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Maratha Quota Row: '17 सितंबर से पहले मराठों को कुनबी प्रमाण-पत्र देना शुरू करें, वरना...'; जरांगे की चेतावनी
Mon, 08 Sep 2025 12:35 PM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शिव शुक्ला
Updated Mon, 08 Sep 2025 12:35 PM IST
सार
मराठा आरक्षण के नायक बन चुके मनोज जरांगे के सरकार को फिर से चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार 17 सितंबर से पहले मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए पिछले सप्ताह जारी किए गए सरकारी आदेश को लागू करे।
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मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की आग अभी थमी नहीं है। मराठा आरक्षण का चेहरा बन चुके मनोज जरांगे ने एक बार फिर महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने मांग की है कि महाराष्ट्र सरकार 17 सितंबर से पहले मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए पिछले सप्ताह जारी किए गए सरकारी आदेश को लागू करे। अगर ऐसा नहीं होता है तो वह फिर से 'कठोर निर्णय' लेने के लिए बाध्य होंगे।
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छत्रपति संभाजीनगर के अस्पताल में जरांगे ने संवाददाताओं से कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार राज्य के तालुका स्तर के कार्यालयों से जीआर पर कार्रवाई करने को कहेगी। हमें उम्मीद है कि 17 सितंबर से पहले काम शुरू हो जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मुझे कड़े फैसले लेने होंगे। गौरतलब है कि बीते सप्ताह मुंबई में अपना आंदोलन वापस लेने के बाद से वह अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
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इस दौरान जरांगे ने यह भी कहा कि सर्टिफिकेट का वितरण 17 सितंबर से पहले जीआर के आधार पर शुरू हो जाना चाहिए। मुझे विश्वास है कि सरकार इस पर कार्रवाई करेगी। अगर वे येओला (जाहिर तौर पर मंत्री छगन भुजबल की ओर इशारा करते हुए) के किसी व्यक्ति की बात सुनते हैं और कुछ भी गलत होता है, तो हम 1994 के जीआर को भी चुनौती देंगे, जिसके तहत हमारा आरक्षण दूसरों को दे दिया गया था।
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17 सितंबर की ही तारीख क्यों चुनी जरांगे ने?
बता दें कि 17 सितंबर की तारीख मराठों के लिए खास महत्व रखती है। यह दिन मराठवाड़ा मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह मराठवाड़ा के भारत में एकीकरण और निजाम के शासन वाले हैदराबाद राज्य के भारत संघ में विलय की वर्षगांठ का प्रतीक है।
इस दौरान जरांगे ने इन लोगों की आलोचना भी की जिनका विचार था कि जीआर मराठा समुदाय के लिए लाभदायक नहीं होगा। जरांगे ने कहा कि ऐसा कहने वाले मराठा विद्वान पागल हो गए हैं और अब सरकारी आदेश आ जाने के बाद सो नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम बीड के नारायणगढ़ में दशहरा रैली में अपनी आगे की नीति की घोषणा करेंगे।
गौरतलब है कि आरक्षण कार्यकर्ता विनोद पाटिल ने बीते सप्ताह पात्र समुदाय के सदस्यों को कुनबी प्रमाण पत्र देने संबंधी जीआर को पूरी तरह से बेकार बताया था। पाटिल ने दावा किया कि जरांगे द्वारा आंदोलन शुरू करने के बाद जारी किया गया सरकारी आदेश समुदाय को किसी भी तरह से सार्थक लाभ नहीं पहुंचाएगा।
मराठा आरक्षण आंदोलन के समर्थक मनोज जरांगे ने बीते मंगलवार को मुंबई में पांच दिन से चल रहे अपने अनशन को तब खत्म किया जब सरकार ने उनकी ज्यादातर मांगें मान लीं। राज्य सरकार ने एक सरकारी आदेश जारी किया, जिसमें पात्र मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी (ओबीसी) जाति प्रमाणपत्र देने का प्रावधान किया गया है। इसके बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा था कि सरकार ने मराठा समाज के हित में समाधान निकाला है। सरकार ने एक प्रस्ताव के माध्यम से यह घोषणा की थी। कुनबी राज्य का एक पारंपरिक कृषक समुदाय है और उन्हें नौकरियों और शिक्षा में सरकारी आरक्षण के लिए पात्र बनाने हेतु महाराष्ट्र में ओबीसी श्रेणी की सूची में शामिल किया गया है।