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जन्मतिथि या नाम में हुई मामूली गलती अभ्यर्थी के चयन में नहीं बनेगी बाधा: SC
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 19 Feb 2017 09:22 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जन्मतिथि या नाम लिखने में हुई मामूली गलती किसी अभ्यर्थी के चयन के लिए बाधा नहीं हो सकती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अनजाने या भूलवश हुई गलतियों के लिए अभ्यर्थियों को इतनी बड़ी सजा नहीं दी जा सकती।
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न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने संघ लोक सेवा अयोग (यूपीएससी) की याचिका खारिज करते हुए एक छात्र अजय कुमार मिश्रा को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में चयन करने का आदेश दिया है। अजय एनडीए की लिखित, साक्षात्कार और मेडिकल परीक्षा में सफल रहा था, लेकिन यूपीएससी ने उसे यह कहते हुए नियुक्ति देने से इनकार कर दिया था कि उसने आवेदन पत्र में गलत जन्मतिथि लिखी थी।
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पीठ ने पाया कि एडमिट कार्ड डाउनलोड करते समय अजय ने जन्मतिथि 11 जुलाई, 1998 दी थी, जबकि उसकी वास्तविक जन्मतिथि 10 जुलाई, 1998 है। पीठ ने पाया कि डाउनलोड करते हुए ही अजय को अपनी गलती का पता चल गया था। लिहाजा उसने संबंधित अथॉरिटी को इससे अवगत करा दिया था। इस दौरान वह लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और मेडिकल परीक्षा में शामिल हुआ और सभी परीक्षाओं में वह सफल रहा। लेकिन उसे जन्मतिथि को सुधारने की इजाजत नहीं दी गई और यूपीएससी ने उसके चयन को रोक दिया। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी यूपीएससी को अजय के चयन का रास्ता साफ करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जब अभ्यर्थी ने चयन की सभी प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया और उनमें सफल रहा, ऐसे में यह देखना जरूरी है कि अभ्यर्थी की गलती में कितनी गंभीरता है। भूलवश हुई मामूली गलतियों के आधार पर किसी को ऐसी सजा नहीं दी जा सकती।
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सुप्रीम कोर्ट पीठ ने अभ्यर्थी की ओर से पेश सतेंद्र त्रिपाठी और परमानंद की इस दलील को स्वीकार किया कि छोटी-छोटी गलतियों के लिए अभ्यर्थियों को चयन से नहीं रोका जा सकता। शीर्ष अदालत ने यूपीएससी से कहा कि उसे भूलवश हुई इस तरह की गलतियों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। वह भी तब जब इस गलती से अभ्यर्थियों को कोई फायदा न पहुंच रहा हो। यूपीएससी ने कहा कि अगर इस तरह की इजाजत दी गई तो याचिकाओं की बाढ़ आ जाएगी। जवाब में पीठ ने कहा कि हमें ऐसे आवेदनों पर विचार करने में कोई परेशानी नहीं है।