फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Mother Teresa to be made a saint in September

मदर टेरेसा को संत की उपाधि, 19 साल बाद मिलेगा संत का दर्जा

Tue, 15 Mar 2016 04:43 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 15 Mar 2016 04:43 PM IST
विज्ञापन
Mother Teresa to be made a saint in September
मदर टेरेसा - फोटो : pti

मदर टेरेसा को 4 सितंबर 2016 को संत की उपाधि दी जाएगी। पोप फ्रांसिस ने मंगलवार को इस बात का ऐलान किया। मदर टेरेसा को रोमन कैथलिक संत की उपाधि दी जाएगी। मदर टेरेसा के निधन के 19 साल बाद उनको संत की उपाधि मिलेगी।

विज्ञापन


मदर टेरेसा को संत की उपाधि देने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए मंगलवार को वेटिकन समिति की औपचारिक बैठक हुई। बैठक में पोप फ्रांसिस उस प्रक्रिया (कैनोनाइजेशन) के आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत मदर टेरेसा को संत घोषित किया गया।
विज्ञापन


मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को अग्नेसे गोंकशे बोजशियु के नाम से एक अल्बेनीयाई परिवार में उस्कुब, ओटोमन साम्राज्य (आज का सोप्जे, मेसेडोनिया गणराज्य) में हुआ था। मदर टेरसा रोमन कैथोलिक नन थीं, जिनके पास भारतीय नागरिकता थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने 1950 में कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चेरिटी की स्थापना की। 45 सालों तक गरीब, बीमार, अनाथ लोगों की मदद की और साथ ही चेरिटी के मिशनरीज के प्रसार का भी काम किया।

मदर टेरेसा के जीवनकाल में मिशनरीज ऑफ चेरिटी का कार्य लगातार विस्तृत होता रहा। उनकी मृत्यु के समय तक वे 123 देशों में 610 मिशनरीज नियंत्रित कर रही थी। इसमें एचआईवी/एड्स, कुष्ठ और तपेदिक के रोगियों के लिए धर्मशालाएं,घर शामिल थे और साथ ही सूप रसोई, बच्चों और परिवार के लिए परामर्श कार्यक्रम, अनाथालय और विद्यालय भी थे।  5 सितम्बर 1997 को हार्ट अटैक के कारण मदर टेरेसा का देहावसान हो गया।

मानव सेवा के लिए ‌मदर टेरेसा को मिला सम्मान और पुरस्कार

Mother Teresa to be made a saint in September

मदर टेरेसा को उनकी सेवाओं के लिए कई पुरस्कारों एवं सम्मान दिए गए। गरीबों और असहाय लोगों के लिए किए गए मानवीय कार्यों के लिए मदर टेरेसा को 19 दिसम्बर 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया। वह तीसरी भारतीय महिला नागरिक है जिन्हें इस सबसे बड़े पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

1980 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया। 1939 में उन्हें पोपजान तेइसवें का शांति पुरस्कार और धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए टेम्पेलटन फाउण्डेशन पुरस्कार प्रदान किया गया।

विश्व भारती विध्यालय ने उन्हें  देशिकोत्तम पदवी की जो कि उसकी ओर से दी जाने वाली सर्वोच्च पदवी है। अमेरिका के कैतथोलिक विश्वविध्यलय ने उन्हे डोक्टोरेट की उपाधि से सम्मानित्त किया। भारत सरकार् द्वारा 1962 में उन्हें 'पद्मश्री' की उपाधि दी गई। 1988 में ब्रिटेन द्वारा 'आईर ओफ द ब्रिटिश इम्पायर' की उपाधि प्रदान की गयी। बनारस हिंदू विश्वविध्यलय ने उन्हें डी-लिट की उपाधि भी दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed