82 साल बाद हुई घटना खास क्यों?: भारत की आजादी से पहले पहली बार फहराया था झंडा, मोइरांग पधारे थे नेताजी सुभाष
पराक्रम दिवस पर मणिपुर के मोइरांग में ऐतिहासिक महत्व को याद किया गया। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने कहा कि 1944 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज ने यहीं पहली बार भारतीय धरती पर तिरंगा फहराया था। इस कार्यक्रम में देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन भी पहुंचे।
विस्तार
देश आज जब पराक्रम दिवस मना रहा है, तो मणिपुर का मोइरांग एक बार फिर राष्ट्रीय स्मृति के केंद्र में आ गया है। यह वही ऐतिहासिक स्थान है, जहां भारत की आज़ादी से पहले पहली बार भारतीय धरती पर तिरंगा फहराया गया था। मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने कहा कि मोइरांग में पराक्रम दिवस का आयोजन स्वतंत्रता संग्राम को सच्ची श्रद्धांजलि है और देश की संप्रभुता की रक्षा के संकल्प की पुनः पुष्टि भी।
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने याद दिलाया कि अप्रैल 1944 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली आज़ाद हिंद फौज ने मोइरांग में भारतीय ध्वज फहराया था। यह पहली बार था जब अंग्रेजी शासन के दौरान भारत की धरती पर स्वतंत्र भारत का झंडा लहराया गया। इस ऐतिहासिक क्षण ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा दी थी।
मोइरांग का ऐतिहासिक महत्व
पराक्रम दिवस का आयोजन मोइरांग स्थित आईएनए वॉर म्यूज़ियम में किया गया, जो उसी स्थान पर बना है जहां आज़ाद हिंद फौज ने झंडा फहराया था। राज्यपाल ने कहा कि यह घटना केवल एक प्रतीक नहीं थी, बल्कि यह अंग्रेजी हुकूमत को सीधी चुनौती थी। मोइरांग का यह इतिहास आज भी देशवासियों को साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है।
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स्वतंत्रता आंदोलन में मणिपुर की भूमिका
राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में मणिपुर का योगदान, विशेषकर आज़ाद हिंद फौज के माध्यम से, देश के लिए गर्व का विषय है। मणिपुर की धरती ने न केवल संघर्ष को सहा, बल्कि देश की आजादी की नींव को और मजबूत किया। उन्होंने कहा कि यह राज्य लंबे समय से देशभक्ति और राष्ट्रीय सेवा के आदर्शों से जुड़ा रहा है।
नेताजी के विचार और विकसित भारत का सपना
अजय कुमार भल्ला ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों को आज के भारत से जोड़ते हुए कहा कि साहस, अनुशासन, एकता और निःस्वार्थ सेवा केवल अतीत की बातें नहीं हैं। ये मूल्य आज ‘विकसित भारत’ के निर्माण की बुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब आत्मविश्वासी और सशक्त युवा राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी को आगे बढ़ाएंगे।
सीपी राधाकृष्णन भी बोले
कोलकाता में पराक्रम दिवस समारोह में सीपी राधाकृष्णन ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि नेताजी के आदर्श आज भी युवाओं को देश के भविष्य की जिम्मेदारी लेने और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर काम करने की प्रेरणा देते हैं। राधाकृष्णन ने बताया कि नेताजी ने आराम की बजाय बलिदान चुना और आजाद हिंद फौज के जरिए स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। समारोह में पुस्तक विमोचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और नेताजी से जुड़ी दुर्लभ वस्तुओं की प्रदर्शनी भी आयोजित हुई।
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