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CAA Rule: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने किया सीएए का स्वागत, कहा- देश की तरक्की के लिए जरूरी
Wed, 13 Mar 2024 07:14 AM IST
यशोधन शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Wed, 13 Mar 2024 07:14 AM IST
सार
मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रभारी शाहिद सईद ने कहा कि दुनिया के अनेक देशों में सीएए कानून बहुत पहले से लागू है और यह देश की तरक्की, अमन और हिफाजत के लिए जरूरी कदम है।
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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने देश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू किए जाने का स्वागत किया है। मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रभारी शाहिद सईद ने कहा कि दुनिया के अनेक देशों में सीएए कानून बहुत पहले से लागू है और यह देश की तरक्की, अमन और हिफाजत के लिए जरूरी कदम है। रमजान के पाक महीने में सरकार ने साधुवाद भरा कदम उठाया है। यह कानून नागरिकता देने का कानून है। किसी की नागरिकता लेने का नहीं है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया कि पिछले साल मुख्य संरक्षक इंद्रेश कुमार की अध्यक्षता में 6 जून से 10 जून तक भोपाल में हुए चार दिवसीय कार्यशाला में मंच ने 11 मुद्दों पर ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित किया था, जिनमें सीएए और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भी शामिल थे।
राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल ने बताया कि भोपाल कार्यशाला, जिसमें मंच के एक हजार से अधिक बुद्धिजीवी, कार्यकर्ता तथा विभिन्न अधिकारियों ने शिरकत की थी, उसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया था कि देश के हर मुसलमान को इसका स्वागत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीएए लागू होने से मुसलमान कतई नहीं घबराएं। यह कानून इज्जत और अधिकार देता है। लोगों को नागरिकता देता है न कि छीनता है।
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राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया कि पिछले साल मुख्य संरक्षक इंद्रेश कुमार की अध्यक्षता में 6 जून से 10 जून तक भोपाल में हुए चार दिवसीय कार्यशाला में मंच ने 11 मुद्दों पर ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित किया था, जिनमें सीएए और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भी शामिल थे।
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राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल ने बताया कि भोपाल कार्यशाला, जिसमें मंच के एक हजार से अधिक बुद्धिजीवी, कार्यकर्ता तथा विभिन्न अधिकारियों ने शिरकत की थी, उसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया था कि देश के हर मुसलमान को इसका स्वागत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीएए लागू होने से मुसलमान कतई नहीं घबराएं। यह कानून इज्जत और अधिकार देता है। लोगों को नागरिकता देता है न कि छीनता है।
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