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MMRY: महिलाओं को रोजगार केवल चुनावी दांव नहीं, सामाजिक व्यवस्था में भी आएगा बड़ा बदलाव

Fri, 26 Sep 2025 03:36 PM IST
ज्योति भास्कर डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 26 Sep 2025 03:36 PM IST
सार

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए का एक बड़ा चुनावी दांव माना जा रहा है। लेकिन आर्थिक-सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना केवल एक चुनावी दांव मात्र नहीं है, इससे बिहार में महिलाओं की सामाजिक स्थिति में भी बड़ा बदलाव आएगा। 

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MMRY Employment for women not just electoral strategy it will also bring major change in social system
पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार। (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana) के अंतर्गत बिहार की 75 लाख महिलाओं को दस-दस हजार रूपये की आर्थिक सहायता आज दे दी गई। इससे बिहार के 75 लाख परिवारों की 75 लाख महिलाओं को अपना स्वरोजगार शुरू करने या उसे आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इसे एनडीए का एक बड़ा चुनावी दांव माना जा रहा है। लेकिन आर्थिक-सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना केवल एक चुनावी दांव मात्र नहीं है, इससे बिहार में महिलाओं की सामाजिक स्थिति में भी बड़ा बदलाव आएगा। 

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योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारने का काम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार, दोनों ही नेताओं की राजनीति में महिलाओं के सशक्तिकरण योजनाओं की अहम भूमिका रही है। मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री रहने से लेकर देश का प्रधानमंत्री बनने तक अनेक योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारने का काम किया है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी अनेक योजनाओं से प्रधानमंत्री ने महिलाओं के आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण का काम किया है। 
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जातिगत सोच की बेड़ी में जकड़ी बिहार की महिलाएं
इसी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीविका दीदी योजना, पोशाक योजना, साइकिल योजना, सरकारी नौकरियों और पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं को मजबूत करने का काम किया है। इन योजनाओं का यह असर हुआ कि अपनी जातिगत सोच की बेड़ी में जकड़े बिहार की महिलाओं ने अपनी जातीय पहचान से ऊपर उठकर नीतीश कुमार का समर्थन किया। यह वर्ग नीतीश कुमार के लिए एक ठोस वोट बैंक साबित हुआ है। 
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पूरे परिवार की नेतृत्वकारी भूमिका में आएंगी महिलाएं
भारतीय परिवारों में कामकाज की एक परंपरागत संस्कृति है कि किसी एक ही व्यवसाय में पूरा परिवार योगदान देता है। परिवार के शेष सदस्य इन कार्यों में हाथ बंटाते हैं। अब परिवार का जो भी व्यवसाय होगा, उसे आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री रोजगार सहायता योजना का लाभ लेने के लिए परिवार के लोग घर की महिलाओं को आगे करेंगे। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से यह लाभ महिलाओं को मिलेगा। इससे परिवार में महिलाओं की भूमिका सशक्त होगी। 

1.40 करोड़ महिलाओं को मिल रहा लाभ
अनुमान है कि इस योजना का गांवों में अब तक 1.40 करोड़ महिलाएं लाभ ले रही हैं। शहरी क्षेत्रों में 37 हजार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 3.85 लाख से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही हैं। पहली किस्त के रूप में महिलाओं को दस-दस हजार रूपये दिए गए हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक तरक्की हुई है। बाद में रोजगार को आगे बढ़ाने के लिए बेहद सस्ती दर पर दो लाख रूपये का कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा। इसे एक बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है। 

आवास का रजिस्ट्रेशन परिवार की महिलाओं के नाम पर
पीएम आवास योजना में परिवार को मिलने वाले आवास का रजिस्ट्रेशन परिवार की महिलाओं के नाम पर करने को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका महिलाओं को लाभ मिला है। माना जा रहा है कि इसी तरह मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से भी महिलाओं को लाभ मिलेगा।   

बिहार मॉडल बनेगा देश का मॉडल- जदयू
जनता दल यूनाइटेड नेता सत्यप्रकाश मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण करके किस तरह पूरी सामाजिक व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है, किस तरह घर की चारदीवारी में कैद महिलाओं को परिवार के नेतृत्वकारी भूमिका में लाया जा सकता है, इस संदर्भ में बिहार पूरे देश का रोल मॉडल बनेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से बिहार के 75 लाख परिवारों में महिलाओं की सामाजिक स्थिति बदलेगी। इससे पूरे परिवार और समाज में महिलाओं का सम्मान बढ़ेगा और परिवार को आर्थिक मजबूती मिलेगी।

महिलाओं को पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण
मिशन डेमोक्रेसी के नेशनल कन्वीनर सत्यप्रकाश मिश्रा ने कहा कि नीतीश कुमार ने महिलाओं को पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण देकर यह सुनिश्चित किया कि महिलाएं केवल अपने घरों तक सीमित न रहें, वे घर की चौखट से निकलें और आगे बढ़कर पूरे गांव-समाज का नेतृत्व करें। मिश्रा ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व संभालने के बाद लोकतंत्र की जड़ें ज्यादा गहरी होती हैं। इससे हिंसात्मक राजनीति पीछे छूटती है और स्वस्थ सामाजिक मुद्दों पर विमर्श की राजनीति आगे बढ़ती है। इस अर्थ में नीतीश सरकार की यह योजना बड़े क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है।  

हर परिवार की एक महिला से क्या लाभ
नीतीश कुमार सरकार ने इस योजना में हर परिवार की केवल एक महिला को लाभ देने की योजना बनाई है। इस योजना से टैक्स देने वालों या परिवार के किसी व्यक्ति के सरकारी नौकरी या टैक्सपेयर कैटेगरी में आने वाले परिवार की महिलाओं को बाहर रखा गया है। इससे इस योजना का अधिकतम लाभ गरीब और पिछड़े वर्ग की उन महिलाओं को मिलेगा जो विकास की मुख्यधारा से अब तक वंचित रहे हैं। इससे समाज के गरीब तबकों के लिए यह योजना वरदान साबित हो सकती है। 

महिलाओं की 'आर्थिक गुलामी' का चक्र तोड़ना आवश्यक
महिला अधिकार कार्यकर्ता सुनयना सिंह ने अमर उजाला से कहा कि लोगों को यह गलतफहमी होती है कि यदि परिवार आर्थिक तौर पर सक्षम है तो उनके परिवारों में महिलाएं भी आर्थिक तौर पर सक्षम होंगी। लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। आज भी ज्यादातर परिवारों में महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं के लिए परिवार के पुरुषों पर निर्भर रहना पड़ता है। 


समाज के हर वर्ग की महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता पर जोर
उन्होंने कहा कि यदि महिला कोई ऐसी खरीदारी करना चाहती है जिससे पुरुष सहमत नहीं हैं तो आर्थिक सहायता नहीं दी जाती। उनके अनुसार, यह महिलाओं की 'आर्थिक गुलामी' है। यदि उनके हाथों में अपना पैसा होगा तो उन्हें किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना होगा। इसी कारण से समाज के हर वर्ग की महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री रोजगार योजना जैसी योजनाएं इसी आवश्यकता की पूर्ति करती हैं।

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