भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए नेपाल के पेंशनर इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोरोना वायरस के कारण सीमा सील होने से पूर्व सैनिक मार्च से ही उत्तराखंड में भारतीय बैंकों से पेंशन प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। कई पूर्व भारतीय सैनिक पश्चिमी नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में रह रहे हैं। वे उत्तराखंड के यूएस नगर जिले के पिथौरागढ़ और खटीमा क्षेत्र के चम्पावत, झूलाघाट और धारचूला क्षेत्रों के बनबसा क्षेत्र में स्थित भारतीय बैंकों से अपनी पेंशन प्राप्त करते हैं।
नेपाल के नागरिकों को भारतीय सेना में सेवा का मौका दिया जाता है। आज भी गोरखा रेजिमेंट में नेपाली नागरिकों के लिए भारत ने कोटा तय कर रखा है। भारत-नेपाल संधि के तहत नेपाली सेना में भर्ती होते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद वो अपने मूल स्थानों पर लौट जाते हैं। उनमें से कई देहरादून, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में भी बसे हैं।
पूर्व सैनिकों को उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर भी इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय स्टेट बैंक, झूलाघाट के शाखा प्रबंघक कमलेश जोशी ने बताया कि हमारी शाखा से हर महीने लगभग 700 नेपाली पेंशनर पेंशन लेते हैं। भारत-नेपाल सीमा सील होने के कारण उनकी पेंशन लंबित है।
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गोरखा राइफल्स
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नेपाल के लोगों को सेना में भारत-नेपाल संधि -1950 के तहत भर्ती की जाती है। इसके प्रावधानों के अनुसार नेपाल सरकार अपने नागरिकों को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने कि अनुमति देती है। बदले में भारत उनके नागरिकों को निजी क्षेत्र या सरकारी सेवाओं (भारतीय प्रशासनिक सेवाओं को छोड़कर) में भारत में कहीं भी काम करने की अनुमति प्रदान करता है।
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झूलाघाट के एक व्यवसायी प्रमोद भट्ट ने कहा कि मैं बचपन से ही नेपाली पेंशनरों को उनकी पेंशन के लिए आते और घरेलू सामग्री खरीदते देखता रहा हूं। अंतरराष्ट्रीय सीमा के सील होने के कारण वे पिछले तीन महीनों से नहीं आ रहे हैं। कोरोना वायरस के कारण मार्च से ही अंतरराष्ट्रीय सीमा को सील कर दिया गया है। सीमा बंद होने से भारतीय सेना के ये पूर्व सैनिक पेंशन लेने भारत नहीं आ पा रहे हैं। नेपाल सरकार जरूरतमंदों को सहायता दे रही है, लेकिन पेंशनर इस सूची में नहीं हैं। जिसके चलते इन परिवारों के समक्ष पेट पालने की समस्या खड़ी हो गई है।