तो कश्मीर में अल्पसंख्यकों को मिलता है ज्यादा लाभ? याचिका पर केंद्र व राज्य को नोटिस
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जम्मू-कश्मीर में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का फायदा सभी अल्पसंख्यक समुदायों को देने की गुहार संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि धर्म और भाषा के आधार पर अधिसूचना जारी कर राज्य के सभी अल्पसंख्यकों तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का निर्देश दिया जाना चाहिए। याचिका में जम्मू-कश्मीर में मुस्लिमों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने पर आपत्ति जताई गई है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अंकुर शर्मा द्वारा दाखिल इस जनहित याचिका पर केंद्र व राज्य सरकार के अलावा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्ते में अपना-अपना पक्ष रखने को कहा है।
राज्य में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं बल्कि बहुसंख्यक है?
याचिकाकर्ता अंकुर शर्मा ने पीठ के समक्ष कहा कि जम्मू-कश्मीर में मुस्लिमों की आबादी करीब 67 फीसदी है, लिहाजा राज्य में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं बल्कि बहुसंख्यक है। इसके बावजूद उन्हें अल्पसंख्यकों वाले फायदे मिल रहे हैं, जबकि दूसरे अल्पसंख्यक इन फायदों से महरूम हैं। यह उन लोगों के मूल अधिकारों का हनन है जो सही मायने में इसके हकदार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह लाभ मुस्लिमों को लंबे समय से मिल रहा है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि तकनीकी पेशेवर शिक्षा के क्षेत्र के लिए वर्ष 2007-2008 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यकों के लिए 20 हजार छात्रवृत्ति ऑफर किए थे। इसके तहत जम्मू-कश्मीर में दी जाने वाली कुल 753 छात्रवृत्तियों में से 717 मुस्लिमों को दी गई, जबकि ईसाइयों को दो, सिखों को 22 और बौद्ध धर्म के 12 छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई।
जम्मू-कश्मीर में नहीं है अल्पसंख्यक आयोग
जम्मू-कश्मीर में नहीं है अल्पसंख्यक आयोग
अपना पक्ष खुद रख रहे अंकुर शर्मा ने पीठ के समक्ष कहा कि अब तक न तो जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक आयोग है और न ही राज्य अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम ही बना है। उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक का दर्जा राज्यवार तरीके से होना चाहिए क्योंकि भले ही किसी समुदाय की जनसंख्या देश भर में अधिक हो लेकिन किसी राज्य में उनकी संख्या कम हो तो उसे अल्पसंख्यक का दर्जा मिलना चाहिए।
प्रधानमंत्री की 15 सूत्री योजना के क्रियान्वयन में भी भ्रष्टाचार
राज्य में धर्म और भाषा के आधार पर अल्पसंख्यकों से संबंधित प्रधानमंत्री की 15 सूत्री योजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए याचिका में एफआईआर दर्ज करने की गुहार की गई है। यह गुहार भी की गई है कि राज्य में अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए निर्देश दिया जाना चाहिए। साथ ही राज्य में कल्याणकारी योजनाओं का ऑडिट भी कराया जाना चाहिए।