबार का शुरू किया था। ब्रजेश ठाकुर का सेवा संकल्प एवं विकास समिति नामक एनजीओ ही 44 में से 29 बच्चियों के साथ हुए बलात्कार वाला शेल्टर होम चलाता है। यह एनजीओ 2012 से खूब फलफूल रहा है।
खास बात यह भी है कि अखबार का दफ्तर और शेल्टर होम एक ही भवन में है। इतना ही 2005 में नीतीश कुमार ब्रजेश ठाकुर के बुलावे पर उसके बेटे की जन्मदिन की पार्टी में गए थे। खबर है कि इस कड़ी के सूत्रधार जद(यू) के एक बड़े नेता हैं। अब ऐसे में सुशासन बाबू कहे जाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सफाई दें भी तो क्या दें।