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नई दिल्ली स्टेशन भगदड़: परेशान यात्रियों ने रेलवे से की रिफंड देने की मांग, कोर्ट ने दिया ये जवाब
Wed, 05 Mar 2025 07:43 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 05 Mar 2025 07:43 PM IST
सार
New Delhi station stampede: दिल्ली उच्च न्यायालय ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 15 फरवरी को हुई भगदड़ के संबंध में दायर की गई जनहित याचिका में उन लोगों को पक्षकार बनाने से इनकार कर दिया जिनकी ट्रेन इस हादसे की वजह से छूट गई थी।
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
15 फरवरी को दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में 18 यात्रियों की मौत हो गई थी। इसमें कुछ यात्री घायल भी हो गए थे। इस अफरा तफरी में कई यात्रियों की ट्रेन छुट गई थी। ऐसे में परेशानी यात्रियों ने हाईकोर्ट में गुहार लगाकर ट्रेन टिकट के राशि रिफंड करने की मांग की थी। हालांकि इस मामले में कोर्ट ने विचार करने पर इनकार कर दिया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 15 फरवरी को हुई भगदड़ के संबंध में दायर की गई जनहित याचिका में उन लोगों को पक्षकार बनाने से इनकार कर दिया जिनकी ट्रेन इस हादसे की वजह से छूट गई थी। मुख्य न्यायाधीश डी.के.उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने उनसे अपनी शिकायतों के निवारण के लिए मुकदमे जैसे व्यक्तिगत उपायों का लाभ उठाने के लिए कहा जिसमें क्षतिपूर्ति भी शामिल है।
जनहित याचिका दायर करने वाले लोगों की तरफ से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि, भगदड़ की घटना में किसी तरह सुरक्षित बच जाने के बाद उन्होंने टिकट का रिफंड (टिकट के बदले कुछ रुपये वापस मिलने) मिलने के वास्ते अधिकारियों से अनुरोध किया था, लेकिन उनका अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया।
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सुनवाई में अदालत ने कहा कि, यह एक व्यक्तिगत मामला है। कानून के तहत उपाय अपनाएं। हम आपको इस मामले में हस्तक्षेप करने की अनुमति क्यों दें? यह एक जनहित याचिका है। आप वे लोग हैं जो कह रहे हैं कि वे ट्रेन में नहीं बैठ सके इसलिये वे मुआवजे के हकदार हैं।अदालत ने कहा कि, भीड़ और यात्री प्रबंधन पर कुछ कानूनी प्रावधानों के क्रियान्वयन के लिए जनहित याचिका दायर की गई है और इस घटना से उक्त याचिका का कोई लेना-देना नहीं है।
इसलिए कोर्ट ने कर दिया इनकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि, इस तरह से मामलों की बाढ़ आ जाएगी। हम इस मामले में न्याय नहीं कर पाएंगे। हम समझ रहे हैं कि आप क्या कह रहे हैं। इससे व्यक्तिगत क्षति होगी, जनहित याचिका नहीं। हम आपको यहां पक्षकार बनने की अनुमति नहीं देंगे। सुनवाई के दौरान अदालत ने आवेदकों को उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति दी तथा उन्हें कानून के तहत उचित उपाय अपनाने के लिए कहा।
याचिकाकर्ता अर्थ विधि ने अपनी जनहित याचिका में कहा, इस दुखद घटना से प्रशासन का घोर कु प्रबंधन और विफलता उजागर हुई। अदालत ने 19 फरवरी को रेलवे से अधिकतम यात्रियों की संख्या तय करने और टिकट की बिक्री के मुद्दे की जांच करने के लिए कहा था और इन मुद्दों पर लिए गए निर्णय का ब्यौरा देते हुए एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था। अदालत में दायर की गई जनहित याचिका में इन्हीं मुद्दों को उठाया गया है।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 15 फरवरी को हुई भगदड़ के संबंध में दायर की गई जनहित याचिका में उन लोगों को पक्षकार बनाने से इनकार कर दिया जिनकी ट्रेन इस हादसे की वजह से छूट गई थी। मुख्य न्यायाधीश डी.के.उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने उनसे अपनी शिकायतों के निवारण के लिए मुकदमे जैसे व्यक्तिगत उपायों का लाभ उठाने के लिए कहा जिसमें क्षतिपूर्ति भी शामिल है।
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जनहित याचिका दायर करने वाले लोगों की तरफ से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि, भगदड़ की घटना में किसी तरह सुरक्षित बच जाने के बाद उन्होंने टिकट का रिफंड (टिकट के बदले कुछ रुपये वापस मिलने) मिलने के वास्ते अधिकारियों से अनुरोध किया था, लेकिन उनका अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया।
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सुनवाई में अदालत ने कहा कि, यह एक व्यक्तिगत मामला है। कानून के तहत उपाय अपनाएं। हम आपको इस मामले में हस्तक्षेप करने की अनुमति क्यों दें? यह एक जनहित याचिका है। आप वे लोग हैं जो कह रहे हैं कि वे ट्रेन में नहीं बैठ सके इसलिये वे मुआवजे के हकदार हैं।अदालत ने कहा कि, भीड़ और यात्री प्रबंधन पर कुछ कानूनी प्रावधानों के क्रियान्वयन के लिए जनहित याचिका दायर की गई है और इस घटना से उक्त याचिका का कोई लेना-देना नहीं है।
इसलिए कोर्ट ने कर दिया इनकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि, इस तरह से मामलों की बाढ़ आ जाएगी। हम इस मामले में न्याय नहीं कर पाएंगे। हम समझ रहे हैं कि आप क्या कह रहे हैं। इससे व्यक्तिगत क्षति होगी, जनहित याचिका नहीं। हम आपको यहां पक्षकार बनने की अनुमति नहीं देंगे। सुनवाई के दौरान अदालत ने आवेदकों को उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति दी तथा उन्हें कानून के तहत उचित उपाय अपनाने के लिए कहा।
याचिकाकर्ता अर्थ विधि ने अपनी जनहित याचिका में कहा, इस दुखद घटना से प्रशासन का घोर कु प्रबंधन और विफलता उजागर हुई। अदालत ने 19 फरवरी को रेलवे से अधिकतम यात्रियों की संख्या तय करने और टिकट की बिक्री के मुद्दे की जांच करने के लिए कहा था और इन मुद्दों पर लिए गए निर्णय का ब्यौरा देते हुए एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था। अदालत में दायर की गई जनहित याचिका में इन्हीं मुद्दों को उठाया गया है।