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राम मंदिर पर बढ़ी मोदी सरकार की चुनौती, अब विहिप बोली- अनंतकाल तक इंतजार संभव नहीं

Thu, 03 Jan 2019 03:44 AM IST
संदीप भट्ट हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Thu, 03 Jan 2019 03:44 AM IST
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Modi government challenge rise over Ram temple
मोदी सरकार

राम मंदिर निर्माण मामले में संघ परिवार ने ही मोदी सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पीएम मोदी के संवैधानिक प्रक्रिया पूरा होने के बाद अध्यादेश पर विचार संबंधी राय के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ उन्हें पालमपुर में राम मंदिर निर्माण के प्रस्ताव की याद दिलाई है। वहीं विहिप ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अदालती फैसले का हिंदू अनंत काल तक इंतजार नहीं कर सकते। खासबात यह है कि राम मंदिर मुद्दे को धार देने केलिए खुद संघ प्रमुख संघ के इतिहास में पहली बार  31 जनवरी को आयोजित विहिप की धर्मसंसद में हिस्सा ले रहे हैं। 

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दरअसल मंगलवार को एक साक्षात्कार में पीएम ने कहा था कि अध्यादेश पर विवार संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने केबाद किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि तीन तलाक और एससीएसटी एक्ट पर भी सरकार ने अदालत केफैसले के बाद अध्यादेश जारी किया था। इतना ही नहीं पीएम ने यह भी कहा था कि बीते चुनाव में भी भाजपा ने संवैधानिक रास्ते से राम मंदिर निर्माण की बात कही थी। 
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इसके बाद संघ ने बयान जारी कर पीएम को पालमपुर में पार्टी के अधिवेशन में प्रस्तावित उस प्रस्ताव की याद दिलाई जिसमें हर कीमत पर राम मंदिर निर्माण की बात कही गई थी। इतना ही नहीं संघ ने यह भी कहा कि हिंदुओं की इच्छा है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण इसी सरकार के कार्यकाल में हो। इसके अगले दिन विहिप ने भी अपनी सहमति दर्ज कराते हुए राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश जारी करने की मांग करते हुए कहा कि आस्थावान हिंदू अनंत काल तक कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकते। 
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धर्मसंसद में संघ प्रमुख के होने के मतलब 

विहिप के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि मोदी सरकार मंदिर बनाने की राह पर है, बस इसमें समय केसुधार की जरूरत है। हम अब अनंत काल तक इसकेलिए इंतजार नहीं सकते। अध्यादेश लाना सरकार के वश में है। उन्होंने कहा कि सभी दलों से समर्थन हासिल करने के लिए विहिप ने 350 सांसदों से मुलाकात की है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिलने का समय मांगा है।  

अयोध्या आंदोलन शुरू होने से अब तक जितने भी धर्म संसद का अयोजन हुआ उसमें संघ प्रमुख तो दूर संघ के सह कार्यवाह तक ने शिरकत नहीं की। संघ ने इसे विहिप पर छोड़ रखा था। यहां तक कि इस आंदोलन के उफान पर होने केबावजूद संघ ने इससे दूरी बनाई। मगर अब 31 जनवरी के धर्मसंसद में खुद संघ प्रमुख मोहन भागवत शिरकत करेंगे। संघ की योजना इस मुद्दे पर सरकार सहित सभी सियासी दलों पर दबाव बनाने की है। 
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