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Money Laundering Case: मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में एजुकेशन ट्रस्ट के पूर्व कोषाध्यक्ष गिरफ्तार, बोले- मेरी आय का मुख्य स्रोत कृषि है
Fri, 24 Jun 2022 09:08 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 24 Jun 2022 09:08 PM IST
सार
एजेंसी ने कहा कि आरोपी से पूछताछ की जरूरत है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मामले में बड़ी मात्रा में धन का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। मामले में धोखाधड़ी प्रतीत होती है।
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प्रवर्तन निदेशालय
- फोटो : social media
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विस्तार
मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए गए महाराष्ट्र स्थित एजुकेशन सोसायटी के एक पूर्व कोषाध्यक्ष ने शुक्रवार को यहां एक स्पेशल पीएमएलए कोर्ट को बताया कि उनकी आय का प्राथमिक स्त्रोत 'कृषि' था। कोर्ट ने उनकी ईडी हिरासत को सोमवार 27 जून तक लिए बढ़ा दिया है।
कोल्हापुर स्थित श्री छत्रपति शिवाजी एजुकेशन सोसायटी के पूर्व कोषाध्यक्ष अप्पा साहेब देशमुख को 17 जून को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन पर मेडिकल अभ्यर्थियों के साथ कथित धोखाधड़ी का आरोप है। कथित धोखाधड़ी 29 करोड़ रुपये आंकी गई है।
ईडी ने उसे उसकी प्रारंभिक रिमांड अवधि के अंत में स्पेशल कोर्ट के समक्ष पेश किया। इस अपराध में कितनी आय का प्रवाह हुआ, यह पता लगाने के लिए जांच एजेंसी ने छह दिनों के लिए उसकी और हिरासत की मांग की है।
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एजेंसी ने कहा कि आरोपी से पूछताछ की जरूरत है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मामले में बड़ी मात्रा में धन का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। मामले में धोखाधड़ी प्रतीत होती है।
मुख्यारोपी अप्पासाहेब देशमुख ने अपने सह अभियुक्तों के साथ देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हुए एक गंभीर अपराध करने की साजिश रची। ईडी ने कहा कि इस तरह के अपराध किसी विकासशील देश के लिए किसी भी अन्य अपराध से ज्यादा खतरनाक होते हैं।
हालांकि रिमांड याचिका का विरोध करते हुए अप्पासाहेब देशमुख के वकील रवि जाधव ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल की आय का प्रमुख स्त्रोत कृषि था। वकील ने अदालत को आगे बताया कि ट्रस्ट को कोई भ्रष्ट पैसा नहीं मिला है और आरोपी ने कभी भी किसी कागज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और मामले से संबंधित किसी बैठक में शामिल भी नहीं हुए हैं।
जाधव ने कहा कि आरोपी अपना बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने से एक दिन पहले 16 जून को ईडी के समक्ष पेश हुआ था। जाधव ने कहा कि पूर्व कोषाध्यक्ष ने जांच एजेंसी को सभी प्रासंगिक जानकारी और विवरण (आय स्त्रोत, क्रेडिट, डेबिट, बैंक जमा और निकासी के संबंध में) के साथ-साथ शिक्षा समाज के कामकाज में अपनी भागीदारी दी है। वकील ने कहा कि उन्होंने हमेशा जांच में सहयोग किया है।
इससे पहले ईडी ने कहा था कि मुख्य आरोपी के भाई और चैरिटेबल एजुकेशन सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष महादेव रामचंद्र देशमुख को मई में मामले में एजेंसी ने गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी ने कहा कि अप्पासाहेब देशमुख 2011-16 के बीच एजुकेशन सोसायटी के कोषाध्यक्ष थे। केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि उसने अपने भाई और अन्य लोगों के साथ मिलकर एमबीबीएस में प्रवेश की आड़ में 350 से ज्यादा छात्रों से धोखाधड़ी करके करीब 29 करोड़ रुपये एकत्र किए लेकिन किसी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया गया।
एजेंसी ने आरोप लगाया है कि जांच में पाया गया कि धन के स्त्रोत को छिपाने के लिए और इसे बेदाग साबित करने के लिए धन नकद में एकत्र किया गया और अप्पासाहेब देशमुख और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खाते में जमा किया गया।
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कोल्हापुर स्थित श्री छत्रपति शिवाजी एजुकेशन सोसायटी के पूर्व कोषाध्यक्ष अप्पा साहेब देशमुख को 17 जून को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन पर मेडिकल अभ्यर्थियों के साथ कथित धोखाधड़ी का आरोप है। कथित धोखाधड़ी 29 करोड़ रुपये आंकी गई है।
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ईडी ने उसे उसकी प्रारंभिक रिमांड अवधि के अंत में स्पेशल कोर्ट के समक्ष पेश किया। इस अपराध में कितनी आय का प्रवाह हुआ, यह पता लगाने के लिए जांच एजेंसी ने छह दिनों के लिए उसकी और हिरासत की मांग की है।
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एजेंसी ने कहा कि आरोपी से पूछताछ की जरूरत है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मामले में बड़ी मात्रा में धन का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। मामले में धोखाधड़ी प्रतीत होती है।
मुख्यारोपी अप्पासाहेब देशमुख ने अपने सह अभियुक्तों के साथ देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हुए एक गंभीर अपराध करने की साजिश रची। ईडी ने कहा कि इस तरह के अपराध किसी विकासशील देश के लिए किसी भी अन्य अपराध से ज्यादा खतरनाक होते हैं।
हालांकि रिमांड याचिका का विरोध करते हुए अप्पासाहेब देशमुख के वकील रवि जाधव ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल की आय का प्रमुख स्त्रोत कृषि था। वकील ने अदालत को आगे बताया कि ट्रस्ट को कोई भ्रष्ट पैसा नहीं मिला है और आरोपी ने कभी भी किसी कागज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और मामले से संबंधित किसी बैठक में शामिल भी नहीं हुए हैं।
जाधव ने कहा कि आरोपी अपना बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने से एक दिन पहले 16 जून को ईडी के समक्ष पेश हुआ था। जाधव ने कहा कि पूर्व कोषाध्यक्ष ने जांच एजेंसी को सभी प्रासंगिक जानकारी और विवरण (आय स्त्रोत, क्रेडिट, डेबिट, बैंक जमा और निकासी के संबंध में) के साथ-साथ शिक्षा समाज के कामकाज में अपनी भागीदारी दी है। वकील ने कहा कि उन्होंने हमेशा जांच में सहयोग किया है।
इससे पहले ईडी ने कहा था कि मुख्य आरोपी के भाई और चैरिटेबल एजुकेशन सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष महादेव रामचंद्र देशमुख को मई में मामले में एजेंसी ने गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी ने कहा कि अप्पासाहेब देशमुख 2011-16 के बीच एजुकेशन सोसायटी के कोषाध्यक्ष थे। केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि उसने अपने भाई और अन्य लोगों के साथ मिलकर एमबीबीएस में प्रवेश की आड़ में 350 से ज्यादा छात्रों से धोखाधड़ी करके करीब 29 करोड़ रुपये एकत्र किए लेकिन किसी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया गया।
एजेंसी ने आरोप लगाया है कि जांच में पाया गया कि धन के स्त्रोत को छिपाने के लिए और इसे बेदाग साबित करने के लिए धन नकद में एकत्र किया गया और अप्पासाहेब देशमुख और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खाते में जमा किया गया।