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साल में सिर्फ एक बार यहां होती है कृष्ण की मंगला आरती, ठाकुर बन देते हैं दर्शन
अमर उजाला ब्यूरो/मथुरा
Updated Fri, 26 Aug 2016 03:44 AM IST
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वृन्दावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में साल में एक बार होने वाली मंगला आरती रात लगभग 2 बजे हुई। ठाकुर जी के बाल रूप के दर्शन की एक झलक पाने को मानो जन समुद्र मंदिर प्रागण में उमड़ पड़ा। इससे मंदिर की सभी व्यवस्था धरी रह गई।
बताते चलें कि यहां मंगला आरती की परंपरा नहीं है। बताया जाता है कि यहां ठाकुर जी बाल स्वरूप में हैं और रात को निधिवन में रास रचाने जाते हैं। इसलिए सुबह उन्हें उठाया नहीं जाता।
ठाकुर जी की मंगला आरती साल में सिर्फ एक बार जन्माष्टमी के दिन होती है। इस दिन कान्हा ठाकुर बनकर रात में भक्तों को दर्शन देते हैं।
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बताते चलें कि यहां मंगला आरती की परंपरा नहीं है। बताया जाता है कि यहां ठाकुर जी बाल स्वरूप में हैं और रात को निधिवन में रास रचाने जाते हैं। इसलिए सुबह उन्हें उठाया नहीं जाता।
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ठाकुर जी की मंगला आरती साल में सिर्फ एक बार जन्माष्टमी के दिन होती है। इस दिन कान्हा ठाकुर बनकर रात में भक्तों को दर्शन देते हैं।
चांदनी चौक के भक्त ने किया था गिफ्ट
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इस बार बांकेबिहारी महाराज दिल्ली के चांदनी चौक में बनी पोशाक को धारण किया। पीले रंग की यह पोशाक ठाकुर जी को उनके दिल्ली निवासी भक्त ने खासतौर पर अर्पित की है।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत आभाष गोस्वामी और श्रीनाथ गोस्वामी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज का बालरूप में शृंगार कराया जाता है। इस अवसर पर ठाकुरजी पीले वस्त्र धारण करते हैं।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत आभाष गोस्वामी और श्रीनाथ गोस्वामी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज का बालरूप में शृंगार कराया जाता है। इस अवसर पर ठाकुरजी पीले वस्त्र धारण करते हैं।
साल में सिर्फ एक बार आरती की परंपरा
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बता दें कि जन्माष्टमी के अवसर पर वर्ष में एक बार ही ठाकुर बांकेबिहारी रात्रि को जगमोहन में विशेष रजत निर्मित सिंहासन पर विराजित होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। दर्शनों का यह क्रम नंदोत्सव के समापन तक चलता है। वर्ष में एक बार ही ठाकुरजी की मंगला आरती की जाती है।