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प्रस्ताव: सीएपीएफ में 'सेकंड-इन-कमांड' पद का नाम बदलने की मांग, गृह मंत्रालय कर रहा विचार
Mon, 18 Apr 2022 10:29 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 18 Apr 2022 10:29 PM IST
सार
सीआरपीएफ ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखे एक पत्र कहा था कि इस रैंक के अधिकारियों को नागरिक समाज में अपनी रैंक और प्रोफाइल के बारे में बताने में कठिनाई होती है।
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गृह मंत्रालय
- फोटो : फाइल
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए सीआरपीएफ से मिले एक प्रस्ताव पर सुझाव मांगे हैं। इस प्रस्ताव में अधिकारियों के लिए 'सेकंड-इन-कमांड' की रैंक के नाम को बदल कर 'अतिरिक्त कमांडेंट' करते हुए अधिकारियों को अपना पद बताते समय होने वाली शर्मिंदगी को समाप्त करने की मांग की गई है।
असम राइफल्स और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) का एक सेकंड-इन-कमांड रैंक अधिकारी का पद नियमित पुलिस प्रतिष्ठान में अधीक्षक रैंक के पद है।
सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल), बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल), आईटीबीपी (इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस), एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) और सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) जैसे सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में अधिकारियों को असिस्टेंट कमांडेंट के शुरुआती पद पर शामिल किया जाता है।
पहले प्रमोशन के साथ उन्हें सेकंड-इन-कमांड (संक्षेप में 2आईसी) का पद दिया जाता है। इसके बाद उन्हें कमांडेंट का पद मिलता है जो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समान होता है।
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लगभग 3.25 लाख कर्मचारियों वाले देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक पत्र लिखा था। इसमें उसने कहा था कि इस रैंक के अधिकारियों को नागरिक समाज में अपनी रैंक और प्रोफाइल के बारे में बताने में कठिनाई होती है।
प्रस्ताव में कहा गया है, 'विभिन्न सरकारी संगठनों में भी सेकंड-इन-कमांड' रैंक के बारे में बताना मुश्किल होता है। यह कोई कहने की बात नहीं है कि एक सीएपीएफ अधिकारी को अपनी रैंक बताते हुए गर्व होना चाहिए। लेकिन 2आईसी रैंक अधिकारियों के गर्व को बनाए रखने में असफल रही है और शर्मिंदगी की वजह बनती है।
गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को लेकर अन्य चार सीएपीएफ और असम राइफल्स को पत्र लिखा है और उनसे उनके विचार मांगे हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि यह मुद्दा पेचीदा नहीं है और सभी बलों से विचार मिलने के बाद और अंतिम फैसला लिए जाने के बाद मंत्रालय एक अधिसूचना जारी कर सकता है।
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असम राइफल्स और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) का एक सेकंड-इन-कमांड रैंक अधिकारी का पद नियमित पुलिस प्रतिष्ठान में अधीक्षक रैंक के पद है।
सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल), बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल), आईटीबीपी (इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस), एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) और सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) जैसे सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में अधिकारियों को असिस्टेंट कमांडेंट के शुरुआती पद पर शामिल किया जाता है।
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पहले प्रमोशन के साथ उन्हें सेकंड-इन-कमांड (संक्षेप में 2आईसी) का पद दिया जाता है। इसके बाद उन्हें कमांडेंट का पद मिलता है जो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समान होता है।
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लगभग 3.25 लाख कर्मचारियों वाले देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक पत्र लिखा था। इसमें उसने कहा था कि इस रैंक के अधिकारियों को नागरिक समाज में अपनी रैंक और प्रोफाइल के बारे में बताने में कठिनाई होती है।
प्रस्ताव में कहा गया है, 'विभिन्न सरकारी संगठनों में भी सेकंड-इन-कमांड' रैंक के बारे में बताना मुश्किल होता है। यह कोई कहने की बात नहीं है कि एक सीएपीएफ अधिकारी को अपनी रैंक बताते हुए गर्व होना चाहिए। लेकिन 2आईसी रैंक अधिकारियों के गर्व को बनाए रखने में असफल रही है और शर्मिंदगी की वजह बनती है।
गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को लेकर अन्य चार सीएपीएफ और असम राइफल्स को पत्र लिखा है और उनसे उनके विचार मांगे हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि यह मुद्दा पेचीदा नहीं है और सभी बलों से विचार मिलने के बाद और अंतिम फैसला लिए जाने के बाद मंत्रालय एक अधिसूचना जारी कर सकता है।