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Monkeypox : सतर्कता से ही बचाव संभव, 21 दिन तक रहना होगा क्वारंटीन घाव को पूरी तरह से ढंकना जरूरी
Thu, 28 Jul 2022 06:17 AM IST
योगेश साहू
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Thu, 28 Jul 2022 06:17 AM IST
सार
Monkeypox News Hindi : मंकीपॉक्स (Monkeypox) मरीज के संपर्क में आने, उससे शारीरिक संपर्क बनाने या फिर उसके आसपास दूषित सामग्री जैसे कपड़े, बिस्तर इत्यादि के संपर्क में आने पर संक्रमण फैल सकता है। इससे बचना बहुत जरूरी है। बुखार (Fever), सिरदर्द (Headache), चकत्ते होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
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मंकीपॉक्स
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
Monkeypox News Hindi : मंकीपॉक्स संक्रमित रोगी (infected patient) को 21 दिन तक क्वारंटीन (quarantine) रहना होगा। इसके अलावा चेहरे पर मास्क पहनने के साथ-साथ हाथों की स्वच्छता, घावों को पूरी तरह से ढकना और पूरी तरह से ठीक होने तक अस्पताल (Hospital) में रहना होगा। यह जानकारी राज्यों को जारी दिशा निर्देशों (guidelines) में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Health Ministry) ने दी है।
मंत्रालय ने दिशा-निर्देशों (guidelines) में कहा है कि वार्ड में भर्ती संक्रमित रोगी (infected patient) या फिर संदिग्ध रोगी से जुड़े किसी भी दूषित सामग्री (contaminated material) के संपर्क में आने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को जब तक ड्यूटी से बाहर नहीं करना है जब तक उनमें कोई लक्षण (symptoms) विकसित न हो। हालांकि ऐसे स्वास्थ्य कर्मचारियों (health workers) की 21 दिन तक निगरानी बहुत जरूरी है।
दिशा-निर्देशों में सलाह दी है कि मंकीपॉक्स संक्रमित मरीज को तीन लेयर वाला मास्क पहनना चाहिए जबकि त्वचा के घावों को पूरी तरह से ढक कर रखना चाहिए ताकि संक्रमण न फैले। मरीजों को तब तक आइसोलेशन में रहना चाहिए जब तक कि सभी घाव ठीक नहीं हो जाते। ब्यूरो
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कपड़े, बिस्तर से भी संक्रमण
मंकीपॉक्स मरीज के संपर्क में आने, उससे शारीरिक संपर्क बनाने या फिर उसके आसपास दूषित सामग्री जैसे कपड़े, बिस्तर इत्यादि के संपर्क में आने पर संक्रमण फैल सकता है। इससे बचना बहुत जरूरी है।
मरीज में ये हैं लक्षण
मंकीपॉक्स आमतौर पर बुखार, सिरदर्द, तीन सप्ताह तक चकत्ते, गले में खराश, खांसी और सूजन लिम्फ नोड्स के साथ प्रकट होता है। लक्षणों में घाव शामिल होते हैं, जो आमतौर पर बुखार की शुरुआत के एक से तीन दिनों के भीतर शुरू होते हैं।
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मंत्रालय ने दिशा-निर्देशों (guidelines) में कहा है कि वार्ड में भर्ती संक्रमित रोगी (infected patient) या फिर संदिग्ध रोगी से जुड़े किसी भी दूषित सामग्री (contaminated material) के संपर्क में आने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को जब तक ड्यूटी से बाहर नहीं करना है जब तक उनमें कोई लक्षण (symptoms) विकसित न हो। हालांकि ऐसे स्वास्थ्य कर्मचारियों (health workers) की 21 दिन तक निगरानी बहुत जरूरी है।
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दिशा-निर्देशों में सलाह दी है कि मंकीपॉक्स संक्रमित मरीज को तीन लेयर वाला मास्क पहनना चाहिए जबकि त्वचा के घावों को पूरी तरह से ढक कर रखना चाहिए ताकि संक्रमण न फैले। मरीजों को तब तक आइसोलेशन में रहना चाहिए जब तक कि सभी घाव ठीक नहीं हो जाते। ब्यूरो
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कपड़े, बिस्तर से भी संक्रमण
मंकीपॉक्स मरीज के संपर्क में आने, उससे शारीरिक संपर्क बनाने या फिर उसके आसपास दूषित सामग्री जैसे कपड़े, बिस्तर इत्यादि के संपर्क में आने पर संक्रमण फैल सकता है। इससे बचना बहुत जरूरी है।
मरीज में ये हैं लक्षण
मंकीपॉक्स आमतौर पर बुखार, सिरदर्द, तीन सप्ताह तक चकत्ते, गले में खराश, खांसी और सूजन लिम्फ नोड्स के साथ प्रकट होता है। लक्षणों में घाव शामिल होते हैं, जो आमतौर पर बुखार की शुरुआत के एक से तीन दिनों के भीतर शुरू होते हैं।
मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले
- फोटो : WHO
वैक्सीन और किट के लिए निकाला टेंडर
देश में मंकीपॉक्स के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार सतर्क हो गई है। सरकार ने मंकीपॉक्स की वैक्सीन निर्माण के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्य' यानि टेंडर निकाला है। इसके अलावा मंकीपॉक्स की जांच के लिए टेस्टिंग किट का भी टेंडर निकाला गया है। वैक्सीन और टेस्टिंग किट प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप मोड से बनाई जाएगी। सरकार की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक 10 अगस्त तक कंपनियां ईओआई जमा कर सकती हैं। अब तक देश में मंकीपॉक्स के चार केस मिल चुके हैं। इनमें से तीन केरल में और एक दिल्ली में है। दिल्ली में पाया गया मंकीपॉक्स का पहला मरीज एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह ठीक हो रहा है।
संभावित टीके के विकास के लिए केंद्र के साथ चर्चा शुरू
बुधवार को सूत्रों ने बताया कि कई दवा कंपनियों ने मंकीपॉक्स के खिलाफ संभावित टीके के विकास के लिए केंद्र के साथ चर्चा शुरू कर दी है। मंकीपॉक्स के खिलाफ वैक्सीन विभिन्न वैक्सीन निर्माण कंपनियों के साथ चर्चा में है, लेकिन इस तरह के किसी भी फैसले के लिए यह एक बहुत ही शुरुआती दौर में है। यदि इसकी जरूरत है तो हमारे पास संभावित निर्माता हैं। अगर भविष्य में इसकी जरूरत पड़ी तो विकल्पों की तलाश की जाएगी। वैक्सीन निर्माण कंपनियों में से एक ने कहा कि विशेष रूप से मंकीपॉक्स के लिए ऐसी कोई अगली पीढ़ी का टीका नहीं है और वायरस भी उत्परिवर्तित (म्यूटेंट) हो गया है। कंपनी ने कहा कि भविष्य में यदि मामले बढ़ते हैं तो वैक्सीन की आवश्यकता होगी।
नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल बोले- घबराने की जरूरत नहीं
कई दवा कंपनियां सरकार के साथ मंकीपॉक्स के संभावित टीके पर चर्चा में लगी हुई हैं। भारत में अब तक मंकीपॉक्स के चार मामले सामने आ चुके हैं। तीन मामले केरल के हैं जबकि एक दिल्ली का है। एएनआई के साथ एक साक्षात्कार में नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि भारत इस बीमारी के खिलाफ पूरी तरह से तैयार है और घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों की जांच के लिए हमारी रोग निगरानी प्रणाली और भी अधिक सक्रिय हो गई है। स्थिति नियंत्रण में है, चिंता और घबराने की कोई बात नहीं है।
देश में मंकीपॉक्स के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार सतर्क हो गई है। सरकार ने मंकीपॉक्स की वैक्सीन निर्माण के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्य' यानि टेंडर निकाला है। इसके अलावा मंकीपॉक्स की जांच के लिए टेस्टिंग किट का भी टेंडर निकाला गया है। वैक्सीन और टेस्टिंग किट प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप मोड से बनाई जाएगी। सरकार की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक 10 अगस्त तक कंपनियां ईओआई जमा कर सकती हैं। अब तक देश में मंकीपॉक्स के चार केस मिल चुके हैं। इनमें से तीन केरल में और एक दिल्ली में है। दिल्ली में पाया गया मंकीपॉक्स का पहला मरीज एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह ठीक हो रहा है।
संभावित टीके के विकास के लिए केंद्र के साथ चर्चा शुरू
बुधवार को सूत्रों ने बताया कि कई दवा कंपनियों ने मंकीपॉक्स के खिलाफ संभावित टीके के विकास के लिए केंद्र के साथ चर्चा शुरू कर दी है। मंकीपॉक्स के खिलाफ वैक्सीन विभिन्न वैक्सीन निर्माण कंपनियों के साथ चर्चा में है, लेकिन इस तरह के किसी भी फैसले के लिए यह एक बहुत ही शुरुआती दौर में है। यदि इसकी जरूरत है तो हमारे पास संभावित निर्माता हैं। अगर भविष्य में इसकी जरूरत पड़ी तो विकल्पों की तलाश की जाएगी। वैक्सीन निर्माण कंपनियों में से एक ने कहा कि विशेष रूप से मंकीपॉक्स के लिए ऐसी कोई अगली पीढ़ी का टीका नहीं है और वायरस भी उत्परिवर्तित (म्यूटेंट) हो गया है। कंपनी ने कहा कि भविष्य में यदि मामले बढ़ते हैं तो वैक्सीन की आवश्यकता होगी।
नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल बोले- घबराने की जरूरत नहीं
कई दवा कंपनियां सरकार के साथ मंकीपॉक्स के संभावित टीके पर चर्चा में लगी हुई हैं। भारत में अब तक मंकीपॉक्स के चार मामले सामने आ चुके हैं। तीन मामले केरल के हैं जबकि एक दिल्ली का है। एएनआई के साथ एक साक्षात्कार में नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि भारत इस बीमारी के खिलाफ पूरी तरह से तैयार है और घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों की जांच के लिए हमारी रोग निगरानी प्रणाली और भी अधिक सक्रिय हो गई है। स्थिति नियंत्रण में है, चिंता और घबराने की कोई बात नहीं है।