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NGT: 'पश्चिम बंगाल में गंगा का जल स्नान के लायक नहीं, सीवेज के कारण दुर्गति'; एनजीटी ने जुर्माने की चेतावनी दी

Wed, 28 Feb 2024 11:25 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता / नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता / नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 28 Feb 2024 11:25 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल में गंगा नदी का पानी स्नान के लायक नहीं बचा। सीवेज से आने वाले दूषित पानी के कारण गंगा की दुर्गति देख भड़के राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने कहा है कि हालात में जल्द सुधार नहीं होने की सूरत में एनजीटी भारी-भरकम जुर्माना वसूलेगा।

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NGT West Bengal Ganges Water Unfit for Bath Untreated Sewage Fine Warning
एनजीटी (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में गंगा नदी का पानी बहुत अधिक प्रदूषित है। एनजीटी के मुताबिक गंगा के जल की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी है कि इस पानी से आचमन तो दूर नहाना भी संभव नहीं रहा। प्रदूषण के स्तर की निगरानी कर नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना वसूलने वाली वैधानिक संस्था एनजीटी ने पश्चिम बंगाल सरकार को आगाह किया है कि अगर गंगा के जल की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो एनजीटी भारी-भरकम जुर्माना वसूल सकता है। पश्चिम बंगाल से गुजरने वाली गंगा नदी के जल का आकलन करते हुए एनजीटी ने गंगा जल को स्नान लायक नहीं (Unfit for Bathing) करार दिया।
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पश्चिम बंगाल के संबंधित अधिकारियों को चेतावनी देते हुए एनजीटी ने कहा कि  गंगा में गिरने वाले सीवेज के मुद्दे पर अगर अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया तो अधिकारियों पर विफलता के लिए कार्रवाई की जाएगी। एनजीटी ने प्रदेश से लिए गए सैंपल की जांच के बाद गंगा में मल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का स्तर खतरनाक करार दिया। एनजीटी ने पाया कि प्रति दिन 258.67 मिलियन लीटर अनुपचारित सीवेज सीधे नदी में बह रहा है। इस कारण प्रदेश के लोगों की सेहत पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
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गौरतलब है कि देश के अलग-अलग राज्यों में गंगा नदी प्रदूषण रोकथाम के लिए हो रहे उपायों और सरकारी प्रयासों से जुड़े मामले पर सुनवाई के दौरान एनजीटी ने पश्चिम बंगाल की स्थिति को गंभीर करार दिया। गंगा नदी में प्रदूषण रोकने, नियंत्रित करने और कम करने के प्रयासों के संबंध में एनजीटी ने पश्चिम बंगाल की तरफ से पेश रिपोर्ट की समीक्षा की। 
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एनजीटी पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद, नादिया, मालदा, हुगली, पूर्व बर्दवान, हावड़ा, पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना सहित पश्चिम बंगाल के कई जिलों के जिला मजिस्ट्रेट की तरफ से फाइल रिपोर्ट का अवलोकन किया। उन्होंने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि राज्य भर में सीवेज ट्रीटमेंट के लिए पर्याप्त इंतजाम की कमी है। पूर्वी मेदिनीपुर जैसे कुछ जिलों में एक भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) न होना चौंकाने वाला है।


एनजीटी ने पश्चिम बंगाल के नौ जिलों के डीएम को हर दिन उत्पन्न होने वाले सीवेज के शत प्रतिशत ट्रीटमेंट का निर्देश दिया। हरित न्यायाधिकरण ने कहा कि 100 प्रतिशत का लक्ष्य पाने के लिए समय सीमा निर्धारित कर हलफनामा दाखिल करें। ट्रिब्यूनल ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से प्राप्त धन के उपयोग के तरीके और सीमा की जानकारी भी मांगी। एनजीटी ने जिलाधिकारियों से जिलों में बाढ़ के मैदानों के सीमांकन के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी।
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