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मुलायम परिवार का झगड़ा देखिए कौन है किसके साथ, आप भी जानिए?
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 03 Jan 2017 07:33 PM IST
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मुलायम सिंह परिवार में लड़ाई अब पूरी तरह सतह पर आ गई है, दोनों दल अपना अपना दमखम दिखाने के बाद चुनाव आयोग में भी पार्टी के सिंबल को लेकर दावेदारी ठोंक चुके हैं। हालांकि इस बीच दोनों पक्षों में सुलह की कोशिशें भी तेज हो गई हैं इसका नजारा उस समय दिखा जब अखिलेश यादव दोपहर में मुलायम से मिलने उनके घर पहुंचे।
लेकिन इस सबके बीच बड़ा सवाल ये है कि आखिर यादव कुनबे की इस लड़ाई में कौन किसके पक्ष में है। कौन हैं ऐसे लोग जो बाप बेटे की इस जंग में दोनों तरफ से मोर्चा संभाले हुए हैं।
तो आइए हम आपको बताते हैं सपाई कुनबे में कौन है किसके साथ।
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लेकिन इस सबके बीच बड़ा सवाल ये है कि आखिर यादव कुनबे की इस लड़ाई में कौन किसके पक्ष में है। कौन हैं ऐसे लोग जो बाप बेटे की इस जंग में दोनों तरफ से मोर्चा संभाले हुए हैं।
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तो आइए हम आपको बताते हैं सपाई कुनबे में कौन है किसके साथ।
मुलायम गुट
शिवपाल यादव
मुलायम सिंह के सबसे छोटे भाई शिवपाल सिंह इस रण में पूरी तरह उनके साथ हैं। दोनों भाइयों की यह जोड़ी राजनीति में राम लक्ष्मण के तौर पर जानी जाती है।
सरला यादव
शिवपाल यादव की पत्नी हैं सरला यादव। राजनीति में उनकी भूमिका सिर्फ सहकारी बैंक के चेयरमैन के पद तक ही सीमित रही है। उन्हें अखिलेश की सबसे खास चाची माना जाता है। मां की मौत के बाद अखिलेश का ज्यादातर समय उनके सानिध्य में ही बीता, वह भी अखिलेश को बहुत प्यार करती हैं लेकिन मौजूदा झगड़े में वह अपने जेठ मुलायम सिंह के साथ हैं।
आदित्य यादव
शिवपाल के बेटे और पीसीएफ के चेयरमैन। भाई अखिलेश और भाभी डिंपल से काफी नजदीकियों के बाद भी वह अब पिता और ताऊ के साथ हैं।
साधना यादव
मुलायम की दूसरी पत्नी, इस झगड़े में सबसे खामोश उनकी भूमिका है। कहा ये भी जा रहा है कि बाप बेटे के इस झगड़े में उनकी मुख्य भूमिका है जो मुलायम को लगातार अखिलेश के खिलाफ खड़ा कर रही हैं। एमएलसी और अखिलेश के खास उदयवीर सिंह ने तो खुले तौर पर ऐसे आरोप लगाए थे।
प्रतीक यादव
मुलायम के दूसरे पुत्र और अखिलेश के सौतेले भाई। आमतौर पर राजनीति से दूर रहने वाले प्रतीक बॉडी फिटनेस के अपने बिजनेश में ही मशगूल रहते हैं, लेकिन बाप और भाई के इस झगड़े में वह पिता के साथ ही हैं।
अपर्णा यादव
मुलायम की छोटी बहू और प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव पति के मुकाबले राजनीति में ज्यादा सक्रिय रहती हैं। शिवपाल द्वारा जारी की गई लिस्ट में उन्हें कैंट से उम्मीदवार बनाया गया था लेकिन अखिलेश ने जो लिस्ट जारी की उसमें उनका नाम काट दिया गया।
तेज प्रताप यादव
मुलायम के पोते और मैनपुरी से सांसद तेज प्रताप यादव परिवार की इस लड़ाई में सपा सुप्रीमो के साथ हैं। उन्हें मुलायम का सबसे लाड़ला माना जाता है।
अमर सिंह
परिवार से बाहर के लोगों में अमर सिंह मुलायम के सबसे करीबी हैं। राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमर सिंह लंबे समय का वनवास झेलने के बाद एक बार फिर मुलायम सिंह के सिपहसलार की भूमिका में हैं। मौजूदा लड़ाई में वो मुलायम के कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।
बेनी प्रसाद वर्मा
मुलायम के पुराने साथी और राज्यसभा सांसद बेनी प्रसाद वर्मा लंबे समय तक कांग्रेस के साथ रहे, केंद्रीय मंत्री बनकर सत्ता का भी मजा लिया अब फिर वापस सपा में लौट आए हैं। मौजूदा झगड़े में वह मुलायम सिंह के साथ हैं, हालांकि इन नजदीकियों की एक वजह बेनी का अपने बेटे राकेश वर्मा को सपा का टिकट दिलवाना है। अखिलेश के नजदीकी मंत्री अरविंद सिंह गोप का टिकट काटकर बेनी प्रसाद के बेटे राकेश वर्मा को ही टिकट दिया गया है।
जया प्रदा
लंबे समय से नेथप्य में चल रही पूर्व सांसद जया प्रदा सपा के झगड़े में एक बार फिर सक्रिय दिखाई दे रही हैं। कई मौके पर वह अमर सिंह के साथ मुलायम से मुलाकात करती नजर आईं। काफी दिन बाद उन्हें राजनीति में इस तरह सक्रिय देखा जा रहा है।
मुलायम सिंह के सबसे छोटे भाई शिवपाल सिंह इस रण में पूरी तरह उनके साथ हैं। दोनों भाइयों की यह जोड़ी राजनीति में राम लक्ष्मण के तौर पर जानी जाती है।
सरला यादव
शिवपाल यादव की पत्नी हैं सरला यादव। राजनीति में उनकी भूमिका सिर्फ सहकारी बैंक के चेयरमैन के पद तक ही सीमित रही है। उन्हें अखिलेश की सबसे खास चाची माना जाता है। मां की मौत के बाद अखिलेश का ज्यादातर समय उनके सानिध्य में ही बीता, वह भी अखिलेश को बहुत प्यार करती हैं लेकिन मौजूदा झगड़े में वह अपने जेठ मुलायम सिंह के साथ हैं।
आदित्य यादव
शिवपाल के बेटे और पीसीएफ के चेयरमैन। भाई अखिलेश और भाभी डिंपल से काफी नजदीकियों के बाद भी वह अब पिता और ताऊ के साथ हैं।
साधना यादव
मुलायम की दूसरी पत्नी, इस झगड़े में सबसे खामोश उनकी भूमिका है। कहा ये भी जा रहा है कि बाप बेटे के इस झगड़े में उनकी मुख्य भूमिका है जो मुलायम को लगातार अखिलेश के खिलाफ खड़ा कर रही हैं। एमएलसी और अखिलेश के खास उदयवीर सिंह ने तो खुले तौर पर ऐसे आरोप लगाए थे।
प्रतीक यादव
मुलायम के दूसरे पुत्र और अखिलेश के सौतेले भाई। आमतौर पर राजनीति से दूर रहने वाले प्रतीक बॉडी फिटनेस के अपने बिजनेश में ही मशगूल रहते हैं, लेकिन बाप और भाई के इस झगड़े में वह पिता के साथ ही हैं।
अपर्णा यादव
मुलायम की छोटी बहू और प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव पति के मुकाबले राजनीति में ज्यादा सक्रिय रहती हैं। शिवपाल द्वारा जारी की गई लिस्ट में उन्हें कैंट से उम्मीदवार बनाया गया था लेकिन अखिलेश ने जो लिस्ट जारी की उसमें उनका नाम काट दिया गया।
तेज प्रताप यादव
मुलायम के पोते और मैनपुरी से सांसद तेज प्रताप यादव परिवार की इस लड़ाई में सपा सुप्रीमो के साथ हैं। उन्हें मुलायम का सबसे लाड़ला माना जाता है।
अमर सिंह
परिवार से बाहर के लोगों में अमर सिंह मुलायम के सबसे करीबी हैं। राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमर सिंह लंबे समय का वनवास झेलने के बाद एक बार फिर मुलायम सिंह के सिपहसलार की भूमिका में हैं। मौजूदा लड़ाई में वो मुलायम के कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।
बेनी प्रसाद वर्मा
मुलायम के पुराने साथी और राज्यसभा सांसद बेनी प्रसाद वर्मा लंबे समय तक कांग्रेस के साथ रहे, केंद्रीय मंत्री बनकर सत्ता का भी मजा लिया अब फिर वापस सपा में लौट आए हैं। मौजूदा झगड़े में वह मुलायम सिंह के साथ हैं, हालांकि इन नजदीकियों की एक वजह बेनी का अपने बेटे राकेश वर्मा को सपा का टिकट दिलवाना है। अखिलेश के नजदीकी मंत्री अरविंद सिंह गोप का टिकट काटकर बेनी प्रसाद के बेटे राकेश वर्मा को ही टिकट दिया गया है।
जया प्रदा
लंबे समय से नेथप्य में चल रही पूर्व सांसद जया प्रदा सपा के झगड़े में एक बार फिर सक्रिय दिखाई दे रही हैं। कई मौके पर वह अमर सिंह के साथ मुलायम से मुलाकात करती नजर आईं। काफी दिन बाद उन्हें राजनीति में इस तरह सक्रिय देखा जा रहा है।
अखिलेश खेमा
रामगोपाल यादव
मुलायम के दूसरे भाई रामगोपाल यादव पूरी तरह अखिलेश के साथ हैं। इसके चलते वह तीन बार पार्टी से निष्कासन भी झेल चुके हैं लेकिन उसके बाद भी वह अखिलेश के साथ मजबूती से डटे हैं। बाप-बेटे की इस लड़ाई में शिवपाल और रामगोपाल यादव के आपसी अर्हं को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। जो दोनों तरफ से चिंगारी को हवा देने में जुटे हैं। इसके आरोप दोनों ही पक्षों से लगते रहे हैं।
धर्मेंन्द्र यादव
बदायूं से सांसद और मुलायम के बड़े भाई के बेटे धर्मेन्द्र यादव इस जंग में छोटे भाई अखिलेश यादव के साथ हैं। हालांकि वह अभी खुलकर तो सामने नहीं आए हैं लेकिन उनका समर्थन अखिलेश यादव को ही है।
अक्षय यादव
रामगोपाल यादव के बेटे और फिरोजाबाद से सांसद अक्षय यादव इस जंग में पिता और भाई के साथ हैं।
डिंपल यादव
अखिलेश यादव की पत्नी और कन्नौज से सांसद डिंपल यादव पिता पुत्र की जंग में अपने पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। अखिलेश की मजबूती के पीछे उन्हें भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
नरेश अग्रवाल
रामगोपाल के साथ राज्यसभा में सपा का चेहरा रहे नरेश अग्रवाल को कभी मुलायम सिंह का खास माना जाता था। लेकिन एक जनवरी को अखिलेश यादव द्वारा बुलाए गए राष्ट्रीय अधिवेशन में नरेश अग्रवाल पाला बदलकर अखिलेश गुट के साथ नजर आए। इसके चलते मुलायम ने उन्हें उसी दिन पार्टी से निकालने का आदेश जारी कर दिया।
किरणमय नंदा
कभी पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार में मंत्री रहे किरणमय नंदा की लंबे समय बाद सपा में वापसी हुई थी। उन्हें मुलायम सिंह का विश्वस्त माना जाता था जिन्हें वह खुद पार्टी में लेकर आए थे और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी। लेकिन लखनऊ में हुए अखिलेश के अधिवेशन में उन्होंने अध्यक्ष की भूमिका निभाई।
उदयवीर
अखिलेश यादव के करीबी और सपा एमएलसी उदयवीर कभी पार्टी के मुखर चेहरा माने जाते थे जिन्हें खुद मुलायम भी पसंद करते थे। लेकिन मुलायम की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के खिलाफ खत लिखकर उदयवीर मुलायम गुट के निशाने पर आ गए। चंद दिनों बाद ही शिवपाल ने उन्हें पार्टी से निकालने का फरमान जारी कर दिया।
राजेन्द्र चौधरी
मौजूदा सरकार में कैबिनेट मंत्री और सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी को कुछ दिन पहले तक मुलायम का विश्वस्त माना जाता था। मुलायम की नजदीकियों के चलते ही अखिलेश ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया था लेकिन मौजूदा लड़ाई में वह मुलायम का साथ छोड़ अखिलेश के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
मुलायम के दूसरे भाई रामगोपाल यादव पूरी तरह अखिलेश के साथ हैं। इसके चलते वह तीन बार पार्टी से निष्कासन भी झेल चुके हैं लेकिन उसके बाद भी वह अखिलेश के साथ मजबूती से डटे हैं। बाप-बेटे की इस लड़ाई में शिवपाल और रामगोपाल यादव के आपसी अर्हं को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। जो दोनों तरफ से चिंगारी को हवा देने में जुटे हैं। इसके आरोप दोनों ही पक्षों से लगते रहे हैं।
धर्मेंन्द्र यादव
बदायूं से सांसद और मुलायम के बड़े भाई के बेटे धर्मेन्द्र यादव इस जंग में छोटे भाई अखिलेश यादव के साथ हैं। हालांकि वह अभी खुलकर तो सामने नहीं आए हैं लेकिन उनका समर्थन अखिलेश यादव को ही है।
अक्षय यादव
रामगोपाल यादव के बेटे और फिरोजाबाद से सांसद अक्षय यादव इस जंग में पिता और भाई के साथ हैं।
डिंपल यादव
अखिलेश यादव की पत्नी और कन्नौज से सांसद डिंपल यादव पिता पुत्र की जंग में अपने पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। अखिलेश की मजबूती के पीछे उन्हें भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
नरेश अग्रवाल
रामगोपाल के साथ राज्यसभा में सपा का चेहरा रहे नरेश अग्रवाल को कभी मुलायम सिंह का खास माना जाता था। लेकिन एक जनवरी को अखिलेश यादव द्वारा बुलाए गए राष्ट्रीय अधिवेशन में नरेश अग्रवाल पाला बदलकर अखिलेश गुट के साथ नजर आए। इसके चलते मुलायम ने उन्हें उसी दिन पार्टी से निकालने का आदेश जारी कर दिया।
किरणमय नंदा
कभी पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार में मंत्री रहे किरणमय नंदा की लंबे समय बाद सपा में वापसी हुई थी। उन्हें मुलायम सिंह का विश्वस्त माना जाता था जिन्हें वह खुद पार्टी में लेकर आए थे और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी। लेकिन लखनऊ में हुए अखिलेश के अधिवेशन में उन्होंने अध्यक्ष की भूमिका निभाई।
उदयवीर
अखिलेश यादव के करीबी और सपा एमएलसी उदयवीर कभी पार्टी के मुखर चेहरा माने जाते थे जिन्हें खुद मुलायम भी पसंद करते थे। लेकिन मुलायम की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के खिलाफ खत लिखकर उदयवीर मुलायम गुट के निशाने पर आ गए। चंद दिनों बाद ही शिवपाल ने उन्हें पार्टी से निकालने का फरमान जारी कर दिया।
राजेन्द्र चौधरी
मौजूदा सरकार में कैबिनेट मंत्री और सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी को कुछ दिन पहले तक मुलायम का विश्वस्त माना जाता था। मुलायम की नजदीकियों के चलते ही अखिलेश ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया था लेकिन मौजूदा लड़ाई में वह मुलायम का साथ छोड़ अखिलेश के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।