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ईरान-सऊदी अरब के बीच छद्म युद्ध से तबाह हुआ मध्य-पूर्व

Thu, 24 Nov 2016 04:48 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस Updated Thu, 24 Nov 2016 04:48 AM IST
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Middle East Devastated by a proxy war between Iran-Saudi Arabia 
ईरान-सऊदी

मध्य-पूर्व में चल रही अशांति से सीरिया व यमन युद्ध में जल रहे हैं, इराक और लेबनान व बहरीन के बीच राजनीतिक खलबली एक अलग तरह का संघर्ष पैदा हो रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान और सऊदी अरब के बीच प्रभुसत्ता को लेकर चलने वाला संघर्ष बड़ा कारण है। पिछले कई वर्षों से चल रहा इन दोनों देशों के आपसी संघर्ष के कारण पूरा मध्य-पूर्व इन दिनों तबाह हो चुका है।

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मध्य-पूर्व के हालात अब इतने बिगड़ चुके हैं कि न सिर्फ अमेरिका बल्कि रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देश भी इसमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कूद चुके हैं। इस कारण यहां और भी ज्यादा तनाव कायम हो गया है। इस इलाके की तानाशाही और आतंकी हिंसा व धार्मिक चरमपंथ ने पूरी दुनिया को चपेट में ले लिया है। दो देशों का आपसी संघर्ष अब मध्य-पूर्व में शिया-सुन्नी संप्रदायों के बीच संग्राम में बदल गया है।
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यमन में सऊदी युद्ध की आग में उसका पीछे रहकर अमेरिका ने समर्थन किया, जिससे यहां के सैकड़ों नागरिक मारे गए हैं। अब यहां समाज दो भागों में बंट चुका है और सरकारें भी अस्थिर है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकार एफ. ग्रेगरी गौस ने बताया कि मध्य अफ्रीका में पिछले दो दशकों में धार्मिक संघर्ष में करीब 50 लाख लोग मारे जा चुके हैं, लेकिन अब मध्य-पूर्व की बारी है।
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मध्य-पूर्व में यह संघर्ष 1930 से चल रहा है जब सऊदी अरब धार्मिक आधार पर संविधान बना रहा था और मक्का व मदीना के प्रबंधन को बढ़ा रहा था। 1979 में ईरान के भीतर क्रांति हुई और वहां अपनी सरकार बनाई। उन्होंने पूरी इस्लामी दुनिया के प्रतिनिधित्व का दावा किया और सऊदी समेत सभी मुसलमानों को सऊदी कानून उलटने के लिए प्रेरित किया। 


 

छद्म युद्ध की शुरूआत 1980-88 में हुई

Middle East Devastated by a proxy war between Iran-Saudi Arabia 

छद्म युद्ध की शुरूआत 1980-88 में हुई
ईरान और सऊदी अरब के बीच 1980-88 के बीच पहला छद्म युद्ध हुआ, जब इराक में सद्दाम हुसैन ने तेल कुओं पर कब्जे के लिए ईरान पर आक्रमण किया। सऊदी अरब ने ईरान की क्रांति खत्म करने के लिए इराक को पीछे रहकर हरसंभव मदद दी।

1990 में कुछ समय के लिए यह धार्मिक शत्रुता ठंडी पड़ी लेकिन इस दौरान एक-दूसरे पर लगाई गई कड़ी शर्तों के चलते जल्द ही दोबारा दोनों में छद्म युद्ध शुरू हो गया। इस दौरान यह क्षेत्र शिया-सुन्नी संघर्ष में बंट गया। 

ट्रंप भी नहीं निभा सकते मध्यस्थ की भूमिका
अमेरिका में अब सत्ता परिवर्तन के बाद अमेरिका में हालात बदले हैं, लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह सत्ता परिवर्तन भी मध्य-पूर्व के हालातों में कोई बदलाव कर पाएगा इसमें संदेह है। नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दफ्तर पहुंचकर सऊदी अरब की हां में हां मिला सकते हैं। ईरान ने इराक के बड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया है, वे अब यमन और सीरिया की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे में मध्यस्थ की भूमिका न तो हिलेरी निभा सकती थीं और न ही ट्रंप निभा सकते हैं।

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