अमर उजाला शब्द सम्मान 2024: जीवंत हुई वायलिन की सुरीली परंपरा, छू गई सुरों की गहराई
एक-दूसरे की पूरक बनती वायलिन की धुन और तबले की थाप ने कुछ ऐसा माहौल पैदा किया कि श्रोता संगीत की दुनिया में खो गए।
विस्तार
तीन पीढि़यों की एकसाथ निकली वायलिन की धुनों में अनूठी सादगी थी। सुरों की गहराई सीधे दिल को छू रही थी। संगीत की अनूठी दुनिया भावुकता पैदा करती रही। मशहूर संगीतज्ञ व वायलिन वादक डॉ. एन. राजम, पुत्री संगीता शंकर और नातिन रागिनी शंकर की विशेष प्रस्तुति ने शुक्रवार की संगीतमयी शाम को यादगार बना दिया। वायलिन की सुरीली परंपरा जीवंत हुई, तो नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में अमर उजाला शब्द सम्मान समारोह में सुरों के उतार-चढ़ाव के साथ पूरा सभागार तालियों से गूंजता रहा।
धुनों के साथ दर्शकों की ऐसी एकरूपता बनी कि कभी पूरे सभागार में सन्नाटा छा जाता, तो कभी खुशी से तालियां बज उठतीं। चढ़ते-उतरते सुराें के साथ दर्शक सम होते दिखे। अभिषेक मिश्र की तबले पर संगत के साथ संगीतमयी शाम की शुरुआत राग कल्याण से हुई। तीन पीढि़यों के इस वादन में अनूठी सादगी और अजीब-सी तन्मयता थी।
वायलिन पर एक साथ प्रस्तुति ने दर्शकों का ‘पायो जी मैंने, राम रतन धन पायो...’ की वायलिन पर प्रस्तुति में ऐसी मिठास थी, जिससे सुनने वाले रोमांचित हो उठे। एकबारगी ऐसा लगा, मानो वायलिन के तंत्र ही गा रहे हों। इस दौरान पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। बनारस के होली गीत ने भी समां बांधा। वायलिन के सुरों में ऐसी गहराई थी जो सीधे दिल को छू रही थी। फनकारों की अंगुलियां वायलिन पर मानो जादू करती नजर आईं।
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