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सिसोदिया ने कहा- हैप्पीनेस पाठ्यक्रम के जरिए एक बार फिर विश्वगुरु बनेगा भारत

Fri, 31 Aug 2018 06:26 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 31 Aug 2018 06:26 PM IST
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Manish Sisodia says India will once again become world guru through happiness curriculum

दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने मॉस्को में 70 देशों के शिक्षा के क्षेत्र के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत हजारों साल से शिक्षा में अग्रणी रहा है। हमने एक बार फिर ऐसा पाठ्यक्रम तैयार किया है जिसके जरिए वह दुनिया की समस्या को खत्म करने के संदर्भ में पूरी दुनिया को राह दिखाएगा।

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सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक कार्य छात्रों को उनके सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम बनाना होता है। और अगर यह बात सही है तो आज बच्चों को इस बात के लिए तैयार करना होगा कि वे आने वाले समय में हिंसा, आतंकवाद, प्रदूषण, भ्रष्टाचार और लैंगिक भेदभाव से कैसे निबटेंगे। पूरी दुनिया में यह समस्या गंभीर होती जा रही है।
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उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में तकनीकी और ऑटोमेशन के जरिए मशीनों को ज्यादा कुशल बनाया जा रहा है। लेकिन दुनिया को यह सोचना होगा कि जब हम ज्यादातर काम बेहतर तकनीकी से दक्ष मशीनों के माध्यम से करेंगे तो इंसान ऐसे दौर में क्या करेंगे। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के सामने आज जो समस्याएं हैं, उनसे निबटने के लिए दिल्ली ने हैप्पीनेस करिकुलम तैयार किया है। 
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दिल्ली में लगभग दस लाख बच्चे पहली से आठवीं तक की कक्षाओं में हैप्पीनेस करिकुलम के माध्यम से पढ़ाए जा रहे हैं। लगभग 20 हजार बच्चे इन कक्षाओं में बैठकर जीवन जीने के बेहतर तरीके सीख रहे हैं। दुनिया में बढ़ते आतंकवाद और तनाव से अगर आने वाली पीढ़ी को बचाना है तो उन्हें इसके लिए अभी से प्रशिक्षित करना होगा।


दिल्ली सरकार का हैप्पीनेस करिकुलम पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। पिछले दिनों यूनेस्को ने भी दिल्ली सरकार के इस अभिनव प्रयोग की सराहना की थी। कई देशों ने दिल्ली के मॉडल को समझने और अपने यहां अपनाने की कोशिश भी की है। सरकार का दावा है कि इस तकनीकी से बच्चों को पढ़ाने से उनके अंदर खुश रहने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, और खुश रहने के कारण उनका शैक्षणिक प्रदर्शन भी लगातार सुधर रहा है। आज के तनावपूर्ण जीवन में यह बेहद उपयोगी साबित हो रहा है।

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