{"_id":"5864477d4f1c1b724feeb0d6","slug":"mobile-wallet-business-increased-300-percent-after-demontiezation","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी के बाद 300 फीसदी बढ़ा मोबाइल वॉलेट कारोबार, लोकिन नेटवर्क अभी भी समस्या","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
नोटबंदी के बाद 300 फीसदी बढ़ा मोबाइल वॉलेट कारोबार, लोकिन नेटवर्क अभी भी समस्या
शिशिर चौरसिया/ नई दिल्ली
Updated Thu, 29 Dec 2016 04:45 AM IST
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सरकार द्वारा बीते 8 नवंबर को 500 एवं 1,000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से हटाने के बाद बाजार में हुई नकदी किल्लत के बीच डिजिटल पेमेंट में भारी इजाफा हुआ है। इस दौरान मोबाइल वॉलेट चलाने वाली कंपनियों के कारोबार में 300 फीसदी से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि भारत में साइबर सुरक्षा क्षेत्र में मजबूत व्यवस्था नहीं होने और कनेक्टिविटी की वजह से इस क्षेत्र से जुड़ी अन्य घटनाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।
पेटीएम के कारोबार में 300 फीसदी का इजाफा
देश में मोबाइल वॉलेट चलाने वाली सबसे बड़ी कंपनी पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में स्वीकार किया कि नोटबंदी के बाद अभी तक उनके कारोबार में 300 फीसदी से भी ज्यादा का इजाफा हुआ है।
उन्होंने बताया कि नोटबंदी के पहले, नवंबर के पहले सप्ताह में पेटीएम के हर दिन 20 से 25 लाख ट्रांजेक्शन होते थे, जो दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बढ़ कर 70 लाख तक पहुंच गए हैं। यही नहीं, इस बीच उनके कारोबारी ग्राहक (जो पेटीएम से राशि स्वीकारते हैं) की संख्या में कई गुना का इजाफा हुआ। लोग अब ई-वॉलेट में भी ज्यादा पैसा रखने लगे हैं। पहले उनके वॉलेट में ग्राहकों के जमा का औसत 48 रुपये प्रति ग्राहक था, जो कि अब बढ़कर 300 रुपये हो गया है।
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मोबिक्विक का ट्रैफिक भी 100 फीसदी बढ़ा
ई-वॉलेट कंपनी मोबिक्विक की सह-संस्थापक उपासना टाकू ने बताया कि नोटबंदी के बाद उनके ओवरऑल ट्रैफिक में 100 फीसदी का इजाफा हुआ है। जहां तक ऐप डाउनलोड का सवाल है तो इसमें 200 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उनसे जब वॉलेट में पैसे जमा करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इसमें 2000 फीसदी का इजाफा हुआ है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इस दौरान उनके वॉलेट में कितने पैसे जमा हुए या प्रति ग्राहक औसत जमा क्या रहा।
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पेटीएम के कारोबार में 300 फीसदी का इजाफा
देश में मोबाइल वॉलेट चलाने वाली सबसे बड़ी कंपनी पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में स्वीकार किया कि नोटबंदी के बाद अभी तक उनके कारोबार में 300 फीसदी से भी ज्यादा का इजाफा हुआ है।
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उन्होंने बताया कि नोटबंदी के पहले, नवंबर के पहले सप्ताह में पेटीएम के हर दिन 20 से 25 लाख ट्रांजेक्शन होते थे, जो दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बढ़ कर 70 लाख तक पहुंच गए हैं। यही नहीं, इस बीच उनके कारोबारी ग्राहक (जो पेटीएम से राशि स्वीकारते हैं) की संख्या में कई गुना का इजाफा हुआ। लोग अब ई-वॉलेट में भी ज्यादा पैसा रखने लगे हैं। पहले उनके वॉलेट में ग्राहकों के जमा का औसत 48 रुपये प्रति ग्राहक था, जो कि अब बढ़कर 300 रुपये हो गया है।
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मोबिक्विक का ट्रैफिक भी 100 फीसदी बढ़ा
ई-वॉलेट कंपनी मोबिक्विक की सह-संस्थापक उपासना टाकू ने बताया कि नोटबंदी के बाद उनके ओवरऑल ट्रैफिक में 100 फीसदी का इजाफा हुआ है। जहां तक ऐप डाउनलोड का सवाल है तो इसमें 200 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उनसे जब वॉलेट में पैसे जमा करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इसमें 2000 फीसदी का इजाफा हुआ है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इस दौरान उनके वॉलेट में कितने पैसे जमा हुए या प्रति ग्राहक औसत जमा क्या रहा।
लेकिन लोगों को दिक्कतें भी बढ़ीं
लोगों को दिक्कतें भी बढ़ीं
गाजियाबाद के एक व्यक्ति ने पुलिस को शिकायत की है कि उनका क्रेडिट कार्ड जेब में है, जबकि उससे कनाडा में लाख रुपये से ज्यादा की खरीदारी की गई। उन्होंने नोटबंदी के बाद कई जगह क्रेडिट कार्ड का उपयोग किया था। आशंका जताई जा रही है कि इसी दौरान उनके क्रेडिट कार्ड से संबंधित डाटा की चोरी की गई होगी।
वॉलेट से पैसे कट गए लेकिन टिकट नहीं बना
दिल्ली सरकार के सर्वोदय विद्यालय में शिक्षक गगन सिंह ने बताया कि उन्होंने पिछले दिनों आईआरसीटीसी वेबसाइट पर रेलवे टिकट की खरीदारी में पेटीएम वॉलेट का उपयोग किया। इस दौरान वॉलेट से तो करीब 3,000 रुपये कट गए लेकिन टिकट नहीं बना। पूछने पर बताया गया कि ट्रांजेक्शन तो हो गया लेकिन कनेक्टिविटी की वजह से टिकट नहीं बन पाया। अब रिफंड मिल जाएगा।
कनेक्टिविटी है बड़ी समस्या
पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा का कहना है कि भारत में कनेक्टिविटी एक बड़ी समस्या है। आप दूर की बात तो छोड़िए, दिल्ली में संसद भवन के आस-पास के इलाकों में भी आपको निर्बाध कनेक्टिविटी नहीं मिलेगी। यदि नेट का सिग्नल आ रहा है तो वह स्ट्रांग नहीं होगा। बीच-बीच में टूट जाएगा। इस वजह से भी डिजिटल ट्रांजेक्शन फेल होते हैं। लेकिन इसमें लोगों के पैसे डूबते नहीं हैं, वह वापस हो जाते हैं।
गाजियाबाद के एक व्यक्ति ने पुलिस को शिकायत की है कि उनका क्रेडिट कार्ड जेब में है, जबकि उससे कनाडा में लाख रुपये से ज्यादा की खरीदारी की गई। उन्होंने नोटबंदी के बाद कई जगह क्रेडिट कार्ड का उपयोग किया था। आशंका जताई जा रही है कि इसी दौरान उनके क्रेडिट कार्ड से संबंधित डाटा की चोरी की गई होगी।
वॉलेट से पैसे कट गए लेकिन टिकट नहीं बना
दिल्ली सरकार के सर्वोदय विद्यालय में शिक्षक गगन सिंह ने बताया कि उन्होंने पिछले दिनों आईआरसीटीसी वेबसाइट पर रेलवे टिकट की खरीदारी में पेटीएम वॉलेट का उपयोग किया। इस दौरान वॉलेट से तो करीब 3,000 रुपये कट गए लेकिन टिकट नहीं बना। पूछने पर बताया गया कि ट्रांजेक्शन तो हो गया लेकिन कनेक्टिविटी की वजह से टिकट नहीं बन पाया। अब रिफंड मिल जाएगा।
कनेक्टिविटी है बड़ी समस्या
पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा का कहना है कि भारत में कनेक्टिविटी एक बड़ी समस्या है। आप दूर की बात तो छोड़िए, दिल्ली में संसद भवन के आस-पास के इलाकों में भी आपको निर्बाध कनेक्टिविटी नहीं मिलेगी। यदि नेट का सिग्नल आ रहा है तो वह स्ट्रांग नहीं होगा। बीच-बीच में टूट जाएगा। इस वजह से भी डिजिटल ट्रांजेक्शन फेल होते हैं। लेकिन इसमें लोगों के पैसे डूबते नहीं हैं, वह वापस हो जाते हैं।