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3000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर फोन कॉल, इंटरनेट और वाई-फाई, 10 साल के लिए जारी किया जाएगा लाइसेंस
Mon, 17 Dec 2018 05:33 AM IST
संदीप भट्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: संदीप भट्ट
Updated Mon, 17 Dec 2018 05:33 AM IST
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हवाई यात्रियों और समुद्री यात्रा करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है। ऐसे यात्रियों को जल्द ही भारतीय सीमा में उड़ान और समुद्री यात्रा के दौरान अपने मोबाइल से बात करने और इंटरनेट इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी। सरकार ने इस नियम को 14 दिसंबर को अपनी मंजूरी दे दी। जैसे ही सरकारी गजट में यह अधिसूचित हो जाएगा उसी दिन से लोगों को यह सुविधा मिलने लगेगी।
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हवाई यात्रा के दौरान अब यात्रियों को अपना मोबाइल फ्लाइट मोड में करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर जाते ही मोबाइल पर यह सुविधा उपलब्ध होगी। इतनी ऊंचाई पर यह सेवा मिलने का कारण यह है कि जमीन पर विभिन्न ऑपरेटरों की सेवा इसमें व्यवधान पैदा न कर सकें।
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भारतीय सीमाओं के अंदर यह सेवा देने के नियम की मंजूरी दे दी गई। इसके अनुसार विदेशी कंपनी लाइसेंस प्राप्त किसी भारतीय कंपनी के साथ मिलकर मोबाइल और इंटरनेट सेवा दे सकेगी। इस नियम का नाम उड़ान एवं सामुद्रिक-नौवहन संपर्क (आईएफएमसी) नियमावली -2018 हो सकता है।
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इसके अंतर्गत भारतीय और विदेशी विमानन और नौवहन सेवा प्रदाता कंपनियां भारतीय सीमा में परिचालन के समय भारत के लाइसेंस प्राप्त दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी के साथ मिलकर इस तरह की सेवाएं दे सकेंगी। यह सेवा उपग्रह और भू-स्थित संपर्क सुविधाओं के जरिये दी जा सकेगी। इसमें विदेशी उपग्रह सुविधा की मदद लेने के लिए अंतरिक्ष विभाग की अनुमति लेनी होगी।
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10 साल के लिए जारी किया जाएगा लाइसेंस
इस सेवा के लिए लाइसेंस 1 रुपये के वार्षिक शुल्क पर 10 वर्ष के लिए जारी किया जाएगा। लाइसेंस धारक से सरकार रेडियो तरंग शुल्क और राजस्व में हिस्सा लेगी। उपग्रहों के माध्यम से यह सेवा देने के लिए जरूरी होगा कि टेलीग्राफ संकेतों को भारतीय सीमा में स्थापित संचार उपग्रह प्रवेश-द्वार केंद्रों के रास्ते ही भेजा जाए। ये केंद्र भारत में लंबी दूरी की दूरसंचार सेवाएं देने वाली कंपनियों (एनएलडी) और इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों (आईएसपी) के साथ परस्पर जुड़े होंगे।
इस सेवा के लिए लाइसेंस 1 रुपये के वार्षिक शुल्क पर 10 वर्ष के लिए जारी किया जाएगा। लाइसेंस धारक से सरकार रेडियो तरंग शुल्क और राजस्व में हिस्सा लेगी। उपग्रहों के माध्यम से यह सेवा देने के लिए जरूरी होगा कि टेलीग्राफ संकेतों को भारतीय सीमा में स्थापित संचार उपग्रह प्रवेश-द्वार केंद्रों के रास्ते ही भेजा जाए। ये केंद्र भारत में लंबी दूरी की दूरसंचार सेवाएं देने वाली कंपनियों (एनएलडी) और इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों (आईएसपी) के साथ परस्पर जुड़े होंगे।