चीन के विरोध के बीच आज से शुरू होगा भारत, जापान और यूएस नेवी का संयुक्त अभ्यास
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भारत, जापान और अमेरिकी नेवी बृहस्पतिवार को दक्षिणी चीन सागर में जापानी समुद्र तट पर मालाबार नौसेना संयुक्त अभ्यास की शुरुआत करेंगी। इस अभ्यास का विरोध कर रहे चीन ने इसके चलते विवादित दक्षिणी चीन सागर में अपनी सेना की गतिविधियां बढ़ा दी हैं।
करीब नौ दिन तक चलने वाला मालाबार अभ्यास दक्षिणी चीन सागर में वियतनाम और चीन के बीच जापान के ससेबो शहर के करीब आयोजित किया जाएगा। चीन समुद्र के इस हिस्से को अपना जलक्षेत्र मानता है और यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि को सीधा अपनी संप्रभुता का उल्लंघन समझता है। ऐसे में इस अभ्यास पर चीन की कड़ी प्रतिक्रिया की उम्मीद जताई जा रही है।
एक नेवी अधिकारी ने बताया कि मालाबार अभ्यास के दौरान भारत, जापान और अमेरिका की नौसेनाएं मिलकर कठिन समुद्री अभियानों का अभ्यास करेंगी। ये अभ्यास सतह पर, सतह से ऊपर और हवा में किया जाएगा।
इस दौरान खासतौर पर पनडुब्बी निरोधक हथियारों के अभ्यास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस वार्षिक अभ्यास के 23वें संस्करण में तीनों सेनाओं के बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान, नेवी के जहाज और पनडुब्बियां भाग ले रहे हैं, जिसे इस क्षेत्र में अहम युद्धाभ्यास करार दिया जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस युद्धाभ्यास में दो भारतीय जहाज सहयाद्रि और कोर्वेट किल्टान हिस्सेदारी कर रहे हैं। सहयाद्रि जहां गाइडेड मिसाइल युक्त युद्धपोत है, वहीं कोर्वेट क्लिटान पनडुब्बी निरोधी हथियारों से लैस है।
इसके अलावा लंबी दूरी का गश्ती विमान ‘पी8आई’ भी भारतीय बेड़े का हिस्सा है। अमेरिकी सेना ने अभ्यास में अपनी लॉस एंजिल्स श्रेणी की लड़ाकू पनडुब्बी यूएसएस मैक्कैंपबेल और लंबी दूरी के गश्ती विमान ‘पी8ए’ को उतारा है। जापानी बेड़े में इजुमो श्रेणी के हेलिकॉप्टर विध्वंसक जेएस कागा, गाइडेड मिसाइल विध्वंसकों जेएस सामीदेर और चाउकी तथा लंबी दूरी के गश्ती विमान ‘पी1’ को जगह दी है।
लगातार विवाद उठा रहा है चीन
इस क्षेत्र में चीन लगातार विवाद पैदा कर रहा है। 4 जुलाई को चीनी के सर्वे जहाज हेइयांग दिजी-8 ने इस क्षेत्र में तेल ब्लॉक तलाशने शुरू किए थे। इस जहाज के साथ भारी संख्या में लड़ाकू युद्धपोत भी तैनात किए गए थे।
उस समय वियतनाम ने चीन पर अपने आर्थिक क्षेत्र में घुसने का आरोप लगाया था। वियतनामी राजनयिक सूत्रों ने कहा था कि चीनी युद्धपोत उस क्षेत्र के करीब तक पहुंच गए थे, जहां भारत की सरकारी ऊर्जा कंपनी ओएनजीसी वियतनामी सहयोग से तेल खोजने की परियोजना संचालित कर रही है।