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नासा का एलआरओ नहीं ले पाया विक्रम लैंडर की तस्वीर, बताया पहुंच से बाहर
Thu, 19 Sep 2019 10:26 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Thu, 19 Sep 2019 10:26 AM IST
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नासा का ऑर्बिटर नहीं ले पाया लैंडर की तस्वीर
- फोटो : Social Media
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भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की काफी कोशिशें कर रहा है लेकिन उसका अब तक उससे संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है। चांद पर रात होने वाली है। ऐसे में उससे संपर्क की सभी उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी हैं। इसके बावजूद भारतीयों को उम्मीद थी कि नासा उन्हें लैंडर विक्रम की एक और तस्वीर खींचकर भेजेगा लेकिन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि वह उसके ऑर्बिटर में लगे कैमरे की पहुंच से बाहर है।
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नासा का लूनर रिकॉस्सेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) जो पिछले 10 सालों से चांद के चक्कर काट रहा है। वह मंलगवार को उस साउट से गुजरा जहां लैंडर तिरछा पड़ा हुआ है। नासा के ग्रह विज्ञान विभाग के सार्वजनिक मामलों के अधिकारी ए हंदल ने कहा, 'लूनर रिकॉस्सेंस ऑर्बिटर कैमरा (एलआरओसी) ने लक्षित लैंडिंग साइट के आसपास की तस्वीरें खींची हैं लेकिन लैंडर के सही स्थान का का पता नहीं चल पाया है। हो सकता है कि लैंडर का स्थान कैमरे के क्षेत्र से बाहर हो।'
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चंद्रयान-2 इसरो का दूसरा चंद्र मिशन था। सात सितंबर को चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करते हुए वैज्ञानिकों का लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया था। लैंडर के अंदर प्रज्ञान रोवर को भेजा गया था जिसे कि सतह पर उतरकर वहां के वातावरण, भूकंप, खनिज पदार्थों आदि के बारे में जानकारी इकट्ठा करनी थी। एलआरओसी की टीम 17 सितंबर को ली गई तस्वीर की तुलना पहले की तस्वीर से करेगी। जिससे पता लगाया जा सकेगा कि लैंडर दिखाई दे रहा है या नहीं।
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चांद पर विक्रम लैंडर के ऊपर गुजारे गए ऑर्बिटर से मिली तस्वीरों के परिणाम को विश्लेषण और समीक्षा के बाद ही सार्वजनिक किया जाएगा। वर्तमान में चांद के उस स्थान पर रात होनी शुरू हो चुकी है जहां विक्रम को सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी। हंदल ने कहा, 'एलआरओ 17 सितंबर को विक्रम की लैंडिंग साइट के ऊपर से तब गुजरा जब वहां लगभग रात हो चुकी थी। अंधेरे ने वहां के ज्यादातर क्षेत्र को घेर लिया है। हो सकता है कि लैंडर अंधेरे में कहीं हो।'
विशेषज्ञों का मानना है कि लैंडर को वर्तमान परिस्थिति में एलआरओ द्वारा ढूंढ पाना बहुत कम हैं। बंगलूरू स्थित निजी कंपनी टीमइंडस के पूर्व साइंस अधिकारी जतन मेहता ने कहा, 'वर्तमान स्थिति में लैंडर को ढूंढना काफी मुश्किल होगा क्योंकि वहां पर सूर्य की रोशनी काफी कम है। लैंडर अंधेरे में कहीं छुप गया होगा। इस बात की ज्यादा उम्मीद है कि एलआरओ जब दोबारा यहां से गुजरेगा तो उसे लैंडर विक्रम की अच्छी तस्वीर मिल जाएगी।'