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चीन से आने वाली दवाओं पर भारत की पैनी नजर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
Updated Sat, 12 Nov 2016 02:37 PM IST
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चीन से भारत आने वाली दवाओं और दवा तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर भारत सरकार की पैनी नजर है। भारत ने सभी बंदरगाहों पर जांच व्यवस्था को मजबूत किया है। साथ ही सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) के अधिकारी हर पल निगरानी कर रहे हैं।
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चीन से भारत पहुंची कुछ मिलावटी और खराब गुणवत्ता वाली दवाओं के पकड़े जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है।
सीडीएससीओ के अधिकारियों का कहना है कि चीन से कुछ खराब गुणवत्ता वाली दवाओं की खेप भारत पहुंची थी। इसके बाद बंदरगाहों पर दवाओं और कच्चे माल की जांच-व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया गया। भारत में सालाना करीब 18000 करोड़ रुपये की दवाओं का आयात होता है।
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मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किसी तरह का समझौता नहीं
इसमें से करीब 60 फीसदी चीन से भारत को मिलता है। लिहाजा सबसे ज्यादा नजर चीन से आने वाली दवाओं पर होती है। इसके अलावा इटली, जापान, अमेरिका और कुछ यूरोपियन देशों से दवा भारत आती है।
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है और न ही दवाओं की गुणवत्ता के साथ समझौता किया जा सकता है। लिहाजा विदेशों से आने वाली दवाओं पर पैनी नजर रखी जा रही है। अधिकृत निर्यातक के नाम पर गलत दवाओं की सप्लाई का भी मामला सामने आया है।
इसके अलावा विदेश से आयात होने वाले कच्चे माल में करीब तीन फीसदी खराब गुणवत्ता वाला होता है। मिलावटी और गलत दवाओं के मामलों की शिकायत भारतीय जांच एजेंसियों से की गई हैं। फर्जी जीएमपी प्रमाण-पत्र का भी मामला सामने आया है। वर्ष-2012 से अब तक तीन मामले जांच के लिए सीबीआई को सौंपे गए हैं।
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है और न ही दवाओं की गुणवत्ता के साथ समझौता किया जा सकता है। लिहाजा विदेशों से आने वाली दवाओं पर पैनी नजर रखी जा रही है। अधिकृत निर्यातक के नाम पर गलत दवाओं की सप्लाई का भी मामला सामने आया है।
इसके अलावा विदेश से आयात होने वाले कच्चे माल में करीब तीन फीसदी खराब गुणवत्ता वाला होता है। मिलावटी और गलत दवाओं के मामलों की शिकायत भारतीय जांच एजेंसियों से की गई हैं। फर्जी जीएमपी प्रमाण-पत्र का भी मामला सामने आया है। वर्ष-2012 से अब तक तीन मामले जांच के लिए सीबीआई को सौंपे गए हैं।