Ticket Distribution: कहीं तोड़फोड़ तो कहीं गाड़ी के सामने लेटकर प्रदर्शन, MP में BJP-कांग्रेस में बगावत क्यों?
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विस्तार
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के एलान के बाद राज्य में चुनावी सरगर्मी जोरों पर है। तमाम सियासी दल चुनाव प्रचार में जोर आजमाइश कर रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस ने राज्य में लगभग अपने सभी उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। हालांकि, प्रत्याशियों की सूची आने के साथ ही दोनों पार्टियों में बगावत के सुर भी फूटने लगे हैं। जहां भाजपा के बड़े नेताओं को घेरकर समर्थक नारेबाजी कर रहे हैं, तो वहीं कांग्रेस में भी सिर फुटव्वल की स्थिति देखी जा रही है।
भाजपा की पहली सूची में बड़े केंद्रीय मंत्रियों को उतार दिया गया, फिर भी ऐसा विरोध नहीं हुआ। गुजरात में पूरी कैबिनेट बदली, लेकिन विरोध नहीं हुआ और पार्टी ने चुनाव में ऐतिहासिक जीत भी हासिल की। भाजपा अक्सर खुद को अनुशासन वाली पार्टी होने का दावा करती है, तो ऐसे में सवाल उठता है कि मध्य प्रदेश भाजपा में कहां-कहां विरोध हो रहा है? पार्टी में ऐसी बगावत क्यों?
उधर, पिछले दिनों कमलनाथ ने असुंष्टों से हंसी-हंसी में कुर्ता फाड़ने की बात कह दी थी? अब जब प्रत्याशी घोषित हों चुके हैं तो क्या कांग्रेस में सच में कपड़े फट रहे? राज्य की विपक्षी दल में विरोध के सुर क्यों उठे? आइये तमाम सवालों को समझते हैं...
पहले बात भाजपा की करते हैं...
जबलपुर
जबलपुर में शनिवार को भाजपा में प्रत्याशियों की सूची सामने आने के बाद जमकर आपसी विरोध देखने को मिला। भाजपा संभागीय कार्यालय में नाराज कार्यकर्ताओं ने प्रदेश भाजपा के चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को घेर लिया। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की गई। इस दौरान गुस्साए कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ धक्का मुक्की की और उनकी गनमैन के साथ हाथापाई की।
दरअसल, भाजपा कार्यकर्ता जबलपुर मध्य सीट से अभिलाष पांडे को टिकट देने का विरोध कर रहे थे। कार्यकर्ताओं का कहना था कि अभिलाष बाहरी प्रत्याशी हैं जिन्हें वो समर्थन नहीं देंगे। युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष जबलपुर पश्चिम सीट के रहने वाले हैं, जबकि टिकट जबलपुर मध्य से दिया गया है।
ग्वालियर
विरोध के तेवर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर में भी देखने को मिला। भाजपा ने पांचवीं सूची में ग्वालियर की पूर्व विधानसभा से सिंधिया की मामी माया सिंह को उम्मीदवार घोषित किया। हालांकि, भाजपा नेता मुन्नालाल गोयल इस सीट से अपनी दावेदारी ठोक रहे थे।
जैसे ही पूर्व मंत्री माया सिंह के उम्मीदवारी की घोषणा हुई, मुन्नालाल समर्थकों ने विरोध करना शुरू कर दिया। समर्थकों ने रविवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल में करीब दो घंटे तक हंगामा किया। सिंधिया के अपने महल से बाहर निकलते वक्त कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और उनकी गाड़ी के आगे भी लेटकर विरोध प्रदर्शन किया।
इस बीच, सिंधिया ने कार्यकर्ताओं से कहा कि कई बार ऐसा हुआ है कि दिग्गजों के टिकट नहीं हो पाए हैं और मैंने खुद मुन्नालाल गोयल का टिकट तीन बार करवाया है, यह सबको पता है। मैं विश्वास दिलाता हूं कि आप लोगों के साथ खड़ा हूं और मुन्ना के साथ खड़ा हूं।
भिंड
अन्य शहरों की तरह भिंड में भी भाजपा में बगावती सुर दिखे। दरअसल, भिंड शहरी सीट से भाजपा ने संजीव सिंह कुशवाह की जगह भाजपा ने पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह को टिकट दिया है। टिकटों की घोषणा के बाद से ही विधायक संजीव सिंह और उनके समर्थक कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। रविवार को सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता विधायक के आवास पर पहुंचे और उनके समर्थन में नारेबाजी की।
वहीं विधायक ने भी भाजपा द्वारा टिकट नहीं देने के फैसले को पार्टी का षड्यंत्र और विश्वासघात बताया है। कहा जा रहा है कि संजीव जल्द ही पार्टी के खिलाफ भिंड से चुनाव लड़ सकते हैं। 2018 में बसपा के टिकट पर भिंड से चुनाव जीते संजीव सिंह कुशवाह पिछले साल भाजपा में शामिल हुए थे।
बुरहानपुर
बगावत और विरोध के दृश्य बुरहानपुर से भी सामने आए। दरअसल, बुरहानपुर सीट से भाजपा ने पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस को अपना उम्मीदवार घोषित किया बनाया है, जबकि यहां से भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और चार बार के खंडवा लोकसभा सीट से सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के पुत्र हर्षवर्धन टिकट की दावेदारी पेश कर रहे थे।
अब हर्षवर्धन को टिकट ना दिए जाने के चलते खुद हर्षवर्धन और उनके समर्थकों ने बगावती तेवर अपना लिया है। रविवार रात बड़ी संख्या में नंद कुमार सिंह चौहान के समर्थक उनके निवास पर पहुंचे थे। उन्होंने वहां नारेबाजी कर मांग है कि बुरहानपुर का टिकट बदलकर दिवंगत नेता नंदकुमार सिंह चौहान के पुत्र हर्षवर्धन चौहान को दिया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो, वह पार्टी के पक्ष में काम नहीं करेंगे। समर्थकों के कहना था कि अगर टिकट नहीं बदला गया तो वह हर्षवर्धन सिंह चौहान को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतारकर चुनाव लड़वा सकते हैं। खुद हर्षवर्धन ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है।
सिंगरौली
ऊर्जाधानी सिंगरौली में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। सिंगरौली शहरी सीट से भाजपा ने मौजूदा विधायक रामलल्लू वैश्य की जगह रामनिवास शाह को प्रत्याशी बनाया है। उधर टिकट कटने से नाराज विधायक ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की है, जिसमें उन्होंने भाजपा छोड़ने का एलान कर दिया। हालांकि, विधायक ने चुनाव लड़ने को लेकर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है।
अब कांग्रेस की बात करते हैं...
भोपाल
सूची जारी करने के बाद भाजपा की तरह कांग्रेस में भी बगावत दिख रही है। सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कमलनाथ के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं की मांग है कि पार्टी ने नर्मदापुरम, सिवनी मालवा और रामपुर बघेलान सीट से जो उम्मीदवार तय किए गए हैं, उन्हें बदला जाए। यहां गलत आदमी को टिकट दिया गया है और हम मांग कर रहे हैं कि उम्मीदवार को बदला जाए।
शिवपुरी
शिवपुरी में केपी सिंह को टिकट मिलने के बाद भाजपा से कांग्रेस में आए वीरेंद्र रघुवंशी नाराज हैं। दरअसल, इस सीट पर पार्टी ने शिवपुरी जिले की ही पिछोर सीट से छह बार के विधायक केपी सिंह को टिकट दिया है। पिछले दिनों उनके समर्थक नाराजगी जताने भोपाल तक पहुंच गए। यहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के सामने हुई उनकी नोकझोंक का एक वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें बात कपड़े फटने तक आ गई।
देवास
देवास में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का विरोध हिंसक हो गया। दरअसल, हाल ही में भाजपा से कांग्रेस में आए पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे पूर्व मंत्री दीपक जोशी को कांग्रेस ने खातेगांव विधानसभा से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। जोशी को टिकट मिलने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार को जब पूर्व मंत्री जोशी का काफिला खातेगांव से निकला तो कार्यकर्ताओं ने घेरकर नारेबाजी की और काले झंडे दिखाए। इसी दौरान किसी ने जोशी की कार का कांच फोड़ दिया और उनके गार्ड के साथ हाथापाई भी की गई।
यहां भी दिखे बगावती सुर
जावरा से हिम्मत श्रीमाल को टिकट देने पर डीपी धाकड़ ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और कई दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं खरगापुर में अजय यादव ने टिकट न मिलने पर न्याय यात्रा निकाली। इसके अलावा मुरैना से विधायक राकेश मावई ने पार्टी के लिए काम नहीं करने का एलान कर बगावत दिखाई है।
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 21 अक्टूबर को अधिसूचना जारी हुई। नामांकन की आखिरी तारीख 30 अक्तूबर है। 31 अक्तूबर तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। प्रत्याशी 2 नवंबर तक नाम वापस ले सकते हैं। 17 नवंबर को मतदान होगा जबकि 3 दिसंबर को मतगणना होगी। 5 दिसंबर को चुनाव की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी।