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भारत की इस रणनीति से चकमा खा गया पाकिस्तान, 21 मिनट की एयर स्ट्राइक का ऐसा था प्लान

Wed, 27 Feb 2019 10:10 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Wed, 27 Feb 2019 10:10 AM IST
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Mirages took off from middle India, know how India surprised to Pakistan by Surgical Strike 2
गैर सैन्य एहतियाती कार्रवाई - फोटो : Amar Ujala Graphics

पुलवामा हमले के बाद आतंकी संगठनों का हौसला तोड़ते हुए भारत ने एयर स्ट्राइक कर पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया। रक्षा सूत्रों की मानें तो बालाकोट में चल रहे इन आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक करने वाली टीम आपस में बेहतर तालमेल के साथ काम कर रही थी। इसमें छह आतंकी ठिकानों को तबाह करने का लक्ष्य था और भारतीय वायु सेना इसमें 100 फीसदी कामयाब हुई है। इस अभियान के हीरो मिराज- 2000 विमानों ग्वालियर एयरबेस से उड़ान भरी थी। 

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पाकिस्तान की नजर सीमावर्ती इलाकों पर केंद्रित रहती है, इसलिए विमानों ने जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान या अन्य जगहों के अपने किसी सीमावर्ती एयरबेस से उड़ान नहीं भरी, बल्कि इसके लिए ग्वालियर एयरबेस को चुना, जोकि मध्य भारत में है। ऐसा करने के पीछे उद्देश्य यह था कि पाकिस्तान को किसी भी तरह से सावधान होने का मौका न मिले। भारतीय वायु सेना ने पाक के 6 आतंकी ठिकानों पर पहले ताबड़तोड़ हमले हुए। विस्फोट में ठिकाने नेस्तनाबूत हो गए और धूल और धुएं का गुबार उठ पड़ा। गुबार थमते ही भारत ने दूसरी बार हमला किया। 

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बेखबर पाक को नहीं लगने दी कोई भनक 

सूत्रों के मुताबिक आर्मी के तीनों चीफ को अपने दौरे और रूटीन काम करते रहने का निर्देश दिया गया था, जिससे पाकिस्तान को भारतीय सर्जिकल स्ट्राइक की भनक तक न लग सके। 22 फरवरी को तय हो गया कि बालाकोट का आतंकी ठिकाना टारगेट किया जाएगा, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में आतंकी और उन्हें ट्रेनिंग देने वाले भी मौजूद हैं। लक्ष्य तय होने के साथ ही मिराज-2000 की दो स्क्वॉर्डन को एक्टिव किया गया और इन दो स्क्वॉर्डन से ही 12 मिराज विमान चुने गए। 

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22 फरवरी को सेट हो चुके थे टारगेट

बताया जा रहा है कि खैबर के बालाकोट, पीओके के मुजफ्फराबाद और चकोटी में 22 फरवरी को ही टारगेट सेट हो गया था। इसके बाद ट्रायल रन भी किया गया। सोमवार की रात लेजर गाइडेड बम से लैस मिराज ने ग्वालियर से उड़ान भरी। ये विमान हिंडन, सिरसा और हिमाचल की ओर से होते हुए कश्मीर की ओर गए और फिर वहां से मुड़ कर टारगेट की ओर निकल पड़े। विमानों ने नीची उड़ान भरकर आतंकी शिविरों पर छह बम गिराए गए और मिशन पूरा कर ग्वालियर बेस वापस आ गए। मिशन मंगलवार तड़के 3.40 बजे शुरू हुआ और 21 मिनट चला।


पुलवामा हमले के बाद सरकार ने ऐसी जवाबी कार्रवाई का निर्णय ले लिया था, लेकिन जवाबी हमले के विश्वसनीय विकल्पों की जानकारी टॉप लीडरशिप को 19 फरवरी को दी गई। इसके बाद यह मिशन शुरू करने की मंजूरी दे दी गई। रक्षा सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमले की योजना पहले भी सामने आई थी, लेकिन जरुरी मंजूरी नहीं मिल पाई थी। 

Mirages took off from middle India, know how India surprised to Pakistan by Surgical Strike 2
Air Strike - फोटो : PTI

संभावित खतरे से निबटने को तैयार थी बैकअप टीम

हवा में मौजूद खतरे को बताने वाले अर्ली वॉर्निंग जेट ने भटिंडा से, जबकि मिड एयर रिफ्यूलिंग टैंकर ने आगरा से उड़ान भरी थी। इधर, हिंडन एयरपोर्ट भी बैकअप के लिए तैयार था। सूत्रों ने बताया कि 6 मिराज एलओसी पार अंदर गए थे, जबकि 6 मिराज और कुछ सुखोई लड़ाकू विमान बैकअप के लिए नियंत्रण रेखा के पास ही उड़ान भर रहे थे। मकसद था कि कोई खतरा होने पर ये उससे निपट लेंगे और बम से लैस विमान मिशन को अंजाम देंगे।

सर्विलांस के लिए हेरॉन ड्रोन भी साथ रखे गए 

मिराज एक मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। पाकिस्तान के रडार जाम करने का सिस्टम भी मिराज के जरिए ही इस्तेमाल किया गया। मिराज विमान 1000 किलो के लेजर-गाइडेड बम से लैस थे। इन्होंने पाक सीमा में घुसकर आतंकी ठिकानों को टारगेट पर लिया और ग्रीन सिग्नल मिलते ही बम गिरा दिए। 12 मिराज-2000 विमानों ने किसी सीमावर्ती एयरबेस के बजाय ग्वालियर से उड़ान भरी, ताकि पाकिस्तानियों को भनक न लग सके। 

जमीन में 70 फीट गड्ढा करने वाले बम गिराए

जबलपुर में बने एक हजार किलो वजनी जीबीयू-12 पेववे लेजर गाइडेड बम गिराए गए।  हमले में जीबीयू-12 पेववे लेजर गाइडेड बम का इस्तेमाल हुआ। ये अमेरिका में बनी गाइडेंस बम किट है। इससे चुनी जगह तबाह करने में मदद मिलती है। इस तरह के मिशन में मिसाइल प्लेन के साथ जाती है। संभव है फ्रांस की माटरा मिसाइल गिराई गई हो। आतंकी ठिकाने पर 1 हजार किलो वजन वाले बम को गिराया गया है। ये बम जहां गिरते हैं, वहां 70 फीट गहरा गड्ढा बन जाता है।

बालाकोट में सबसे पुराना आतंकी ठिकाना

बालाकोट आतंकियों का गढ़ रहा है। इसे फिदायीन हमलावरों की फैक्ट्री माना जाता है। यहां 300-400 आतंकी हमेशा रहते हैं। यहां के कैंप का मुखिया यूसुफ अजहर 1999 में आईसी-814 विमान को हाइजैक कर काठमांडू से कंधार ले गया था। 

मसूद अजहर का बेटा अब्दुल्ला भी यहां ट्रेनिंग कर चुका है। कुछ समय पहले ही यहां 60 आतंकियों को फिदायीन ट्रेनिंग दी गई थी। यह स्थान एबटाबाद से करीब 50 किमी दूर है, जहां 2011 में अमेरिका ने घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। 
 

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