फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   ND Tiwari became journalist, He took first interview of american president Johnson

यादों में नारायण : जब पत्रकार बने एनडी, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉनसन का लिया पहला साक्षात्कार

Fri, 19 Oct 2018 03:24 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 19 Oct 2018 03:24 AM IST
विज्ञापन
ND Tiwari became journalist, He took first interview of american president Johnson

1962 का चुनाव हारने के बाद वे पत्रकारिता करने लगे। नेशनल हेराल्ड अखबार ने उन्हें विशेष संवाददाता बनाकर अमेरिका भेज दिया। तिवारी ने जॉन एफ केनेडी के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति बने लिंडन बेन्स जॉनसन का पहला इंटरव्यू लिया, जिसे हेराल्ड ने सभी संस्करणों में छापा। तब तक जॉनसन का इंटरव्यू किसी अखबार में नहीं छपा था। 

विज्ञापन


उन्हीं दिनों इंदिरा गांधी तत्कालीन समाजवादियों को कांग्रेस में शामिल होने का न्योता दे रही थीं। वह सफल हुईं और अशोक मेहता, चंद्रशेखर जैसे कई समाजवादी नेता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए। तिवारी जी उस समय अमेरिका में ही थे, उन्होंने वहीं से कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की। वह 1969 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त के मंत्रिमंडल में पहली बार मंत्री बनाए गए। वर्ष 1976 में पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। वे तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।

विज्ञापन

चोरी-छिपे करते रहे मदद

आपातकाल के दौरान तिवारी मुख्यमंत्री थे। एक तरफ से मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी, तो दूसरी पुराने मित्रों के प्रति संवेदनशीलता। तिवारी ने उस समय जेल में बंद अनेक लोगों के परिवारों की मदद की। पत्रकारों के साथ भी उनके काफी मधुर रिश्ते थे। 

शायद यही वजह रही कि उत्तर प्रदेश में उस समय अखबारों पर वैसी कठोर सेंसरशिप नहीं थी, जैसी देश के दूसरे राज्यों में थी। उनके कार्यकाल में गरीबों व किसानों के लिए जितनी योजनाएं बनी, शायद ही किसी दूसरे मुख्यमंत्री के कार्यकाल में बनीं।

अच्छे प्रशासक भी

तिवारी जी रात में तो अचानक निरीक्षण कर ही लेते थे, तो अक्सर सुबह पांच बजे ही किसी न किसी जिले के जिलाधिकारी को फोन मिलाकर वहां की विकास की स्थिति और अन्य विषयों के बारे में फीडबैक लेते थे। विरोधी दलों के नेताओं से मधुर संबंध रहे। संक्षेप में कहें, तो वे सिर्फ राजनेता नहीं, बल्कि बहुत संवेदनशील भी थे। 

तिवारी जी में आज के राजनेताओं की तरह न तो चालाकी थी और न स्वार्थ का भाव। उनके जीवन में कुछ विपरीत परिस्थितियां भी आईं, जिन्होंने उनके सार्वजनिक जीवन पर सवालिया निशान भी लगाए, लेकिन एक वाक्य में कहा जाए तो वह नेता कम, इंसान ज्यादा थे। जिनके लिए सियासत नहीं सरोकार ज्यादा महत्व रखते थे। फर्श पर जन्म लेकर अपनी योग्यता और संघर्षों से अर्श तक सफर करने वाले लोग बिरले ही होते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed