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महाराष्ट्र के गांवों में सूखे से परेशान लोग, नहाने के पानी का घरेलू कार्यों में कर रहे इस्तेमाल

Sat, 22 Jun 2019 11:13 AM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Sat, 22 Jun 2019 11:13 AM IST
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Maharashtra village people uses bathwater for household chores due to drought 
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File Photo

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और अन्य क्षेत्रों में (विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र) सूखे की समस्या को अब 32 हफ्ते होने जा रहे हैं। यहां बीड और औरंगाबाद जिले की सीमा पर पड़ने वाले आदुल गांव के लोग नहाने के पानी को दोबारा इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां के लोग नहाने के पानी से घर के अन्य काम कर रहे हैं।


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महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और अन्य क्षेत्रों में (विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र) सूखे की समस्या को अब 32 हफ्ते होने जा रहे हैं। यहां बीड और औरंगाबाद जिले की सीमा पर पड़ने वाले आदुल गांव के लोग नहाने के पानी को दोबारा इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां के लोग नहाने के पानी से घर के अन्य काम कर रहे हैं।

बता दें नहाने के पानी को ग्रे वॉटर भी कहा जाता है। जो ना तो पीने के योग्य होता है और ना ही घर के कामों के। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें साबुन के कण और डेड स्किन घुले होते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि उनके पास इस पानी को इस्तेमाल करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। 

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आदुल गांव के रहने वाले राधाकृष्ण बाबुराओ (40) एक किसान हैं। उनके घर में उनकी पत्नी, माता-पिता, भाई और भाई की पत्नी हैं। बाबुराओ खाट (रस्सियों की सहायता से बनाया गया पलंग) पर बैठकर नहाते हैं और उनकी पत्नी खाट के नीचे टब लगा देती हैं।

जब वह नहाते हैं तो खाट के नीटे रखे टब में पानी जमा होने लगता है। जिसका इस्तेमाल बाद में घर के बाकी लोग करते हैं। हैरानी की बात तो ये है कि टब में एकत्रित पानी का इस्तेमाल करने के लिए महिलाओं की बारी अंत में आती है।

औरंगाबाद जिले के इस गांव में रहने वाले लोग नहाने के पानी का इस्तेमाल कपड़े और बर्तन धोने के लिए करते हैं। ऐसा करना यहां लोगों के लिए एक आम बात हो गई है। गांव के एक निवासी का कहना है, "यह चौंकाने वाला क्यों होना चाहिए? एक ऐसे समय में जब हम गंभीर पानी के संकट का सामना कर रहे हैं, हमारे सामने केवल दो रास्ते बचते हैं: या तो जिओ या मर जाओ।" आदुल औरंगाबाज जिले के 1,372 गांवों में से एक है, जो बीते साल से सूखे का सामना कर रहा है। आदुल की जनसंख्या 13 हजार है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर के बाद से औरंगाबाद जिले में बारिश नहीं हुई है। ग्राउंड वाटर सर्वे एंड डेवलपमेंट एजेंसी (जीएसडीए), पुणे के अनुसार, अादुल गांव में पिछले साल वर्षा की कमी 47.9 फीसदी थी। इस गांव को पानी की सप्लाई जयाकवाडी बांध के माध्यम से की जाती है, राज्य सिंचाई विभाग के मुताबिक यहां पानी का स्तर शून्य पर पहुंच गया है।

मार्च तक जिले की नौ तालुकाओं के भूजल में कमी देखी गई थी। ये कमी वैसे तो एक मीटर की है लेकिन आदुल उन 194 गांवों में शामिल है, जहां ये स्तर तीन मीटर से भी अधिक तक कम हुआ है।

बीड जिले के लोग भी सूखे का सामना कर रहे हैं। अगर पानी के टैंकरों की बात करें तो सौ लीटर पानी के लिए लोगों को 250 से 300 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। लोगों को हर पांच से छह दिन में टैंकर बुलाना पड़ता है। आदुल गांव में लोगों की कमाई अधिक नहीं है। यहां एक हांडा (12 लीटर पानी) दस रुपये और एक ड्रम (100 लीटर पानी) 80 रुपये में मिल रहा है।

अधिकतर गांव वाले इतना खर्च वहन नहीं कर सकते हैं। मजह यही एक समस्या नहीं है, ग्राम पंचायत के कुंए और बोरवेल भी सूख गए हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन भी मुफ्त पानी सप्लाई गांवों में अधिक टैंकरों से नहीं कर पा रहा है। यहां लोगों ने अपने घरों के बाहर नोटिस लगा लिए हैं, जिनपर मराठी में लिखा है, "हमारे घर में आपका स्वागत है। कृपया अंदर आएं और खाना खाएं। लेकिन पानी ना मांगें।"

लेकिन एक खुशी की बात ये है कि आईएमडी के सूचकांक डाटा के अनुसार, औरंगाबाद जिले में सूखे की समस्या कम हो जाएगी। संभावना है कि यहां बारिश हो सकती है।
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