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मनरेगा का राज्यों में 8 हजार करोड़ बकाया
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 08 Jun 2016 08:25 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : Reuters
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केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को मनरेगा के तहत भुगतान में बिलंब के लिए मजदूरों को 30 जून तक मुआवजा देने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्यों से इस बाबत एक्शन टेकन रिपोर्ट भी तलब की गई है। राज्यों में मनरेगा में मजदूरों का 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक बकाया हैं। केंद्र की ओर से राज्यों को 16419 करोड़ 21 लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं। इस राशि में लंबित देनदारी और नए कार्यक्रम के लिए फंड शामिल है।
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ग्रामीण विकास मंत्रालय में मनरेगा के संयुक्त सचिव अपराजिता सारंगी की ओर से राज्यों के प्रमुख सचिवों, सचिवों और मनरेगा के प्रभारी को जारी पत्र में सेंट्रल एम्पलामेंट गारंटी काउंसिल के गठन को सुनिश्चित करने को कहा है। केंद्र स्तर पर इस काउंसिल का गठन कर लिया है। मंत्रालय की ओर से 9 जून को राज्यों के साथ मजदूरी और मुआवजे के भुगतान के मुद्दे पर वीडियो कांफ्रेंसिंग कर विस्तृत जानकारी ली जाएगी। राज्यों से सहा गया है कि इस बाबत कोई जानकारी मनरेगा निदेश ध्रुव कुमार सिंह से ली जा सकती है। मंत्रालय की ओर से 7 जून को लिखे गए इस पत्र को बुधवार को राज्यों को जारी किया गया है।
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-मनरेगा में भुगतान की देरी पर राज्यों से रिपोर्ट तलब
-मजदूरों को मुआवजा के लिए राज्यों के प्रमुख सचिवों को निर्देश
-मनरेगा का राज्यों में 8 हजार करोड़ बकाया, वीडियो कांफ्रेंसिंग आज
मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक 2016-17 में मनरेगा के तहत 38500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश को इस वर्ष के लिए 616 करोड़ 663 लाख रुपये जारी किए गए हैं। इसी तरह हिमाचल प्रदेश को 43 करोड़, हरियाणा को 21 करोड़, जम्मू कश्मीर को 362 करोड़, पंजाब को 126 करोड़ और उत्तराखंड को 120 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसी फंड में से मजदूरों को बकाया मजदूरी का भुगतान किया जाना है।
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संबंधित राज्यों की ओर से कार्यक्रम के डाटाबेस के लिए इंटरनेट संपर्कता का अभाव, मापन में देरी, कर्मचारियों की कमी, बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का कम विस्तार को बिलंब के कारण के रूप में गिनाया जाता रहा है। मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि भुगतान में देरी के लिए स्पष्ट उत्तरदायित्व तय किया जाएगा। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश समेत 11 राज्यों में राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक निधि प्रबंधन प्रणाली शुरू की है। इसके तहत मजदूरी सीधे मजदूरों के खाते में भेजने की व्यवस्था है। राज्यों में मजदूरी के मद में 8261 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसमें से उत्तर प्रदेश में 663 करोड़ रुपये की देनदारी है। उत्तराखंड में 115 करोड़, हरियाणा में 17 करोड़, हिमाचल प्रदेश में 36 करोड़, जम्मू कश्मीर में 275 करोड़ और पंजाब में 113 करोड़ रुपये बकाया हैं।