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Maharashtra: साइनबोर्ड में मराठी भाषा के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगी राय

Fri, 22 Jul 2022 10:03 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 22 Jul 2022 10:03 PM IST
सार

हाई कोर्ट ने कहा था कि यह नियम बड़े पैमाने पर महाराष्ट्र की जनता की सुविधा के लिए है, जिसकी मातृभाषा मराठी है।

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Maharashtra: Petition against Marathi signboards, SC seeks suggestion from govt
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई की। महाराष्ट्र में दुकानों और प्रतिष्ठानों के नाम मराठी भाषा में प्रदर्शित करने के मामले पर हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर की गई है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार और अन्य संस्थानों से जवाब मांगा है। हाई कोर्ट के 23 फरवरी 2022 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस के एम जोसेफ और हृषिकेश राय की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार, मुंबई नगर निगम, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और अन्य से राय मांगी है। 

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याचिका में महाराष्ट्र की दुकान और प्रतिष्ठान (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 2017 में की गई संशोधन को चुनौती दी गई थी, जिसके अनुसार सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों को मराठी में अपने नाम के साइनबोर्ड प्रदर्शित करने होंगे और लिखे गए नाम का आकार किसी भी दूसरी भाषा के समान रखना होगा। फेडरेशन ने कहा था कि यह संविधान के अनुच्छेद 13 (मौलिक अधिकारों के साथ असंगत या कम करने वाले कानून), 19 (भाषण की स्वतंत्रता के संबंध में कुछ अधिकारों का संरक्षण) और 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) का उल्लंघन है।
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हाई कोर्ट ने कहा था कि यह नियम बड़े पैमाने पर महाराष्ट्र की जनता की सुविधा के लिए है, जिसकी मातृभाषा मराठी है। अदालत ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता यह बताने में विफल रहा है कि यह दुकानों में मौजूद साइनबोर्ड पर लिखे गए नाम की आवश्यकता खुदरा व्यापारियों को नहीं, बल्कि उन श्रमिकों और जनता के लिए है जो उनसे संपर्क करते हैं। हाई कोर्ट ने आगे कहा कि मराठी राज्य सरकार की आधिकारिक भाषा हो सकती है, लेकिन यह निर्विवाद रूप से राज्य की आम भाषा और मातृभाषा भी है। 

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