फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Main Points of kovind Committee Report One Nation One Election

एक देश-एक चुनाव: रिपोर्ट के विरोध में हाईकोर्ट के तीन सेवानिवृत्त जज, सूची में एक पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त भी

Thu, 14 Mar 2024 04:58 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Thu, 14 Mar 2024 04:58 PM IST
सार

कोविंद कमेटी द्वारा आखिरकार 18 हजार से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपी गई है। कमेटी ने एक देश-एक चुनाव का समर्थन किया है

विज्ञापन
Main Points of kovind Committee Report One Nation One Election
kovind panel report - फोटो : एएनआई

विस्तार

हाईकोर्ट के तीन पूर्व जज और एक पूर्व चुनाव आयुक्त.. एक देश एक चुनाव को लेकर गठित की गई चार सदस्यों की इस हाई लेवल कमेटी की अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कर रहे थे। कमेटी ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी है। 18626 पेज की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2029 से देश में पहले चरण लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं। इसके बाद 100 दिनों के भीतर दूसरे चरण में स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाएं। 

विज्ञापन


विरोध करने वालों में कौन कौन?
कोविंद कमेटी द्वारा राष्ट्रपति को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि एक देश एक चुनाव का जिस जिस ने विरोध किया, उसमें 15 राजनीतिक दलों के अलावा हाईकोर्ट के तीन रिटायर्ड जज और एक पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त भी शामिल थे। विरोध करने वालों में दिल्ली हाईकोर्ट पूर्व चीफ जस्टिस अजीत प्रकाश शाह, मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी और कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस गिरीश चंद्र गुप्ता का नाम शामिल है। तमिलनाडु के चुनाव आयुक्त वी पलानीकुमार द्वारा भी एक देश एक चुनाव का विरोध किया गया। 
विज्ञापन

दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजीत प्रकाश शाह ने देश में एक साथ चुनाव की अवधारणा का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे मतदान की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति पर अंकुश लग सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश गिरीश चंद्र गुप्ता ने भी एक साथ चुनाव का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि ‘यह विचार लोकतंत्र के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है।’
मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति संजीब बनर्जी ने भी देश में एक साथ चुनाव कराने का विरोध किया है। उनका कहना है कि ‘ये भारत के संघीय ढांचे को कमजोर कर सकता है। साथ ही क्षेत्रीय मुद्दों के लिए एक देश एक चुनाव हानिकारक हो सकता है।’

अब आगे क्या होगा?
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के चार रिटायर न्यायमूर्ति जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस शरद अरविंद बोबडे एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में थे।

अब रिपोर्ट को लोकसभा चुनाव के बाद कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद कानून मंत्रालय संविधान में वह नए खंड जोड़ेगा, जनकी सिफारिश विधि आयोग द्वारा की गई है। इसके बाद संसद के दोनों सदनों में इसे पारित कराया जाएगा। राज्यों की विधानसभाओं से भी प्रस्ताव पारित कराए जाने की सिफारिश की जाएगी, ताकि 2029 से लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हो सकेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed