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कश्मीरियों को देश के साथ आत्मसात करने के लिए संविधान संशोधन जरूरी: भागवत

Sun, 01 Oct 2017 06:10 AM IST
एजेंसी/ नागपुर
एजेंसी/ नागपुर Updated Sun, 01 Oct 2017 06:10 AM IST
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 mohan bhagwat address in celebration of dushera by RSS at its headquarter in maharashtras nagpur 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नाम लिए बिना अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को पूरे देश के साथ आत्मसात करने के लिए संविधान संशोधन करना ही होगा। इसके बिना यह प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। 

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संघ प्रमुख ने शनिवार को यहां विजयदशमी पर देश भर के कार्यकर्ताओं के बीच एक घंटे से ज्यादा के अपने संबोधन में रोहिंग्या समस्या के अलावा गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा और आर्थिक परिदृश्य पर भी अपनी बेबाक राय रखी। कश्मीर पर भागवत ने कहा कि पुराने कानूनों को खत्म करना होगा और संविधान में अनिवार्य संशोधन करने होंगे।
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ऐसा करके ही कश्मीर के लोगों को बाकी देश के साथ जोड़ा जा सकता है और तभी देश के विकास में उनकी बराबर की हिस्सेदारी और सहयोग भी सुनिश्चित हो पाएगा। भागवत ने हालांकि अपने बयान में अनुच्छेद 370 का जिक्र नहीं किया, लेकिन भाजपा और संघ लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले इस अनुच्छेद को खत्म करने की वकालत करते रहे हैं। 
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भागवत ने कश्मीर में रह रहे हिंदू शरणार्थियों का मुद्दा भी उठाया और कहा कि आजादी के बाद सीमा पार से आए हिंदू शरणार्थियों का मसला अभी तक अनसुलझा है। वे शिक्षा, रोजगार और प्रजातांत्रिक अधिकार जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कश्मीरी पंडितों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1990 में घाटी से विस्थापित हुए लोगों की समस्या भी सुलझाने की आवश्यकता है। 

उन्होंने कहा कि विकास के लाभ को बगैर भेदभाव के राज्य के कोने-कोने तक पहुंचाने की जरूरत है। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और नितिन गडकरी भी उपस्थित थे। भागवत ने लगातार हो रहे संघर्षविराम उल्लंघनों के बीच सरहदी इलाकों में रहने वाले लोगों के साहस की भी प्रशंसा की। साथ ही, सीमाओं की हिफाजत और आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैनिकों और अर्धसैनिक बलों का आभार जताया।

70 साल में पहली बार आजादी का अहसास हो रहा

 mohan bhagwat address in celebration of dushera by RSS at its headquarter in maharashtras nagpur 

भागवत ने चीन के साथ दोकलम विवाद को सफलता पूर्वक निपटाने के लिए मोदी सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि हमें आजादी मिले हुए 70 साल हो गए हैं, लेकिन इसका अहसास पहली बार हो रहा है। दुनिया भी अब हमारी ताकत को मान रही है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर हमारा कद ऊंचा हुआ है।

रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा
भागवत ने कहा कि केंद्र सरकार रोहिंग्या को लेकर कोई भी फैसला राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए करे। रोहिंग्या को म्यांमार से इसलिए भगाया जा रहा है क्योंकि वे वहां हिंसक आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं और उनके आतंकियों से संबंध हैं। इसलिए वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा कि देश पहले से ही अवैध बांग्लादेशी शरणार्थियों की समस्या से जूझ रहा है और अब रोहिंग्या हमारे देश में घुसपैठ कर रहे हैं। उन्हें यहां शरण दी गई तो न सिर्फ वे रोजगार के अवसर छीनेंगे बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करेंगे। उन्हें शरण देने के बारे में कोई भी निर्णय राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए।

बंगाल और केरल निशाने पर
भागवत ने पश्चिम बंगाल और केरल पर राष्ट्र विरोधी तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन दोनों राज्यों की सज्जन शक्तियों को एकजुट करना होगा ताकि घृणा फैलाने वाली राष्ट्र विरोधी ताकतों को पराजित किया जा सके। इन राज्यों की सरकारें और राजनीतिक रंग में रंग चुका उनका प्रशासन न सिर्फ राष्ट्रीय खतरों के प्रति आंखें मूंदे हुए है बल्कि खुलेआम संविधान का मजाक उड़ाने में उनकी मदद भी कर रहा है।

गो तस्कर भी करते हैं हत्या
भागवत ने गोरक्षा के नाम पर हिंसा में लोगों के मारे जाने की निंदा की लेकिन कहा कि गो-तस्करों ने बहुत सारे गोभक्तों की भी हत्या की है। दरअसल, गोरक्षा का मुद्दा धर्म से ऊपर है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की तरह ही कई मुस्लिमों ने भी गायों की रक्षा करते हुए अपने प्राण गंवाए हैं।

आर्थिक नीतियों को बदलने की जरूरत
छोटे और मझोले उद्योगों एवं स्वरोजगार में लगे व्यवसायियों के हितों की रक्षा का आह्वान करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था में इनका सबसे बड़ा योगदान है। केंद्र सरकार की जनधन, डीबीटी और उज्ज्वला जैसी लोक कल्याणकारी योजनाओं की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ इनसे ही काम नहीं चलने वाला है। हमें भारतीयता पर आधारित कृषि, व्यापार, उद्योग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली ऐसी समग्र नीति बनानी है जो इस देश कीविविधताओं का सम्मान करे और देश की जरूरतों को भी पूरा करे।

 

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