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कुपोषित बच्चों पर तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता

Tue, 28 Jun 2016 08:48 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 28 Jun 2016 08:48 PM IST
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Niti aayog to focus on mal nutrition
Malnutrition child - फोटो : Getty Images

सरकार के प्रयासों से भारत में कम वजन वाले और मंदबुद्धि बच्चों की संख्या में तो उल्लेखनीय कमी हुई है। लेकिन पिछले एक दशक के दौरान बच्चों में खून की कमी (एनीमिया) और बरबादी पर लगाम लगाने में नाकाम होने की वजह से इस समस्या पर काबू नहीं पाया जा सका है।

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यही वजह है कि अभी भी देश में कुपोषित बच्चों की संख्या काफी ज्यादा है और इस पर तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। यह मानना है नीति आयोग का। देश के प्रमुख थिंक टैंक नीति आयोग से मंगलवार को जारी एक बयान के मुताबिक इसे एक व्यापक पोषण रणनीति और कार्यान्वयन संरचना विकसित करने की जिम्मेदारी मिली है।
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यह भारत में कुपोषण की वर्तमान दर को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुपोषण जैसे महत्वपूर्ण मसले को चर्चा के केन्द्र में लाने के लिए आयोग ने बीते दिन एक कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें केन्द्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और एनआईएन जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ भी शामिल हुए थे। 

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रतन टाटा भी हुए शामिल

Niti aayog to focus on mal nutrition
रतन टाटा

इसमें टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष रतन टाटा भी शामिल हुए। बयान के मुताबिक बैठक के दौरान प्रस्तावित राष्ट्रीय पोषण मिशन की रूपरेखा, बच्चों के पोषण की स्थिति का रीयल टाइम असेसमेंट के उपाय आदि पर विस्तृत चर्चा हुई। इसी के साथ पोषण के प्रति लोगों के व्यवहार में व्यवहार परिवर्तन के लिए प्रेरित करने के लिए एक व्यापक, बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता महसूस की गई।

इस कार्यक्रम में देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एमएन वेंकटचलैया को भी भाग लेना था लेकिन बीमार होने की वजह से वह इसमें शामिल नहीं हो सके। नीति आयोग को भेजे अपने संदश में उन्होंने कहा कि यह विचार-विमर्श सही रास्ते पर है। भूले हुए राष्ट्रीय पोषण नीति जीवन को फिर से लाया जाना चाहिए, विशेष रूप से उन राज्यों में जहां कार्रवाई निहित है।

वर्ष 2014 की बजट उद्घोषणा के मुताबिक ही राष्ट्रीय पोषण मिशन को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। इस बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबराय ने की थी। इस दौरान नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत भी उपस्थित थे।

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