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भारत से सीमा विवाद में नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने तलब किया ऐतिहासिक नक्शा

Thu, 02 Jan 2020 10:14 PM IST
संदीप भट्ट वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: संदीप भट्ट Updated Thu, 02 Jan 2020 10:14 PM IST
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Nepal supreme court seeks original map exchanged with India while hearing plea on Kalapani issue
नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने - फोटो : PTI

नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सरकार को वर्ष 1816 में की गई सुगौली संधि के दौरान भारत को सौंपे गए नक्शे की असली प्रति पेश करने का आदेश दिया है। नेपाल सरकार को यह नक्शा 15 दिन के अंदर अपनी शीर्ष अदालत को दिखाना होगा। 

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जस्टिस हरिप्रसाद फुयाल की एकल पीठ ने यह आदेश एक वरिष्ठ वकील की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें शीर्ष अदालत से नेपाली क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए सरकार को राजनीतिक व राजनयिक प्रयास चालू करने के लिए आदेश देने की मांग की गई थी।
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सोमवार को दिए गए इस आदेश की प्रति बुधवार को सार्वजनिक की गई। शीर्ष अदालत ने सरकार को 15 दिन में सुगौली संधि का नक्शा उपलब्ध कराने के साथ ही अन्य देशों को सौंपे गए या संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता के लिए आवेदन करते समय जमा कराए गए अधिकृत नक्शों को भी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
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शीर्ष अदालत ने नेपाल सरकार को भारत सरकार के साथ 1960 में की गई सीमा संधि का असली नक्शा, ईस्ट इंडिया कंपनी की तरफ से 1 फरवरी, 1927 को प्रकाशित किया गया नक्शा और ब्रिटिश सरकार द्वारा 1847 में प्रकाशित एक अन्य नक्शा भी पेश करने के लिए कहा है।

उधर, काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल ने भारत को जनवरी के मध्य में सीमा मुद्दे पर विदेश सचिव स्तर की वार्ता करने का प्रस्ताव भेज दिया है।

कालापानी पर हमारा नक्शा दुरुस्त: विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली। भारत ने कहा है कि नवंबर, 2019 में जारी हुआ नया नक्शा बिल्कुल सही तरीके से अपनी संप्रभु इलाकोें को दर्शाता है और नेपाल के साथ सीमाओं को लेकर किसी भी तरह का संशोधन नहीं किया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक प्रेस कांफ्रेंस में इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौजूदा प्रणाली के तहत नेपाल के साथ सीमा मानचित्रण प्रक्रिया जारी है। भारत अपनी यह प्रतिबद्धता दोहराता है कि वह अपने निकट एवं मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों की भावना को ध्यान में रख कर बातचीत के जरिए हल निकालेगा। उन्होंने बताया कि नेपाल की तरह से इस बिंदु पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं मिली है। गौरतलब है कि नेपाल ने नवंबर में कहा था कि कालापानी नेपाल की सीमा में है। नेपाल ने यह टिप्पणी भारत के नक्शा जारी करने के बाद यह बात कही थी। 

क्या है पूरा विवाद

दरअसल पिछले साल 31 अक्तूबर को जम्मू-कश्मीर का विभाजन आदेश लागू होने पर नवंबर में भारत ने अपना नया भू-राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इस नक्शे पर नेपाल ने आपत्ति जताई थी। नेपाल का कहना था कि उसके क्षेत्र में होने के बावजूद कालापानी, लिपुलेक और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को भारत ने नक्शे में अपना हिस्सा दिखाया है। हालांकि भारत का कहना है कि नए नक्शे में उसके संप्रभु क्षेत्र का सटीक चित्रण है और इसमें नेपाल के साथ अपनी सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्या थी सुगौली संधि

अंग्रेजों और नेपालियों ने आपस में युद्ध खत्म करने के लिए 1816 में सुगौली संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि के तहत नेपाल ने दार्जिलिंग समेत कई नेपाली क्षेत्र ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के हवाले कर दिए थे। इस संधि के तहत नेपाल को अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों से उन सभी हिस्सों पर हक छोड़ना था, जो नेपाल के राजा ने युद्धों में जीतकर हासिल किए थे। इनमें पूर्वोत्तर में सिक्किम रियासत और पश्चिम में कुमाऊं व गढ़वाल के क्षेत्र भी शामिल थे।

नेपाल संसद में विवादित बिल पर चर्चा में भारत पर आपत्तिजनक बयान

नेपाल की संसद में विवादित सूचना तकनीक विधेयक को लेकर सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद भारत का जिक्र करते हुए आपत्तिजनक बयान दिया। सांसद राम नारायण बिदरी ने कहा कि यह विधेयक देश की एजेंसियों को बिना अदालती आदेश के किसी का भी फोन टेप करने की अनुमति देगा। इससे भारत समेत विदेश की खुफिया एजेंसियों के नेपाल में दखल और गतिविधियों का पता चल सकेगा।

मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के कड़े विरोध के बावजूद सरकार ने नेशनल असेंबली में इस विधेयक को पेश किया है। सांसद बिदरी ने सदन में चल रही बहस में कहा, विदेशों की खुफिया एजेंसी जिनमें अमेरिका की सीआइए और भारत की रॉ शामिल हैं, उनका नेपाल के अंदरूनी मामलों में दखल रहता है। इसे अच्छी तरह से देखे जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि ताजा विधेयक नेपाल में बाहरी दखल रोकने में मददगार सिद्ध होगा। विधेयक सरकारी एजेंसियों को संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने का भी अधिकार देता है।

इससे विदेशी खुफिया एजेंसियों की नेपाल में गतिविधियों का भी पता चलेगा। साथ ही सरकार उन एजेंटों के बारे में भी जान सकेगी, जो नेपाल में रहकर विदेश के लिए जासूसी कर रहे हैं। जबकि नेपाली कांग्रेस ने विधेयक को संविधान विरोधी मानते हुए इससे वैश्विक कानून टूटने की बात कही।

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