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Hindi News ›   India News ›   National Medical Commission Bill 2019 : Doctors strike effects to health services

डॉक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर, मांगें नहीं मानीं तो इमरजेंसी सेवा भी होगी ठप

Wed, 31 Jul 2019 05:02 PM IST
आसिम खान अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Wed, 31 Jul 2019 05:02 PM IST
सार

  • राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक 2019 के विरोध में उतरे डॉक्टर
  • इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्र सरकार को दी चेतावनी
  • डॉक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा गहरा असर
  • बुधवार सुबह छह से गुरुवार सुबह छह बजे तक ओपीडी सेवाएं पूर्ण रूप से बंद

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National Medical Commission Bill 2019 : Doctors strike effects to health services
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Facebook

विस्तार

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक 2019 (National Medical Commission Bill, 2019) लोकसभा से पास हो चुका है। इसे जल्द ही राज्यसभा में पेश किये जाने की संभावना है जहां से पास होने के बाद यह कानून बन जाएगा। लेकिन बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर डॉक्टरों में गहरा असंतोष है।

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बिल से नाराज इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के लाखों डॉक्टर आज हड़ताल पर हैं। हड़ताल के अंतर्गत बुधवार सुबह छह बजे से गुरुवार सुबह छह बजे तक ओपीडी सेवाएं पूर्ण रूप से बंद रखी गई हैं। आवश्यक और इमरजेंसी सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया है। 
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर बिल से विवादित प्रावधान नहीं हटाए जाते हैं तो वह जल्दी ही इससे बड़ी और देशव्यापी हड़ताल का आयोजन करेगा जिसमें इमरजेंसी सेवाओं को भी शामिल कर लिया जाएगा। हालांकि, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक 2019 को ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि इस बिल के पास होने से देश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार में बड़ी मदद मिलेगी। 

आज हड़ताल का व्यापक असर

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से तीन लाख से अधिक डॉक्टर प्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हैं। इसके आलावा संगठन से सहयोगी मेडिकल सेवाएं और हजारों प्रतिष्ठित अस्पताल भी जुड़े हैं। इन सभी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं आज प्रभावित हैं। मरीजों को इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। राजधानी दिल्ली के महत्त्वपूर्ण अस्पतालों में भी सेवाएं बंद होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी बाहर से आए मरीजों को उठानी पड़ रही है। 

किस बात का है विरोध

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के ऑनरेरी संयुक्त सचिव एसके पोद्दार ने अमर उजाला को बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक 2019 में भारी गड़बड़ी है। अगर यह बिल कानून बन जाता है तो इससे गरीब परिवार के बच्चे कभी भी डॉक्टर नहीं बन सकेंगे। इससे इलाज की सुविधाएं भी बहुत ज्यादा महंगी हो जाएंगी और भविष्य में गरीबों का इलाज भी मुश्किल हो जाएगा। बिल पास हो जाने से कम योग्य लोगों के डॉक्टर बनने की भी संभावना बढ़ जाएगी। 

अपोलो अस्पताल में शीर्ष डॉक्टर एसके पोद्दार के मुताबिक इस बिल में सबसे बड़ी गड़बड़ी यह है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 50 फीसदी सीटें मैनेजमेंट को दे दी गई हैं (अभी यह सीमा केवल 15 फीसदी है) जिसकी फीस वे अपने हिसाब से तय कर सकेंगे।

अगर सरकार मुख्य फीस को नियमित भी करती है तो डोनेशन या अन्य माध्यमों से संस्थान भारी फीस वसूल सकेंगे जिससे इन कॉलेजों में गरीब बच्चों का पढ़ना और डॉक्टर बनना असंभव हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जो बच्चे भारी फीस देकर पढ़ेंगे वे डॉक्टर बनने के बाद भारी फीस भी वसूलेंगे जिससे गरीबों का इलाज मुश्किल हो जाएगा। 

इन्हें एलोपैथी की इजाजत क्यों

देश में डॉक्टरों की भारी कमी है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक 2019 के जरिए 3.50 लाख कम्युनिटी हेल्थ वर्करों को तीन महीने का प्रशिक्षण देने के बाद एलोपैथी दवाएं लिखने का अधिकार देने की योजना बनाई है। लेकिन तमाम डॉक्टरों का कहना है कि इससे अयोग्य लोगों के डॉक्टर की तरह काम करने की संभावना बढ़ जाएगी जिससे मरीजों को भारी नुकसान होगा। 

राज्यों का प्रतिनिधित्व नहीं

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट (इलेक्ट) राजन शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक 2019 में सबसे महत्त्वपूर्ण बॉडी में जोन के हिसाब से प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि इस समय के मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में हर राज्य को प्रतिनिधित्व दिया गया है। आई एम ए का कहना है कि इससे सभी राज्यों की भागीदारी कम हो जाएगी। मुख्य बॉडी में उन्हें बारह-बारह साल के बाद मौका मिलेगा जिससे उनकी आवाज दब जाएगी और उनके हितों को नुक्सान होगा। 

आज तय होगी आगे की रणनीति

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अधिकारी आज बुधवार शाम एक मीटिंग कर रहे हैं जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। जानकारी के मुताबिक़ आईएमए के अधिकारी विपक्षी सांसदों से भी मुलाकात कर रहे हैं जिससे वे इस बिल को पास होने से रोकें। अगर सरकार विवादित प्रावधान हटाने पर सहमत नहीं होती है तो विवाद गहरा सकता है। 

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