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नेस्ले ने सुप्रीम कोर्ट में किया स्वीकार, कहा- मैगी में था लेड
Thu, 03 Jan 2019 09:02 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Thu, 03 Jan 2019 09:02 PM IST
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मैगी
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खाद्य उत्पाद बनाने वाली दिग्गज कंपनी नेस्ले इंडिया ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में मैगी में लेड (सीसा) होने की बात को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग (एनसीडीएमसी) में 640 हर्जाने की मांग को लेकर सरकार द्वारा दर्ज कराए गए मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को नेस्ले इंडिया के खिलाफ आगे कार्यवाही की इजाजत दे दी। यह मामला पिछले तीन सालों से लंबित था।
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जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में मैसूर स्थित केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) की रिपोर्ट कार्यवाही का आधार होगी। इसी संस्थान में मैगी के नमूनों की जांच की गई थी। अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान नेस्ले के वकीलों के कबूलनामे के बाद सरकार बनाम नेस्ले की लड़ाई के एक बार फिर से जोर पकड़ने के आसार हैं।
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उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने 2015 में लगभग तीन दशक पुराने उपभोक्ता संरक्षण कानून के एक प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए नेस्ले इंडिया के खिलाफ एनसीडीआरसी में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में सरकार ने कथित अनुचित व्यापार तरीके अपनाने, झूठी लेबलिंग और भ्रामक विज्ञापनों को लेकर 640 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है।
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सरकार ने पहली बार इस धारा का किया इस्तेमाल
यह पहली बार है जब सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 12-1-डी के तहत कार्यवाही की है। इसके तहत केंद्र और राज्य दोनों के पास शिकायत दर्ज करने का अधिकार है। एनसीडीआरसी के तहत दायर याचिका में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने आरोप लगाया था कि मैगी नूडल के स्वास्थ्यवर्धक होने (‘टेस्ट भी, हेल्दी भी’) का दावा कर नेस्ले इंडिया ने उपभोक्ताओं को गुमराह किया।
अपनी बात से मुकरा नेस्ले
2015 में भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने नमूनों में लेड का अत्यधिक स्तर पाए जाने के बाद मैगी नूडल्स पर रोक लगा दी थी और उसे इंसानी इस्तेमाल के लिए असुरक्षित और खतरनाक बताया था। इसके बाद सरकार ने नेस्ले के कई टन उत्पाद नष्ट कर दिए गए थे। सरकार के इस आरोप पर नेस्ले इंडिया ने अक्तूबर 2015 में आपत्ति दर्ज कराई थी। जिसे बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। नेस्ले ने इस याचिका में कहा था कि, उनकी मैगी में तय मानक के मुताबिक लेड है। जिसके बाद नेस्ले सुप्रीम कोर्ट गया जहां पर सुप्रीम कोर्ट ने एनएसडीआरसी की ओर से की जा रही सुनवाई पर रोक लगा दी थी।