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IMHC: जगदीप धनखड़ बोले- भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में समुद्री क्षेत्र की होगी अहम भूमिका
Wed, 11 Dec 2024 05:26 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 11 Dec 2024 05:26 PM IST
सार
भारतीय समुद्री विरासत सम्मेलन (आईएमएचसी) 2024 में उपराष्ट्रपति ने कहा, 2030 तक वैश्विक नीली अर्थव्यवस्था के 6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, भारत का समुद्री क्षेत्र दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में हमारे उभरने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
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जगदीप धनखड़, उपराष्ट्रपति
- फोटो : X / @VPIndia
विस्तार
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के देश के दृष्टिकोण में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत एक उभरती हुई समुद्री शक्ति के रूप में खड़ा है, जो वैश्विक समुद्री पहलों का नेतृत्व करने के लिए अपनी भौगोलिक स्थिति और उन्नत बुनियादी ढांचे का रणनीतिक रूप से लाभ उठा रहा है।
सरकार के सागरमाला कार्यक्रम की सराहना
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी समुद्री अर्थव्यवस्था को रणनीतिक रूप से विकसित कर रहा है, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए सतत समुद्री संसाधन उपयोग पर जोर दे रहा है। सरकार का सागरमाला कार्यक्रम बंदरगाहों को औद्योगिक समूहों के साथ एकीकृत करता है, लॉजिस्टिक नेटवर्क को अनुकूलित करता है, व्यापक तटीय विकास को बढ़ावा देता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि तटीय नौवहन विधेयक 2024 विनियामक ढांचे को सुव्यवस्थित करता है और बहु-मोडल व्यापार संपर्क को बढ़ाता है। 11 देशों के प्रतिनिधियों समेत प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक भारत में 7,500 किलोमीटर की तटरेखा, 13 प्रमुख बंदरगाह और 200 गैर-प्रमुख बंदरगाह हैं जो इसे निर्विवाद समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करते हैं।
'भारत निवेश और अवसर के लिए पसंदीदा गंतव्य'
उन्होंने कहा, हमारे बंदरगाह की 1,200 मिलियन टन कार्गो की वार्षिक हैंडलिंग क्षमता हमारे आर्थिक परिदृश्य में समुद्री क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। समुद्री क्षेत्र भारत के व्यापार की असाधारण 95 प्रतिशत मात्रा की सुविधा प्रदान करता है, और यह हमारे रणनीतिक हिंद महासागर की स्थिति का लाभ उठाते हुए इसके मूल्य का 70 प्रतिशत हिस्सा है। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि आईएमएफ, विश्व बैंक और विश्व आर्थिक मंच जैसी वैश्विक संस्थाएं भारत को निवेश और अवसर के लिए पसंदीदा गंतव्य मानती हैं।
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भारत के समुद्री क्षेत्र को हजारों वर्षों का अनुभव- सोनोवाल
वहीं अपने संबोधन में बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत के समुद्री क्षेत्र को हजारों वर्षों का अनुभव है। उन्होंने कहा, हमारा महान राष्ट्र, अपने समृद्ध और विविध इतिहास के साथ, 5,000 से अधिक वर्षों से एक समुद्री राष्ट्र रहा है। हड़प्पा सभ्यता से लेकर आज तक, समुद्र के साथ हमारे संबंध ने हमारी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और विश्व दृष्टिकोण को गहराई से आकार दिया है, जिसमें समुद्री इतिहासकार, पुरातत्वविद और समुद्री शोधकर्ता और अन्य उद्योग हितधारक शामिल थे।
मध्ययुगीन काल में, मसाला व्यापार में भारत की भूमिका अद्वितीय थी। मंत्री ने कहा कि भारतीय व्यापारियों ने न केवल अरब, चीन और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ व्यापार किया, बल्कि माल, संस्कृति और विचारों के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने के लिए समुद्र के रेशम मार्ग की भी स्थापना की। मंत्री सोनोवाल ने कहा, आज हमें इन मूल्यों की आवश्यकता है, क्योंकि हम जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण क्षरण और वैश्विक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह सम्मेलन संवाद और सहयोग के लिए एक मंच है। यह विद्वानों, नीति निर्माताओं और समुद्री पेशेवरों को विचारों का आदान-प्रदान करने और भविष्य के लिए समाधान तैयार करने के लिए एक साथ लाने का अवसर है।
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सरकार के सागरमाला कार्यक्रम की सराहना
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी समुद्री अर्थव्यवस्था को रणनीतिक रूप से विकसित कर रहा है, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए सतत समुद्री संसाधन उपयोग पर जोर दे रहा है। सरकार का सागरमाला कार्यक्रम बंदरगाहों को औद्योगिक समूहों के साथ एकीकृत करता है, लॉजिस्टिक नेटवर्क को अनुकूलित करता है, व्यापक तटीय विकास को बढ़ावा देता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि तटीय नौवहन विधेयक 2024 विनियामक ढांचे को सुव्यवस्थित करता है और बहु-मोडल व्यापार संपर्क को बढ़ाता है। 11 देशों के प्रतिनिधियों समेत प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक भारत में 7,500 किलोमीटर की तटरेखा, 13 प्रमुख बंदरगाह और 200 गैर-प्रमुख बंदरगाह हैं जो इसे निर्विवाद समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करते हैं।
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'भारत निवेश और अवसर के लिए पसंदीदा गंतव्य'
उन्होंने कहा, हमारे बंदरगाह की 1,200 मिलियन टन कार्गो की वार्षिक हैंडलिंग क्षमता हमारे आर्थिक परिदृश्य में समुद्री क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। समुद्री क्षेत्र भारत के व्यापार की असाधारण 95 प्रतिशत मात्रा की सुविधा प्रदान करता है, और यह हमारे रणनीतिक हिंद महासागर की स्थिति का लाभ उठाते हुए इसके मूल्य का 70 प्रतिशत हिस्सा है। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि आईएमएफ, विश्व बैंक और विश्व आर्थिक मंच जैसी वैश्विक संस्थाएं भारत को निवेश और अवसर के लिए पसंदीदा गंतव्य मानती हैं।
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भारत के समुद्री क्षेत्र को हजारों वर्षों का अनुभव- सोनोवाल
वहीं अपने संबोधन में बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत के समुद्री क्षेत्र को हजारों वर्षों का अनुभव है। उन्होंने कहा, हमारा महान राष्ट्र, अपने समृद्ध और विविध इतिहास के साथ, 5,000 से अधिक वर्षों से एक समुद्री राष्ट्र रहा है। हड़प्पा सभ्यता से लेकर आज तक, समुद्र के साथ हमारे संबंध ने हमारी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और विश्व दृष्टिकोण को गहराई से आकार दिया है, जिसमें समुद्री इतिहासकार, पुरातत्वविद और समुद्री शोधकर्ता और अन्य उद्योग हितधारक शामिल थे।
मध्ययुगीन काल में, मसाला व्यापार में भारत की भूमिका अद्वितीय थी। मंत्री ने कहा कि भारतीय व्यापारियों ने न केवल अरब, चीन और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ व्यापार किया, बल्कि माल, संस्कृति और विचारों के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने के लिए समुद्र के रेशम मार्ग की भी स्थापना की। मंत्री सोनोवाल ने कहा, आज हमें इन मूल्यों की आवश्यकता है, क्योंकि हम जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण क्षरण और वैश्विक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह सम्मेलन संवाद और सहयोग के लिए एक मंच है। यह विद्वानों, नीति निर्माताओं और समुद्री पेशेवरों को विचारों का आदान-प्रदान करने और भविष्य के लिए समाधान तैयार करने के लिए एक साथ लाने का अवसर है।