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समय पर इंश्योरेंस कंपनी न दे पैसा, तो मेडिकल पॉलिसी धारक कर सकते हैं ब्याज की मांग

Mon, 31 Dec 2018 12:41 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Shilpa Thakur Updated Mon, 31 Dec 2018 12:41 PM IST
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Mediclaim policy holders seeks interest if not get reimbursement on time
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

मेडिक्लेम पॉलिसी धारकों के लिए महाराष्ट्र उपभोक्ता विभाग ने फैसला सुनाया है। विभाग ने कहा है कि अगर अदायगी की राशि मिलने में देरी होती है, तो पॉलिसी धारक ब्याज की मांग कर सकता है। एक महिला के हक में फैसला सुनाते हुए कमिशन ने ये बात कही। महिला का तीन साल पहले ओवेरिन का ऑपरेशन हुआ था। जिसका खर्च 1.7 लाख रुपये आया। महिला को क्लेम के पैसे तीन साल बाद मिले। कमिशन ने कहा कि वह 9 फीसदी ब्याज पाने की हकदार है।

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न्यू इंडिया इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड कंपनी ने पहले महिला के क्लेम को खारिज कर दिया था लेकिन 2013 में जब महिला के हक में बीमा लोकपाल ने फैसला सुनाया तो उसे (कंपनी) को पैसे देने पड़े। 
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जिला फोरम के आदेश पर महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि इस आदेश में न तो सभी तथ्यों को उचित तरीके से देखा गया और न ही ठीक से निष्कर्ष निकाला गया है, कि शिकायकर्ता ने पूरी संतुष्टि के साथ क्लेम हासिल किया है। इस फैसले में न तो रकम पर ब्याज के बारे में कुछ कहा गया और न ही मुआवजे को लेकर कुछ कहा गया है। 
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न्यू इंडिया इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड भी ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाया जिससे ये साबित हो सके कि शिकायतकर्ता अपने क्लेम से पूरी तरह संतुष्ट है। उपभोक्ता आयोग ने कहा कि महिला को तीन साल बाद रकम की राशि मिली है तो वह ब्याज की हकदार है।

आयोग ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड को मुआवजे और शिकायत की लागत के लिए 30 हजार रुपये देने का आदेश दिया। महिला ने दिसंबर, 2016 में जिला फोरम द्वारा शिकायत खारिज होने के बाद राज्य आयोग में 2017 में अपील की थी। 

महिला का कहना है कि वह ओवेरिन सर्जरी के लिए 26-30 अप्रैल, 2011 तक अस्पताल में रही। उसने कहा कि जब 15 अक्तूबर, 2013 को उसका क्लेम खारिज हो गया, तो बीमा लोकपाल ने इंश्योरेंस कंपनी को पूरा पैसा देने को कहा। इसके बाद उसे दिसंबर, 2013 में कंपनी की ओर से चेक मिला। 

  
इसके बाद फरवरी, 2014 में उसने इंश्योरेंस कंपनी को लेटर लिखते हुए कहा कि उसे तीन साल बाद क्लेम की रकम मिली है इसलिए वह ब्याज की हकदार है। उसे मुआवजा भी मिलना चाहिए। जब इस लेटर को इंश्योरेंस कंपनी ने खारिज कर दिया तो उसने उपभोक्ता आयोग में इसकी शिकायत की। अब महिला को रकम का 9 फीसदी ब्याज मिलेगा। साथ ही ऐसे अन्य लोगों के लिए भी मदद का रास्ता खुल गया है जो इंश्योरेंस कंपनी से समय पर क्लेम न मिलने के कारण परेशान हैं। 

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