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रोजगार के लिए नहीं पड़ेगी गांव छोड़ने की जरूरत: गडकरी

Mon, 13 Mar 2017 03:48 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 13 Mar 2017 03:48 PM IST
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Nitin Gadkari's interview
नितिन गडकरी - फोटो : file photo

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इन दिनों स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के काम का बीड़ा उठाए हुए हैं। इसी के तहत कपास के पौधे के डंठल से, गेहूं या धान की फसल कटने के बाद बचे पुआल या भूसे से, गन्ने का रस निकालने के बाद बची खोई से, बांस या जंगली घास और खर-पतवारों से सेकेंड जेनेरेशन इथनॉल यहीं बनाने के लिए तेजी से काम शुरू हो गया है। इससे न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा बल्कि कच्चे तेल के आयात में खर्च हो रही महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। इसी सिलसिले में अमर उजाला के संवाददाता शिशिर चौरसिया ने पिछले दिनों नितिन गडकरी से बातचीत की। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश:

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प्रश्न- आपने स्वर्च्छ इंधन को बढ़ावा देने के लिए एक नई नीति बनाने की पहल की है। क्या दर्शन है इसके पीछे?

उत्तर-
भारत हर साल करीब छह लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) आयात करता है। हमारी सरकार यह सोचती है कि यहीं, देश में ही स्वदेशी विकल्प तैयार हो। हालांकि ऐसा पहले से ही हो रहा है और शीरे से इथनॉल बनाया जा रहा है। लेकिन मुश्किल यह है कि इथनॉल सिर्फ तीन फीसदी ही उपलब्ध है जबकि इसे पेट्रोल में 22 फीसदी तक मिला सकते हैं। आज पेट्रोल में मिश्रण के लिए 19 फीसदी और इथनॉल की जरूरत है। इसलिए हमने सेकेंड जनरेशन के इथनॉल को यहीं बनाने की योजना तैयार की है।
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प्रश्न- इसे कहां बनाएंगे?

उत्तर- इसे यहीं, गांवों में बनाएंगे। इसके लिए कपास बीनने के बाद खेत में बचे पौधे के डंठल, गेहूं या धान की फसल कटने के बाद बचे पुआल या भूसे, गन्ने का रस निकालने के बाद बची खोई, बांस या जंगली घास और खर-पतवारों आदि से इथनॉल बनाने के लिए कारखाना लगाया जाएगा। इससे जहां कच्चे तेल के आयात बिल में उल्लेखनीय कमी आएगी, वहीं किसानों की आमदनी का अतिरिक्त जरिया शुरू होगा। हमारा अनुमान है कि इससे गांवों में करीब 25 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण इलाकों में डेढ़ से दो हजार नए कारखाने लगेंगे। किसानों को भूसे की अच्छी कीमत मिलेगी तो उनके बच्चों को गांवों में ही रोजगार मिलेगा। आप इतना समझ लीजिए कि यह योजना लागू होती है तो देश के हर गांव में इतना रोजगार मिलेगा कि उन्हें गांव छोड़ कर शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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Nitin Gadkari's interview
नितिन गडकरी - फोटो : file photo

प्रश्न- इस बारे में कितना काम हुआ है?

उत्तर- सबसे पहले हम सेकेंड जेनरेशन इथनॉल के लिए एक नीति बनाएंगे। इसके लिए पिछले महीने के अंतिम सप्ताह में ही हमारे कक्ष में एक उच्चस्तरीय बैठक हो चुकी है जिसमें पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा कृषि तथा खाद्य एवं उपभोक्ता मामले के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए थे। बैठक में तय हुआ कि यहां सेकेंड जेनरेशन के इथनॉल बनाने के लिए एक नीति बनायी जाएगी। इसके बन जाने से कच्चे तेल के आयात में हर साल एक लाख करोड़ रुपये के बराबर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

प्रश्न- देश में कृषि क्षेत्र से इतनी बड़ी मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध हो पाएगा?

उत्तर- जरूर उपलब्ध होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वर्ष 2022 तक देश में कृषि क्षेत्र में उत्पादन में ढाई गुने की बढ़ोतरी करनी है। इसके लिए तैयारी चल रही है। जब कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ेगा तो गेहूं और धान के डंठल का भी उत्पादन बढ़ेगा। जब गन्ने का उत्पादन बढ़ेगा तो खोई का भी उत्पादन बढ़ेगा। अभी देखिए, दिल्ली के आसपास के इलाकों में फसल काटने के बाद किसान डंठल को खेत में ही जला देते हैं। इससे प्रदूषण होता है और दिल्ली पर भी उसका प्रभाव पड़ता है। अब इससे वेल्थ क्रिएट होगा।

प्रश्न- देश में मिथनॉल बनाने की भी कवायद शुरू हुई है?

उत्तर- जी हां। अभी देश में कोयले की सरप्लस है। कोयले से भी हमलोग इथनॉल की सगी बहन, मिथनॉल बनाएंगे। पेट्रोलियम मंत्रालय को इथनॉल और मिथनॉल, दोनों स्वच्छ ईंधन के बारे में नीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तैयार हो जाने के बाद उस बारे में कैबिनेट नोट बना कर उस पर मंत्रिमंडल की अनुमति ली जाएगी।

प्रश्न- मिथनॉल का मिश्रण किस ईंधन में होगा?

उत्तर- मिथनॉल का मिश्रण किसी ईंधन में नहीं होगा। यह भी एक अलग तरह का ईंधन ही है। जैसे एलएनजी फ्यूल है, सीएनजी फ्यूल है, एलपीजी फ्यूल है, उसी तरह से कोयले से बनने वाला मिथनॉल भी फ्यूल है। इससे ट्रक चल सकते हैं, पानी के जहाज चल सकते हैं। कोयला से हम डेढ़ सौ पेट्रोलियम प्रोडक्ट बन सकते हैं। उसमें आसान है मिथनॉल बनाना। इससे देश भर में ट्रक चलेंगे।

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