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मुसलमान न थाली का बैगन न पानी का बुलबुला: आजम
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
Updated Thu, 27 Oct 2016 01:11 AM IST
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नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां ने मुसलमानों के मुस्तकबिल को लेकर चिंता जताई है। प्रदेश और देश में जो राजनीतिक हालात बन रहे हैं उससे मुसलमानों को आगाह किया है। यह पैगाम पहुंचाने की कोशिश कि है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में सोच समझकर फैसला करना होगा। राजनीतिक दलों से दो टूक कहा कि मुसलमान न तो थाली का बैगन और न ही पानी का बुलबुला हैं।
नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां ने प्रेस को जारी बयान में कहा है कि इस समय प्रदेश और देश के राजनीतिक हालात में सबसे ज्यादा मुसलमान परेशान हैं। मुसलमानों को अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। उनका टूटता बिखरता सपना सभी के सामने है। उन्होंने कहा कि बिना कुछ किए सभी ने मुस्लिम वोटों को अपनी जागीर समझ रखा है। राजनीतिक दलों से दो टूक कहा- मुसलमान न तो पानी का बुलबुला हैं और न ही थाली का बैगन, जिसे कहीं भी लुढ़का दिया जाए। मुसलमानों की मौजूदा हालातों पर पैनी नजर है।
बयान में कहा कि फैसला लेने में काफी समय है। संदेश दिया कि फैसला अवश्य ही ऐसा होगा जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश में न बन सके। मुसलमानों का बुद्धिजीवी वर्ग और खुद मुसलमान अपना अच्छा बुरा अच्छी तरह जानते हैं। मुसलमान मुद्दों पर और मजबूत राजनीतिक पकड़ वाले या व्यक्तित्व की ओर अपनी नजर जमाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम लीडरशिप और खुद मुसलमान भी सही मायनों में सेक्युलर हिंदुओं के साथ ही चलना चाहते हैं। लेकिन न हारी हुई लड़ाई लड़ना चाहते हैं और न ही बे-भरोसा राजनीतिक ताकत के सहयोगी बनना चाहते हैं।
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नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां ने प्रेस को जारी बयान में कहा है कि इस समय प्रदेश और देश के राजनीतिक हालात में सबसे ज्यादा मुसलमान परेशान हैं। मुसलमानों को अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। उनका टूटता बिखरता सपना सभी के सामने है। उन्होंने कहा कि बिना कुछ किए सभी ने मुस्लिम वोटों को अपनी जागीर समझ रखा है। राजनीतिक दलों से दो टूक कहा- मुसलमान न तो पानी का बुलबुला हैं और न ही थाली का बैगन, जिसे कहीं भी लुढ़का दिया जाए। मुसलमानों की मौजूदा हालातों पर पैनी नजर है।
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बयान में कहा कि फैसला लेने में काफी समय है। संदेश दिया कि फैसला अवश्य ही ऐसा होगा जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश में न बन सके। मुसलमानों का बुद्धिजीवी वर्ग और खुद मुसलमान अपना अच्छा बुरा अच्छी तरह जानते हैं। मुसलमान मुद्दों पर और मजबूत राजनीतिक पकड़ वाले या व्यक्तित्व की ओर अपनी नजर जमाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम लीडरशिप और खुद मुसलमान भी सही मायनों में सेक्युलर हिंदुओं के साथ ही चलना चाहते हैं। लेकिन न हारी हुई लड़ाई लड़ना चाहते हैं और न ही बे-भरोसा राजनीतिक ताकत के सहयोगी बनना चाहते हैं।
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