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Niti Aayog: वैश्विक मानकों के अनुरूप हो दवाओं का नियमन, बढ़ेगा निर्यात, नीति आयोग ने की सिफारिश
Sun, 16 Apr 2023 05:56 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 16 Apr 2023 05:56 AM IST
सार
नई औषधि, चिकित्सा उपकरणों और प्रसाधन विधेयक, 2023 पर अंतर-मंत्रालयी विमर्श के दौरान ये सिफारिशें की गई हैं। इसका मसौदा संसद में पारित होने के बाद मौजूदा औषधि और प्रसाधन कानून, 1940 की जगह लेगा।
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नीति आयोग
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
नीति आयोग ने सिफारिश की है कि दवाओं के नियमन के भारतीय मानक ना सिर्फ वैश्विक मानकों बल्कि अंतरराष्ट्रीय सामंजस्य परिषद के निर्देशों के अनुरूप भी होना चाहिए ताकि व्यापार में आसानी हो। नीति आयोग ने देश में चिकित्सा उपकरणों के नियमन के लिए अलग संस्था के गठन की भी सलाह दी है। फिलहाल देश में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का नियमन भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) की ओर से किया जाता है।
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नई औषधि, चिकित्सा उपकरणों और प्रसाधन विधेयक, 2023 पर अंतर-मंत्रालयी विमर्श के दौरान ये सिफारिशें की गई हैं। इसका मसौदा संसद में पारित होने के बाद मौजूदा औषधि और प्रसाधन कानून, 1940 की जगह लेगा। विधेयक को अब समीक्षा के बाद अंतर-मंत्रालयी चर्चा के लिए भेजा गया है।
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क्लीनिकल परीक्षण पर नीति आयोग का कहना है कि विधेयक के मसौदे में वैश्विक मानकों के प्रति भारतीय मानदंडों की झिझक को दूर करने, क्लीनिकल परीक्षणों, समय पर फैसले लेने और नए उपचार/दवाओं को भारतीय जनता तक जल्दी पहुंचाने के लिए आईसीएच के दिशा-निर्देशों को अपनाने और उसके अनुरूप बनाने तथा व्यापार में आसानी की मंशा नजर आनी चाहिए।
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दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी
आधिकारिक सूत्र के अनुसार, वैश्विक मानकों को अपनाने से दवाओं का निर्यात बढ़ेगा और घरेलू एवं वैश्विक बाजार में आपूर्ति हो रही दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। यह हाल ही में गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में आई गुणवत्ता की समस्या से भी निपटेगा। भारत में बने कफ सिरप गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में पिछले साथ हुई बच्चों की मौत मामलों से कथित रूप से जुड़े हुए हैं। वर्तमान में दवाओं, प्रसाधन सामग्री और चिकित्सा उपकरणों का नियमन औषधि और प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत होता है।
भारतीय मानक को मान्यता नहीं देते कई देश
सामान्य रूप से कई देश अपने यहां दवाएं आयात करने में औषधि नियमन के भारतीय मानक को मान्यता नहीं देते हैं। इसके अलावा, समीक्षा के बाद तैयार विधेयक के मसौदे में केंद्र सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि प्रमुख नियामक संस्था सीडीएससीओ को दवाओं और प्रसाधन सामग्री के निर्माण का नियमन करने का अधिकार दिया जाएगा। फिलहाल इनका नियमन राज्य के औषधि नियामक करते हैं।