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मनमोहन सिंह बोलेः मीडिया को सतर्क रहने की जरूरत, सरकार की कमियों को सामने रखने की जिम्मेदारी
Tue, 08 Nov 2022 10:48 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 08 Nov 2022 10:48 PM IST
सार
उन्होंने समारोह में अपने आभासी संबोधन में कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि मीडिया सतर्क रहेगा, सरकार की कमियों को इंगित करेगा और इस तरह शासन की प्रभावशीलता में सुधार करने में मदद करेगा।
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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (file photo)
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि मीडिया को सतर्क रहने और सरकार की कमियों को दूर करने की जरूरत है ताकि शासन की प्रभावशीलता में सुधार हो सके। यहां टीआईओएल (TIOL) हेरिटेज अवार्ड समारोह में मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत आगे बढ़ता रहेगा और परंपरा को आधुनिकता के साथ सम्मिश्रण करके दुनिया को आगे का रास्ता दिखाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीयों की एक पूरी तरह से नई पीढ़ी उभरी है जो आकांक्षी हैं और बेहतर प्रदर्शन और पारदर्शी होने के लिए सरकार पर दबाव बना रही है। सिंह ने मुश्किल समय में देश को चलाने में वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को भी याद किया।
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राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में मीडिया का बहुत महत्वपूर्ण योगदान
लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में इसका बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने समारोह में अपने आभासी संबोधन में कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि मीडिया सतर्क रहेगा, सरकार की कमियों को इंगित करेगा और इस तरह शासन की प्रभावशीलता में सुधार करने में मदद करेगा। उन्हें टीआईओएल वित्तीय विरासत पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कार समारोह का आयोजन 'TaxIndiaOnline' पोर्टल द्वारा किया गया था। सिंह के अनुसार, आर्थिक विकास, सामाजिक परिवर्तन और राजनीतिक सशक्तिकरण ने भारतीयों की पूरी तरह से नई पीढ़ी की नई आकांक्षाओं को जगाया है।
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वित्त मंत्री के रूप में अपने दिनों को याद किया
उन्होंने कहा, इसने तेजी से विकास और जीवन की बेहतर गुणवत्ता की इच्छा में योगदान दिया है। ये आकांक्षाएं और महत्वाकांक्षाएं सरकारों पर और अधिक देने, बेहतर प्रदर्शन करने और अधिक पारदर्शी और कुशल होने के लिए दबाव डाल रही हैं। वित्त मंत्री के रूप में अपने दिनों को याद करते हुए सिंह ने कहा कि संकट के बीच उन्होंने राजनीति की दुनिया में कदम रखा। 1991 में भारत बाहरी मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रहा था। उन्होंने कहा कि आप में से अधिकांश को केवल 1990-91 के बाहरी भुगतान संकट याद होंगे। लेकिन यह भुगतान संकट एक और भी बड़ी चुनौती की पृष्ठभूमि के खिलाफ हुआ जैसे कि वैश्विक द्विध्रुवीय व्यवस्था का टूटना।
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विदेश नीति के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए
वित्त मंत्री के रूप में सिंह ने कहा कि उन्हें न केवल राजकोषीय घाटे को कम करने और आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने के बारे में चिंता करनी है, बल्कि रुपये को स्थिर करने और पर्याप्त विदेशी मुद्रा तक पहुंच सुनिश्चित करने के बारे में भी चिंता करनी है। उन्होंने कहा कि उस महत्वपूर्ण समय में मैंने कहा था कि एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में भारत का उदय एक विचार था जिसका समय आ गया था। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने देश के हितों का बचाव किया और इसके अनुसरण के लिए प्रतिबद्ध रहे। प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के नेतृत्व में हमने अपनी आर्थिक नीतियों के साथ-साथ हमारी विदेश नीति के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए। प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने भारत की 'पूर्व की ओर देखो नीति' को लॉन्च किया।