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मन की बात: सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर स्वच्छता पर रखे विचार, शब्दश: पढ़ें पीएम का संबोधन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 30 Sep 2018 03:45 PM IST
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नरेंद्र मोदी
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48वीं बार देश से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकाशवाणी के जरिए मन की बात की। उन्होंने कहा, मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। शायद ही कोई भारतीय हो सकता है जिसको हमारे सशस्त्र बलों पर, हमारे सेना के जवानों पर गर्व न हो। प्रत्येक भारतीय चाहे वो किसी भी क्षेत्र, जाति, धर्म, पंथ या भाषा का क्यों न हो- हमारे सैनिकों के प्रति अपनी खुशी अभिव्यक्त करने और समर्थन दिखाने के लिए हमेशा तत्पर रहता है। कल भारत के सवा-सौ करोड़ देशवासियों ने, पराक्रम पर्व मनाया था। हमने 2016 में हुई उस सर्जिकल स्ट्राइक को याद किया जब हमारे सैनिकों ने हमारे राष्ट्र पर आतंकवाद की आड़ में प्रॉक्सी वॉर की धृष्टता करने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया था।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में अलग-अलग स्थानों पर हमारे सशस्त्र बलों ने प्रदर्शनी लगाये ताकि अधिक से अधिक देश के नागरिक खासकर युवा-पीढ़ी यह जान सके कि हमारी ताकत क्या है। हम कितने सक्षम हैं और कैसे हमारे सैनिक अपनी जान जोखिम में डालकर के हम देशवासियों की रक्षा करते हैं। पराक्रम पर्व जैसा दिवस युवाओं को हमारी सशस्त्र सेना के गौरवपूर्ण विरासत की याद दिलाता है। और देश की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए हमें प्रेरित भी करता है। मैंने भी वीरों की भूमि राजस्थान के जोधपुर में एक कार्यक्रम में भाग लिया, अब यह तय हो चुका है कि हमारे सैनिक उन सबको मुंहतोड़ जवाब देंगे जो हमारे राष्ट्र में शांति और उन्नति के माहौल को नष्ट करने का प्रयास करेंगे। हम शांति में विश्वास करते हैं और इसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन सम्मान से समझौता करके और राष्ट्र की संप्रभुता की कीमत पर कतई नहीं। भारत सदा ही शांति के प्रति वचनबद्ध और समर्पित रहा है।
विश्वयुद्ध के बारे में बात करते हुए पीएम ने कहा कि 20वीं सदी में दो विश्वयुद्धों में हमारे एक लाख से अधिक सैनिकों ने शांति के प्रति अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और यह तब, जब हमारा उस युद्ध से कोई वास्ता नहीं था। हमारी नजर किसी और की धरती पर कभी भी नहीं थी। यह तो शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता थी। कुछ दिन पहले ही 23 सितंबर को हमने इस्राइल में हाइफा की लड़ाई के सौ वर्ष पूरे होने पर मैसूर, हैदराबाद और जोधपुर लैंसर्स के हमारे वीर सैनिकों को याद किया जिन्होंने आक्रांताओं से हाइफा को मुक्ति दिलाई थी। यह भी शांति की दिशा में हमारे सैनिकों द्वारा किया गया एक पराक्रम था। आज भी संयुक्त राष्ट्र की अलग-अलग शांति सेना में भारत सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में से एक है। दशकों से हमारे बहादुर सैनिकों ने ब्लू हेल्मेट पहन विश्व में शांति कायम रखने में अहम भूमिका निभाई है।
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वायुसेना की तारीफ करते हुए पीएम ने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियो, आसमान की बातें तो निराली होती ही हैं इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि आसमान में अपनी शक्ति का परिचय देकर के भारतीय वायुसेना ने हर देशवासी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हमें सुरक्षा का अहसास दिलाया है। गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान लोगों को परेड के जिन हिस्सों की सबसे बेसब्री से प्रतीक्षा रहती है उनमें से एक है फ्लाई पास्ट जिसमें हमारी वायुसेना हैरतअंगेज कारनामों के साथ अपनी शक्ति का प्रदर्शन करती है। 8 अक्टूबर को हम ‘वायुसेना दिवस’ मनाते हैं। 1932 में छह पायलट और 19 वायु सैनिकों के साथ एक छोटी सी शुरुआत से बढ़ते हुए हमारी वायुसेना आज 21वीं सदी की सबसे साहसिक और शक्तिशाली वायुसेना में शामिल हो चुकी है। यह अपने आप में एक यादगार यात्रा है। देश के लिए अपनी सेवा देने वाले सभी एयर वॉरियर्स और उनके परिवारों का मैं अपने ह्रदय की गहराई से अभिनंदन करता हूं।
विभिन्न युद्धों में वायुसेना के महत्वपूर्ण योगदान के बारे में मोदी ने कहा कि 1947 में जब पाकिस्तान के हमलावरों ने एक अप्रत्याशित हमला शुरू किया तो यह वायुसेना ही थी जिसने श्रीनगर को हमलावरों से बचाने के लिए ये सुनिश्चित किया कि भारतीय सैनिक और उपकरण युद्ध के मैदान तक समय पर पहुंच जाएं। वायुसेना ने 1965 में भी दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया। 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता की लड़ाई कौन नहीं जानता है। 1999 करगिल की घुसपैठियों के कब्जे से मुक्त कराने में भी वायुसेना की भूमिका अहम रही है। टाइगर हिल में दुश्मनों के ठिकानों में रात-दिन बमबारी कर वायुसेना ने उन्हें धूल चटा दी। राहत एवं बचाव कार्य हो या फिर आपदा प्रबंधन हमारे एयर वॉरियर्स उनके सराहनीय कार्य को लेकर देश वायुसेना के प्रति कृतज्ञ है। तूफान, बवंडर, बाढ़ से लेकर जंगल की आग तक की प्राकृतिक आपदा से निपटने और देशवासियों की मदद करने का उनका जज्बा अद्भुत रहा है।
लिंग समानता पर पीएम मोदी ने कहा कि देश में लिंग समानता यानी स्त्री और पुरुष की समानता सुनिश्चित करने में वायुसेना ने मिसाल कायम की है और अपने प्रत्येक विभाग के द्वार देश की बेटियों के लिए खोल दिए हैं। अब तो वायुसेना महिलाओं को शॉर्ट सर्विस कमिशन के साथ स्थायी कमीशन का विकल्प भी दे रही है और जिसकी घोषणा इसी साल 15 अगस्त को मैंने लाल किले से की थी। भारत गर्व से कह सकता है कि भारत की सेना में सशस्त्र बलों में पुरुष शक्ति ही नहीं, स्त्री-शक्ति का भी उतना योगदान बनता जा रहा है। नारी सशक्त तो है, अब सशस्त्र भी बन रही है।
अपने संबोधन में पीएम ने नौसेना अधिकारी अभिलाष का जिक्र करते हुए कहा, मेरे प्यारे देशवासियो, पिछले दिनों नौसेना के हमारे एक अधिकारी अभिलाष टोमी वो अपने जीवन और मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे थे। पूरा देश चिंतित था कि टोमी को कैसे बचा लिया जाए। आपको पता है अभिलाष टोमी एक बहुत साहसी-वीर अधिकारी हैं। वे अकेले कोई भी आधुनिक तकनीक के बिना एक छोटी सी नाव ले करके, विश्व भ्रमण करने वाले पहले भारतीय थे। पिछले 80 दिनों से, वे दक्षिण हिन्द महासागर में गोल्डन ग्लोब रेस में भाग लेने समुंदर में अपनी गति को बनाये रखते हुए आगे बढ़ रहे थे लेकिन भयानक समुद्री तूफान ने उनके लिए मुसीबत पैदा की लेकिन भारत के नौसेना का ये वीर समुंदर के बीच अनेक दिनों तक जूझता रहा, जंग करता रहा।
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पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में अलग-अलग स्थानों पर हमारे सशस्त्र बलों ने प्रदर्शनी लगाये ताकि अधिक से अधिक देश के नागरिक खासकर युवा-पीढ़ी यह जान सके कि हमारी ताकत क्या है। हम कितने सक्षम हैं और कैसे हमारे सैनिक अपनी जान जोखिम में डालकर के हम देशवासियों की रक्षा करते हैं। पराक्रम पर्व जैसा दिवस युवाओं को हमारी सशस्त्र सेना के गौरवपूर्ण विरासत की याद दिलाता है। और देश की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए हमें प्रेरित भी करता है। मैंने भी वीरों की भूमि राजस्थान के जोधपुर में एक कार्यक्रम में भाग लिया, अब यह तय हो चुका है कि हमारे सैनिक उन सबको मुंहतोड़ जवाब देंगे जो हमारे राष्ट्र में शांति और उन्नति के माहौल को नष्ट करने का प्रयास करेंगे। हम शांति में विश्वास करते हैं और इसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन सम्मान से समझौता करके और राष्ट्र की संप्रभुता की कीमत पर कतई नहीं। भारत सदा ही शांति के प्रति वचनबद्ध और समर्पित रहा है।
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विश्वयुद्ध के बारे में बात करते हुए पीएम ने कहा कि 20वीं सदी में दो विश्वयुद्धों में हमारे एक लाख से अधिक सैनिकों ने शांति के प्रति अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और यह तब, जब हमारा उस युद्ध से कोई वास्ता नहीं था। हमारी नजर किसी और की धरती पर कभी भी नहीं थी। यह तो शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता थी। कुछ दिन पहले ही 23 सितंबर को हमने इस्राइल में हाइफा की लड़ाई के सौ वर्ष पूरे होने पर मैसूर, हैदराबाद और जोधपुर लैंसर्स के हमारे वीर सैनिकों को याद किया जिन्होंने आक्रांताओं से हाइफा को मुक्ति दिलाई थी। यह भी शांति की दिशा में हमारे सैनिकों द्वारा किया गया एक पराक्रम था। आज भी संयुक्त राष्ट्र की अलग-अलग शांति सेना में भारत सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में से एक है। दशकों से हमारे बहादुर सैनिकों ने ब्लू हेल्मेट पहन विश्व में शांति कायम रखने में अहम भूमिका निभाई है।
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वायुसेना की तारीफ करते हुए पीएम ने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियो, आसमान की बातें तो निराली होती ही हैं इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि आसमान में अपनी शक्ति का परिचय देकर के भारतीय वायुसेना ने हर देशवासी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हमें सुरक्षा का अहसास दिलाया है। गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान लोगों को परेड के जिन हिस्सों की सबसे बेसब्री से प्रतीक्षा रहती है उनमें से एक है फ्लाई पास्ट जिसमें हमारी वायुसेना हैरतअंगेज कारनामों के साथ अपनी शक्ति का प्रदर्शन करती है। 8 अक्टूबर को हम ‘वायुसेना दिवस’ मनाते हैं। 1932 में छह पायलट और 19 वायु सैनिकों के साथ एक छोटी सी शुरुआत से बढ़ते हुए हमारी वायुसेना आज 21वीं सदी की सबसे साहसिक और शक्तिशाली वायुसेना में शामिल हो चुकी है। यह अपने आप में एक यादगार यात्रा है। देश के लिए अपनी सेवा देने वाले सभी एयर वॉरियर्स और उनके परिवारों का मैं अपने ह्रदय की गहराई से अभिनंदन करता हूं।
विभिन्न युद्धों में वायुसेना के महत्वपूर्ण योगदान के बारे में मोदी ने कहा कि 1947 में जब पाकिस्तान के हमलावरों ने एक अप्रत्याशित हमला शुरू किया तो यह वायुसेना ही थी जिसने श्रीनगर को हमलावरों से बचाने के लिए ये सुनिश्चित किया कि भारतीय सैनिक और उपकरण युद्ध के मैदान तक समय पर पहुंच जाएं। वायुसेना ने 1965 में भी दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया। 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता की लड़ाई कौन नहीं जानता है। 1999 करगिल की घुसपैठियों के कब्जे से मुक्त कराने में भी वायुसेना की भूमिका अहम रही है। टाइगर हिल में दुश्मनों के ठिकानों में रात-दिन बमबारी कर वायुसेना ने उन्हें धूल चटा दी। राहत एवं बचाव कार्य हो या फिर आपदा प्रबंधन हमारे एयर वॉरियर्स उनके सराहनीय कार्य को लेकर देश वायुसेना के प्रति कृतज्ञ है। तूफान, बवंडर, बाढ़ से लेकर जंगल की आग तक की प्राकृतिक आपदा से निपटने और देशवासियों की मदद करने का उनका जज्बा अद्भुत रहा है।
लिंग समानता पर पीएम मोदी ने कहा कि देश में लिंग समानता यानी स्त्री और पुरुष की समानता सुनिश्चित करने में वायुसेना ने मिसाल कायम की है और अपने प्रत्येक विभाग के द्वार देश की बेटियों के लिए खोल दिए हैं। अब तो वायुसेना महिलाओं को शॉर्ट सर्विस कमिशन के साथ स्थायी कमीशन का विकल्प भी दे रही है और जिसकी घोषणा इसी साल 15 अगस्त को मैंने लाल किले से की थी। भारत गर्व से कह सकता है कि भारत की सेना में सशस्त्र बलों में पुरुष शक्ति ही नहीं, स्त्री-शक्ति का भी उतना योगदान बनता जा रहा है। नारी सशक्त तो है, अब सशस्त्र भी बन रही है।
अपने संबोधन में पीएम ने नौसेना अधिकारी अभिलाष का जिक्र करते हुए कहा, मेरे प्यारे देशवासियो, पिछले दिनों नौसेना के हमारे एक अधिकारी अभिलाष टोमी वो अपने जीवन और मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे थे। पूरा देश चिंतित था कि टोमी को कैसे बचा लिया जाए। आपको पता है अभिलाष टोमी एक बहुत साहसी-वीर अधिकारी हैं। वे अकेले कोई भी आधुनिक तकनीक के बिना एक छोटी सी नाव ले करके, विश्व भ्रमण करने वाले पहले भारतीय थे। पिछले 80 दिनों से, वे दक्षिण हिन्द महासागर में गोल्डन ग्लोब रेस में भाग लेने समुंदर में अपनी गति को बनाये रखते हुए आगे बढ़ रहे थे लेकिन भयानक समुद्री तूफान ने उनके लिए मुसीबत पैदा की लेकिन भारत के नौसेना का ये वीर समुंदर के बीच अनेक दिनों तक जूझता रहा, जंग करता रहा।
महात्मा गांधी
अभिलाष के साहस के बारे में बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वह पानी में बिना खाये-पिये लड़ता रहा। जिन्दगी से हार नहीं मानी। साहस, संकल्पशक्ति, पराक्रम एक अद्भुत मिसाल- कुछ दिन पहले मैंने जब अभिलाष को समुंदर से बचा करके बाहर ले आये तो टेलीफोन पर बात की। पहले भी टोमी से मैं मिल चुका था। इतने संकट से बाहर आने के बाद भी उनका जो जज्बा था, उनका जो हौसला था और फिर एक बार ऐसा ही कुछ पराक्रम करने का जो संकल्प उन्होंने मुझे बताया देश की युवा-पीढ़ी के लिए वो प्रेरणा है। मैं अभिलाष टोमी के उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करता हूं और उनका ये साहस, उनका पराक्रम, उनकी संकल्प शक्ति- जूझने की और जीतने की ताकत, हमारे देश की युवा-पीढ़ी को जरूर प्रेरणा देगी।
पीएम ने आगे कहा, मेरे प्यारे देशवासियो, 2 अक्टूबर हमारे राष्ट्र के लिए इस दिन का क्या महत्व है, इसे बच्चा-बच्चा जानता है। इस वर्ष का 2 अक्टूबर का और एक विशेष महत्व है। अब से 2 साल के लिए हम महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के निमित्त विश्वभर में अनेक विविध कार्यक्रम करने वाले हैं। महात्मा गांधी के विचार ने पूरी दुनिया को प्रेरित किया है। मार्टिन लूथर किंग जूनियर हों या नेल्सन मंडेला जैसी महान विभूतियां, हर किसी ने गांधी जी के विचारों से शक्ति पाई और अपने लोगों को समानता और सम्मान का हक दिलाने के लिए लम्बी लड़ाई लड़ सके। आज की ‘मन की बात’ में, मैं आपके साथ पूज्य बापू के एक और महत्वपूर्ण कार्य की चर्चा करना चाहता हूं, जिसे अधिक-से-अधिक देशवासियों को जानना चाहिए। 1941 में महात्मा गांधी ने रचनात्मक कार्यक्रम के रूप में कुछ विचारों को लिखना शुरू किया। बाद में 1945 में जब स्वतंत्रता संग्राम ने जोर पकड़ा तब उन्होंने, उस विचार की संशोधित प्रति तैयार की।
बापू के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू ने किसानों, गांवों, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, स्वच्छता, शिक्षा के प्रसार जैसे अनेक विषयों पर अपने विचारों को देशवासियों के सामने रखा है। इसे गांधी चार्टर भी कहते हैं। पूज्य बापू लोक संग्राहक थे। लोगों से जुड़ जाना और उन्हें जोड़ लेना बापू की विशेषता थी, ये उनके स्वभाव में था। यह उनके व्यक्तित्व की सबसे अनूठी विशेषता के रूप में हर किसी ने अनुभव किया है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को ये अनुभव कराया कि वह देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण और नितांत आवश्यक है। स्वतंत्रता संग्राम में उनका सबसे बड़ा योगदान ये रहा कि उन्होंने इसे एक व्यापक जन-आंदोलन बना दिया। स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में महात्मा गांधी के आह्वान पर समाज के हर क्षेत्र, हर वर्ग के लोगों ने स्वयं को समर्पित कर दिया। बापू ने हम सब को एक प्रेरणादायक मंत्र दिया था जिसे अक्सर, गांधी जी का तलिस्मान के नाम से जाना जाता है।
पीएम ने गांधीजी के जंतर का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी जी ने कहा था, 'मैं आपको एक जन्तर देता हूं, जब भी तुम्हें संदेह हो या तुम्हारा अहम् तुम पर हावी होने लगे तो यह कसौटी आजमाओ, जो सबसे गरीब और कमजोर आदमी तुमने देखा हो, उसकी शक्ल याद करो और अपने दिल से पूछो कि जो कदम उठाने का तुम विचार कर रहे हो, वह उस आदमी के लिए कितना उपयोगी होगा। क्या उससे, उसे कुछ लाभ पहुंचेगा! क्या उससे वह अपने ही जीवन और भाग्य पर कुछ काबू रख सकेगा! यानी क्या उससे उन करोड़ों लोगों को स्वराज मिल सकेगा जिनके पेट भूखे हैं और आत्मा अतृप्त है। तब तुम देखोगे कि तुम्हारा संदेह मिट रहा है और अहम् समाप्त हो रहा है।'
पीएम ने कहा, मेरे प्यारे देशवासियो, गांधी जी का एक जंतर आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आज देश में बढ़ता हुआ मध्यम वर्ग, बढ़ती हुई उसकी आर्थिक शक्ति, बढ़ता हुआ परचेसिंग पावर क्या हम कुछ भी खरीदारी के लिए जाएं तो पल भर के लिए पूज्य बापू को स्मरण कर सकते हैं! पूज्य बापू के उस जंतर का स्मरण कर सकते हैं! क्या हम खरीदारी करते समय सोच सकते हैं कि मैं जो चीज खरीद रहा हूं उससे मेरे देश के किस नागरिक का लाभ होगा! किसके चेहरे पर खुशी आएगी! कौन भाग्यशाली होगा जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आपकी खरीदी से लाभ होगा! और गरीब से गरीब को लाभ होगा तो मेरी खुशी अधिक-से-अधिक होगी।
गांधी जी के इस जंतर को याद करते हुए आने वाले दिनों में हम जब भी कुछ खरीद करें, गांधी जी की 150वी जयंती मनाते हैं तब हम जरुर देखें कि हमारी हर खरीदी में किसी-न-किसी देशवासी का भला होना चाहिए और उसमें भी जिसने अपना पसीना बहाया है, जिसने अपने पैसे लगाये हैं, जिसने अपनी प्रतिभा खपाई है, उन सबको कुछ-न-कुछ लाभ होना चाहिए। यही तो गांधी का जंतर है, यही तो गांधी का सन्देश है और मुझे विश्वास है कि जो सबसे गरीब और कमजोर आदमी, उसके जीवन में आपका एक छोटा सा कदम बहुत बड़ा परिणाम ला सकता है।
मेरे प्यारे देशवासियो, जब गांधी जी ने कहा था कि सफाई करोगे तो स्वतंत्रता मिलेगी। शायद उनको मालूम भी नहीं होगा ये कैसे होगा- पर ये हुआ, भारत को स्वतंत्रता मिली। इसी तरह आज हम को लग सकता है कि मेरे इस छोटे से कार्य से भी मेरे देश की आर्थिक उन्नति में, आर्थिक सशक्तिकरण में, गरीब को गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने की ताकत देने में मेरा बहुत बड़ा योगदान हो सकता है और मैं समझता हूं कि आज के युग की यही सच्ची देशभक्ति है, यही पूज्य बापू को कार्यांजलि है। जैसे विशेष अवसरों पर खादी और हैंडलूम के उत्पाद खरीदने के बारे में सोचें, इससे अनेक बुनकरों को मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि कहते हैं कि लाल बहादुर शास्त्री जी खादी के पुराने या कटे-फटे वस्त्रों को भी इसलिए सहज कर रखते थे क्योंकि उसमें किसी का परिश्रम छुपा होता है। वे कहते थे ये सब खादी के कपड़े बड़ी मेहनत से बनाये हैं- इसका एक-एक सूत काम आना चाहिए। देश से लगाव और देशवासियों से प्रेम की ये भावना छोटे से कद-काठी वाले उस महा-मानव के रग-रग में रची-बसी थी। दो दिन बाद पूज्य बापू के साथ ही हम शास्त्री जी की भी जयंती मनायेंगे। शास्त्री जी का नाम आते ही हम भारतवासियों के मन में एक असीम श्रद्धा का भाव उमड़ पड़ता है। उनका सौम्य व्यक्तित्व हर देशवासी को सदा ही गर्व से भर देता है। लाल बहादुर शास्त्री जी की ये विशेषता थी कि बाहर से वे अत्यधिक विनम्र दिखते थे परन्तु भीतर से चट्टान की तरह दृढ़ निश्चयी थे। ‘जय जवान जय किसान’ का उनका नारा उनके इसी विराट व्यक्तित्व की पहचान है।
पीएम ने आगे कहा, मेरे प्यारे देशवासियो, 2 अक्टूबर हमारे राष्ट्र के लिए इस दिन का क्या महत्व है, इसे बच्चा-बच्चा जानता है। इस वर्ष का 2 अक्टूबर का और एक विशेष महत्व है। अब से 2 साल के लिए हम महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के निमित्त विश्वभर में अनेक विविध कार्यक्रम करने वाले हैं। महात्मा गांधी के विचार ने पूरी दुनिया को प्रेरित किया है। मार्टिन लूथर किंग जूनियर हों या नेल्सन मंडेला जैसी महान विभूतियां, हर किसी ने गांधी जी के विचारों से शक्ति पाई और अपने लोगों को समानता और सम्मान का हक दिलाने के लिए लम्बी लड़ाई लड़ सके। आज की ‘मन की बात’ में, मैं आपके साथ पूज्य बापू के एक और महत्वपूर्ण कार्य की चर्चा करना चाहता हूं, जिसे अधिक-से-अधिक देशवासियों को जानना चाहिए। 1941 में महात्मा गांधी ने रचनात्मक कार्यक्रम के रूप में कुछ विचारों को लिखना शुरू किया। बाद में 1945 में जब स्वतंत्रता संग्राम ने जोर पकड़ा तब उन्होंने, उस विचार की संशोधित प्रति तैयार की।
बापू के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू ने किसानों, गांवों, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, स्वच्छता, शिक्षा के प्रसार जैसे अनेक विषयों पर अपने विचारों को देशवासियों के सामने रखा है। इसे गांधी चार्टर भी कहते हैं। पूज्य बापू लोक संग्राहक थे। लोगों से जुड़ जाना और उन्हें जोड़ लेना बापू की विशेषता थी, ये उनके स्वभाव में था। यह उनके व्यक्तित्व की सबसे अनूठी विशेषता के रूप में हर किसी ने अनुभव किया है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को ये अनुभव कराया कि वह देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण और नितांत आवश्यक है। स्वतंत्रता संग्राम में उनका सबसे बड़ा योगदान ये रहा कि उन्होंने इसे एक व्यापक जन-आंदोलन बना दिया। स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में महात्मा गांधी के आह्वान पर समाज के हर क्षेत्र, हर वर्ग के लोगों ने स्वयं को समर्पित कर दिया। बापू ने हम सब को एक प्रेरणादायक मंत्र दिया था जिसे अक्सर, गांधी जी का तलिस्मान के नाम से जाना जाता है।
पीएम ने गांधीजी के जंतर का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी जी ने कहा था, 'मैं आपको एक जन्तर देता हूं, जब भी तुम्हें संदेह हो या तुम्हारा अहम् तुम पर हावी होने लगे तो यह कसौटी आजमाओ, जो सबसे गरीब और कमजोर आदमी तुमने देखा हो, उसकी शक्ल याद करो और अपने दिल से पूछो कि जो कदम उठाने का तुम विचार कर रहे हो, वह उस आदमी के लिए कितना उपयोगी होगा। क्या उससे, उसे कुछ लाभ पहुंचेगा! क्या उससे वह अपने ही जीवन और भाग्य पर कुछ काबू रख सकेगा! यानी क्या उससे उन करोड़ों लोगों को स्वराज मिल सकेगा जिनके पेट भूखे हैं और आत्मा अतृप्त है। तब तुम देखोगे कि तुम्हारा संदेह मिट रहा है और अहम् समाप्त हो रहा है।'
पीएम ने कहा, मेरे प्यारे देशवासियो, गांधी जी का एक जंतर आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आज देश में बढ़ता हुआ मध्यम वर्ग, बढ़ती हुई उसकी आर्थिक शक्ति, बढ़ता हुआ परचेसिंग पावर क्या हम कुछ भी खरीदारी के लिए जाएं तो पल भर के लिए पूज्य बापू को स्मरण कर सकते हैं! पूज्य बापू के उस जंतर का स्मरण कर सकते हैं! क्या हम खरीदारी करते समय सोच सकते हैं कि मैं जो चीज खरीद रहा हूं उससे मेरे देश के किस नागरिक का लाभ होगा! किसके चेहरे पर खुशी आएगी! कौन भाग्यशाली होगा जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आपकी खरीदी से लाभ होगा! और गरीब से गरीब को लाभ होगा तो मेरी खुशी अधिक-से-अधिक होगी।
गांधी जी के इस जंतर को याद करते हुए आने वाले दिनों में हम जब भी कुछ खरीद करें, गांधी जी की 150वी जयंती मनाते हैं तब हम जरुर देखें कि हमारी हर खरीदी में किसी-न-किसी देशवासी का भला होना चाहिए और उसमें भी जिसने अपना पसीना बहाया है, जिसने अपने पैसे लगाये हैं, जिसने अपनी प्रतिभा खपाई है, उन सबको कुछ-न-कुछ लाभ होना चाहिए। यही तो गांधी का जंतर है, यही तो गांधी का सन्देश है और मुझे विश्वास है कि जो सबसे गरीब और कमजोर आदमी, उसके जीवन में आपका एक छोटा सा कदम बहुत बड़ा परिणाम ला सकता है।
मेरे प्यारे देशवासियो, जब गांधी जी ने कहा था कि सफाई करोगे तो स्वतंत्रता मिलेगी। शायद उनको मालूम भी नहीं होगा ये कैसे होगा- पर ये हुआ, भारत को स्वतंत्रता मिली। इसी तरह आज हम को लग सकता है कि मेरे इस छोटे से कार्य से भी मेरे देश की आर्थिक उन्नति में, आर्थिक सशक्तिकरण में, गरीब को गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने की ताकत देने में मेरा बहुत बड़ा योगदान हो सकता है और मैं समझता हूं कि आज के युग की यही सच्ची देशभक्ति है, यही पूज्य बापू को कार्यांजलि है। जैसे विशेष अवसरों पर खादी और हैंडलूम के उत्पाद खरीदने के बारे में सोचें, इससे अनेक बुनकरों को मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि कहते हैं कि लाल बहादुर शास्त्री जी खादी के पुराने या कटे-फटे वस्त्रों को भी इसलिए सहज कर रखते थे क्योंकि उसमें किसी का परिश्रम छुपा होता है। वे कहते थे ये सब खादी के कपड़े बड़ी मेहनत से बनाये हैं- इसका एक-एक सूत काम आना चाहिए। देश से लगाव और देशवासियों से प्रेम की ये भावना छोटे से कद-काठी वाले उस महा-मानव के रग-रग में रची-बसी थी। दो दिन बाद पूज्य बापू के साथ ही हम शास्त्री जी की भी जयंती मनायेंगे। शास्त्री जी का नाम आते ही हम भारतवासियों के मन में एक असीम श्रद्धा का भाव उमड़ पड़ता है। उनका सौम्य व्यक्तित्व हर देशवासी को सदा ही गर्व से भर देता है। लाल बहादुर शास्त्री जी की ये विशेषता थी कि बाहर से वे अत्यधिक विनम्र दिखते थे परन्तु भीतर से चट्टान की तरह दृढ़ निश्चयी थे। ‘जय जवान जय किसान’ का उनका नारा उनके इसी विराट व्यक्तित्व की पहचान है।
लाल बहादुर की प्रशंसा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्र के प्रति उनकी निस्वार्थ तपस्या का ही प्रतिफल था कि लगभग डेढ़ वर्ष के संक्षिप्त कार्यकाल में, वे देश के जवानों और किसानों को सफलता के शिखर पर पहुंचने का मन्त्र दे गए। मेरे प्यारे देशवासियो, आज जब हम पूज्य बापू का स्मरण कर रहें हैं तो बहुत स्वाभाविक है कि स्वच्छता की बात के बिना रह नहीं सकते। 15 सितम्बर से ‘स्वच्छता ही सेवा’ एक अभियान प्रारंभ हुआ। करोड़ों लोग इस अभियान में जुड़े और मुझे भी सौभाग्य मिला कि मैं दिल्ली के अम्बेडकर स्कूल में बच्चों के साथ स्वच्छता श्रमदान करूं। मैं उस स्कूल में गया जिनकी नींव खुद पूज्य बाबा साहब ने रखी थी। देशभर में हर तबके के लोग, इस 15 तारीख को इस श्रमदान से जुड़े। संस्थाओं ने भी इसमें बढ़-चढ़कर के अपना योगदान दिया। स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों, एनसीसी, एनएसएस युवा संगठन, मीडिया समूह, कॉर्पोरेट, जगत सभी ने, सभी ने बड़े पैमाने पर स्वच्छता श्रमदान किया। मैं इसके लिए इन सभी स्वच्छता प्रेमी देशवासियों को ह्रदय पूर्वक बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
आइये सुनते हैं एक फोन कॉल - 'नमस्कार। मेरा नाम शैतान सिंह जिला-बीकानेर, तहसील – पूगल, राजस्थान से बोल रहा हूं। मैं दृष्टिबाधित व्यक्ति हूं। दोनों आंखों से मुझे दिखाई नहीं देता मैं पूरी तरह से दृष्टिबाधित हूं तो मैं ये कहना चाहता हूं ‘मन की बात’ में जो स्वच्छ भारत का जो मोदी जी ने कदम उठाया था बहुत ही बढ़िया है। हम दृष्टिबाधित लोग शौच में जाने के लिए परेशान होते थे। अभी क्या है हर घर में शौचालय बन चुका है तो हमारा बहुत बढ़िया फायदा हुआ है उसमें। ये कदम बहुत ही बढ़िया उठाया था और आगे चलता रहे ये काम।'
इस सवाल के जवाब में पीएम ने कहा कि बहुत-बहुत धन्यवाद! आपने बहुत बड़ी बात कही हर किसी के जीवन में स्वच्छता का अपना महत्व है और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत आपके घर में शौचालय बना और उससे अब आपको सुविधा हो रही है हम सब के लिए इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है। और शायद इस अभियान से जुड़े लोगों को भी अंदाजा नहीं होगा एक प्रज्ञाचक्षु होने के नाते आप देख नहीं सकते हैं, लेकिन शौचालय न होने के पहले आप कितनी दिक्कतों से जीवन गुजारते थे और शौचालय होने के बाद आप के लिए कितना बड़ा वरदान बन गया, शायद आपने भी इस पहलू को जोड़ते हुए फोन न किया होता तो शायद स्वच्छता के इस अभियान से जुड़े लोगों के ध्यान में भी ऐसा संवेदनशील पहलू ध्यान न आता। मैं आपके फोन के लिए विशेष रूप से आपका धन्यवाद करता हूं।
मेरे प्यारे देशवासियो, ‘स्वच्छ भारत मिशन’ केवल देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में एक सफल कहानी बन चुका है जिसके बारे में हर कोई बात कर रहा है। इस बार भारत इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता सम्मेलन आयोजित कर रहा है। ‘महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन’ यानी दुनिया भर के स्वच्छता मंत्री और इस क्षेत्र के विशेषज्ञ एक साथ आकर स्वच्छता से जुड़े अपने प्रयोग और अनुभव साझा कर रहे हैं। ‘महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन’ का समापन 2 अक्टूबर 2018 को बापू के 150वीं जयंती समारोह के शुभारम्भ के साथ होगा।
मेरे प्यारे देशवासियो, संस्कृत की एक उक्ति है ‘न्यायमूलं स्वराज्यं स्यात्’ अर्थात् स्वराज के मूल में न्याय होता है जब न्याय की चर्चा होती है, तो मानव अधिकार का भाव उसमें पूरी तरह से समाहित रहता है। शोषित, पीड़ित और वंचित जनों की स्वतन्त्रता, शांति और उन्हें न्याय सुनिश्चित कराने के लिए - ये विशेष रूप से अनिवार्य है। डॉ० बाबा साहब अम्बेडकर द्वारा दिए गए संविधान में गरीबों के मूल अधिकारों की रक्षा के लिए कई प्रावधान किये गए हैं। उन्हीं के विजन से प्रेरित होकर 12 अक्तूबर 1993 को ‘राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग’ (एनएचआरसी) का गठन किया गया था। कुछ ही दिनों बाद एनएचआरसी के 25 वर्ष पूरे होने वाले हैं, एनएचआरसी ने न सिर्फ मानव अधिकारों की रक्षा की बल्कि मानवीय गरिमा को भी बढ़ाने का काम किया है। हमारे प्राण-प्रिय नेता हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमान अटल बिहारी वाजपेयी जी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि मानव अधिकार हमारे लिए कोई परायी अवधारणा नहीं है।
मानवाधिकारों के चिह्न को लेकर मोदी ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के प्रतीक चिन्ह में वैदिक काल का आदर्श सूत्र 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' अंकित है। एनएचआरसी ने मानव अधिकारों को लेकर व्यापक जागरूकता पैदा की है, साथ ही इसके दुरुपयोग को रोकने में भी सराहनीय भूमिका निभाई है। 25 साल की इस यात्रा में उसने देशवासियों में एक आशा, एक विश्वास का वातावरण पैदा किया है। एक स्वस्थ समाज के लिए, उत्तम लोकतान्त्रिक मूल्यों के लिए मैं समझता हूं एक बहुत बड़ी आशास्पद घटना है। आज राष्ट्रीय स्तर पर मानव अधिकार के काम के साथ-साथ 26 राज्य मानव अधिकार आयोग भी गठन किया है। एक समाज के रूप में हमें मानव अधिकारों के महत्व को समझने और आचरण में लाने की आवश्यकता है - ये ही ‘सब का साथ- सब का विकास’ का आधार है।
मेरे प्यारे देशवासियो, अक्टूबर महीना हो, जय प्रकाश नारायण जी की जन्म-जयन्ती हो, राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की जन्म शताब्दी वर्ष का प्रारंभ होता हो- ये सभी महापुरुष हम सब को प्रेरणा देते रहे हैं उनको हम नमन करते हैं और 31 अक्तूबर सरदार साहब की जयंती है, मैं अगली ‘मन की बात’ में विस्तार से बात करूंगा लेकिन आज मैं जरुर इसलिए उल्लेख करना चाहता हूं कि कुछ वर्षों से सरदार साहब की जन्म-जयंती पर 31 अक्तूबर को ‘एकता के लिए दौड़’ हिन्दुस्तान के हर छोटे-मोटे शहर में, कस्बों में, गांवों में का आयोजन होता है। इस वर्ष भी हम प्रयत्नपूर्वक अपने गांव में, कस्बे में, शहर में, महानगर में ‘एकता के लिए दौड़’ को आयोजित करें।
उन्होंने कहा कि ‘एकता के लिए दौड़’ यही तो सरदार साहब का, उनको स्मरण करने का उत्तम मार्ग है क्योंकि उन्होंने जीवनभर देश की एकता के लिए काम किया। मैं आप सब से आग्रह करता हूं कि 31 अक्तूबर को ‘एकता के लिए दौड़’ के जरिये समाज के हर वर्ग को, देश की हर इकाई को एकता के सूत्र में बांधने के हमारे प्रयासों को हम बल दें और यही उनके लिए अच्छी श्रद्धांजलि होगी। मेरे प्यारे देशवासियो, नवरात्रि हो, दुर्गापूजा हो, विजयादशमी हो इस पवित्र पर्वों के लिए मैं आप सब को हृदयपूर्वक बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। धन्यवाद।
आइये सुनते हैं एक फोन कॉल - 'नमस्कार। मेरा नाम शैतान सिंह जिला-बीकानेर, तहसील – पूगल, राजस्थान से बोल रहा हूं। मैं दृष्टिबाधित व्यक्ति हूं। दोनों आंखों से मुझे दिखाई नहीं देता मैं पूरी तरह से दृष्टिबाधित हूं तो मैं ये कहना चाहता हूं ‘मन की बात’ में जो स्वच्छ भारत का जो मोदी जी ने कदम उठाया था बहुत ही बढ़िया है। हम दृष्टिबाधित लोग शौच में जाने के लिए परेशान होते थे। अभी क्या है हर घर में शौचालय बन चुका है तो हमारा बहुत बढ़िया फायदा हुआ है उसमें। ये कदम बहुत ही बढ़िया उठाया था और आगे चलता रहे ये काम।'
इस सवाल के जवाब में पीएम ने कहा कि बहुत-बहुत धन्यवाद! आपने बहुत बड़ी बात कही हर किसी के जीवन में स्वच्छता का अपना महत्व है और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत आपके घर में शौचालय बना और उससे अब आपको सुविधा हो रही है हम सब के लिए इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है। और शायद इस अभियान से जुड़े लोगों को भी अंदाजा नहीं होगा एक प्रज्ञाचक्षु होने के नाते आप देख नहीं सकते हैं, लेकिन शौचालय न होने के पहले आप कितनी दिक्कतों से जीवन गुजारते थे और शौचालय होने के बाद आप के लिए कितना बड़ा वरदान बन गया, शायद आपने भी इस पहलू को जोड़ते हुए फोन न किया होता तो शायद स्वच्छता के इस अभियान से जुड़े लोगों के ध्यान में भी ऐसा संवेदनशील पहलू ध्यान न आता। मैं आपके फोन के लिए विशेष रूप से आपका धन्यवाद करता हूं।
मेरे प्यारे देशवासियो, ‘स्वच्छ भारत मिशन’ केवल देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में एक सफल कहानी बन चुका है जिसके बारे में हर कोई बात कर रहा है। इस बार भारत इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता सम्मेलन आयोजित कर रहा है। ‘महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन’ यानी दुनिया भर के स्वच्छता मंत्री और इस क्षेत्र के विशेषज्ञ एक साथ आकर स्वच्छता से जुड़े अपने प्रयोग और अनुभव साझा कर रहे हैं। ‘महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन’ का समापन 2 अक्टूबर 2018 को बापू के 150वीं जयंती समारोह के शुभारम्भ के साथ होगा।
मेरे प्यारे देशवासियो, संस्कृत की एक उक्ति है ‘न्यायमूलं स्वराज्यं स्यात्’ अर्थात् स्वराज के मूल में न्याय होता है जब न्याय की चर्चा होती है, तो मानव अधिकार का भाव उसमें पूरी तरह से समाहित रहता है। शोषित, पीड़ित और वंचित जनों की स्वतन्त्रता, शांति और उन्हें न्याय सुनिश्चित कराने के लिए - ये विशेष रूप से अनिवार्य है। डॉ० बाबा साहब अम्बेडकर द्वारा दिए गए संविधान में गरीबों के मूल अधिकारों की रक्षा के लिए कई प्रावधान किये गए हैं। उन्हीं के विजन से प्रेरित होकर 12 अक्तूबर 1993 को ‘राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग’ (एनएचआरसी) का गठन किया गया था। कुछ ही दिनों बाद एनएचआरसी के 25 वर्ष पूरे होने वाले हैं, एनएचआरसी ने न सिर्फ मानव अधिकारों की रक्षा की बल्कि मानवीय गरिमा को भी बढ़ाने का काम किया है। हमारे प्राण-प्रिय नेता हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमान अटल बिहारी वाजपेयी जी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि मानव अधिकार हमारे लिए कोई परायी अवधारणा नहीं है।
मानवाधिकारों के चिह्न को लेकर मोदी ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के प्रतीक चिन्ह में वैदिक काल का आदर्श सूत्र 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' अंकित है। एनएचआरसी ने मानव अधिकारों को लेकर व्यापक जागरूकता पैदा की है, साथ ही इसके दुरुपयोग को रोकने में भी सराहनीय भूमिका निभाई है। 25 साल की इस यात्रा में उसने देशवासियों में एक आशा, एक विश्वास का वातावरण पैदा किया है। एक स्वस्थ समाज के लिए, उत्तम लोकतान्त्रिक मूल्यों के लिए मैं समझता हूं एक बहुत बड़ी आशास्पद घटना है। आज राष्ट्रीय स्तर पर मानव अधिकार के काम के साथ-साथ 26 राज्य मानव अधिकार आयोग भी गठन किया है। एक समाज के रूप में हमें मानव अधिकारों के महत्व को समझने और आचरण में लाने की आवश्यकता है - ये ही ‘सब का साथ- सब का विकास’ का आधार है।
मेरे प्यारे देशवासियो, अक्टूबर महीना हो, जय प्रकाश नारायण जी की जन्म-जयन्ती हो, राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की जन्म शताब्दी वर्ष का प्रारंभ होता हो- ये सभी महापुरुष हम सब को प्रेरणा देते रहे हैं उनको हम नमन करते हैं और 31 अक्तूबर सरदार साहब की जयंती है, मैं अगली ‘मन की बात’ में विस्तार से बात करूंगा लेकिन आज मैं जरुर इसलिए उल्लेख करना चाहता हूं कि कुछ वर्षों से सरदार साहब की जन्म-जयंती पर 31 अक्तूबर को ‘एकता के लिए दौड़’ हिन्दुस्तान के हर छोटे-मोटे शहर में, कस्बों में, गांवों में का आयोजन होता है। इस वर्ष भी हम प्रयत्नपूर्वक अपने गांव में, कस्बे में, शहर में, महानगर में ‘एकता के लिए दौड़’ को आयोजित करें।
उन्होंने कहा कि ‘एकता के लिए दौड़’ यही तो सरदार साहब का, उनको स्मरण करने का उत्तम मार्ग है क्योंकि उन्होंने जीवनभर देश की एकता के लिए काम किया। मैं आप सब से आग्रह करता हूं कि 31 अक्तूबर को ‘एकता के लिए दौड़’ के जरिये समाज के हर वर्ग को, देश की हर इकाई को एकता के सूत्र में बांधने के हमारे प्रयासों को हम बल दें और यही उनके लिए अच्छी श्रद्धांजलि होगी। मेरे प्यारे देशवासियो, नवरात्रि हो, दुर्गापूजा हो, विजयादशमी हो इस पवित्र पर्वों के लिए मैं आप सब को हृदयपूर्वक बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। धन्यवाद।