राज्यसभा में गूंजा भीमा-कोरेगांव मुद्दा, शरद पवार बोले- हिंसा के पीछे सांप्रदायिक ताकतें जिम्मेदार
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महाराष्ट्र के कोरेगांव में हुई जातीय हिंसा के बाद राज्य सरकार और पुलिस की ओर से कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने इस आरोप में 150 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 16 पर एफआईआर दर्ज की गई है। टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपियों की अलग-अलग कोर्ट में पेशी की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार की ओर से गृह मंत्रालय को कोरेगांव हिंसा पर रिपोर्ट भेजी गई है और ऐसा माना जा रहा है कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह जल्द ही इस पर बयान भी देंगे।
Centre receives report from #Maharashtra govt on caste-based violence.
विज्ञापन विज्ञापन— All India Radio News (@airnewsalerts) January 4, 2018
इस बीच राज्यसभा में कोरेगांव हिंसा पर चर्चा हुई और कांग्रेस की सांसद रजनी पाटिल ने ये मुद्दा उठाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर से लापरवाही बरती गई। पुलिस को मालूम था कि दलित अपना शौर्य दिवस मनाने जा रहे हैं, तो पहले से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
महाराष्ट्र हिंसा पर शरद पवार बोले कि मैं 50 साल से इस आयोजन को जानता हूं और सरकार के संरक्षण में हिंसा हुई। सांप्रदायिक ताकतों ने ये हिंसा फैलाई है।
भीमा-कोरेगांव में पिछले 200 सालों से जश्न हो रहा है। शिवसेना के संजय राउत ने कहा कि आर्थिक राजधानी साजिश का शिकार हो रही है और हालात पर काबू पाने के लिए कारगर कदम केंद्र सरकार की ओर से भी उठाए जाने चाहिए थे। राज्यसभा में चर्चा का मुद्दा ये है कि बीजेपी और आरएसए के करीबी होने की वजह से संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे की गिरफ्तारी नहीं हो रही है।
जिग्नेश मेवाणी पर FIR दर्ज
जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद पर एफआईआर दर्ज की गई है और साथ ही मुंबई में होने वाले जिग्नेश के कार्यक्राम को भी रद्द कर दिया गया है। दरअसल, महाराष्ट्र में फैली हिंसा ने बुधवार को इस कदर उग्र रूप ले लिया था कि इसकी आंच राज्य के 18 जिलों में फैल गई। पुणे से निकली आग में महाराष्ट्र की कई बसे खाक हो गईं और इस वजह से हालात पर काबू पाने के राज्य के कई इलाकों में धारा 144 लगा दी गई।
वहीं डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के पोते और एक्टिविस्ट प्रकाश आंबेडकर सहित आठ संगठनों ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया। प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने न्यायिक जांच के जो आदेश दिए गए हैं वो उन्हें मंजूर नहीं हैं।
हिंसक घटनाओं को देखते हुए औरंगाबाद में धारा-144 लागू कर दी गई है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई। नासिक में दलित संगठनों ने सड़कें जाम कीं और मुंबई में रेल रोको आंदोलन किया।