जिनपिंग से मिले मोदी, एनएसजी, आतंकवाद, पीओके में चीनी कॉरिडोर का मुद्दा उठाया
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दक्षिण चीन सागर में भारत को दखल नहीं देने का उपदेश दे रहे चीन को पीएम मोदी ने रविवार को दो-टूक अंदाज में जवाब दिया। यहां जी-20 की बैठक में शामिल होने आए पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग संग द्विपक्षीय बैठक के दौरान बेबाकी से अपनी बात रखी।
पाक अधिग्रहित कश्मीर (पीओके) से गुजरने वाले प्रस्तावित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पर चिंता जताते हुए मोदी ने कहा,‘भारत और चीन दोनों को ही एक दूसरे के रणनीतिक हितों के प्रति ‘संवेदनशील’ होने की जरूरत है।’
दोनों देशों के बीच ‘नकारात्मक धारणा को बढ़ने से रोकने’ के लिए उन्होंने विशिष्ट कदम उठाने की भी अपील की। गौरतलब है कि यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरता है जिसके कारण भारत का चिंतित होना स्वाभाविक है।
एक-दूसरे के प्रति ‘संवेदनशील’ होना चाहिए
रविवार को दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में भारत ने ‘क्षेत्र से पैदा होने वाले’ आतंकवाद पर भी अपनी चिंता जाहिर की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे के रणनीतिक हितों के प्रति ‘संवेदनशील’ होना चाहिए।
यह भी जोड़ा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई ‘राजनीतिक हितों’ से प्रेरित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थायी द्विपक्षीय संबंधों को सुनिश्चित करने के लिए ‘यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम एक दूसरे की महत्वाकांक्षा, चिंताओं और रणनीतिक हितों का सम्मान करें।’ ऊर्जा से जुड़ी कई परियोजनाओं के अलावा सीपीईसी में ग्वादर बंदरगाह से पीओके के रास्ते चीन के मुस्लिम बहुल क्षेत्र शिनजियांग के काशघर तक तेल और गैस ले जाने के लिए रेल, सड़क और पाइपलाइनें हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि चर्चा के दौरान सीपीईसी वाले क्षेत्र से पैदा हो रहे आतंकवाद का मुद्दा भी बैठक के दौरान उठाया गया है। स्वरूप ने बताया कि मोदी और शी के बीच करीब 35 मिनट तक बातचीत हुई।