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महाराष्ट्र : पहले नजरबंद और फिर हिरासत में लिए गए भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर रावण
Sat, 29 Dec 2018 02:47 AM IST
Gaurav Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Gaurav Pandey
Updated Sat, 29 Dec 2018 02:47 AM IST
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चंद्रशेखर उर्फ रावण (फाइल फोटो)
शुक्रवार को मुंबई पहुंचे भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को मुंबई पुलिस ने दिनभर नजरबंद रखा फिर देर शाम हिरासत में ले लिया। चंद्रशेखर ने बताया कि पुलिस ने करीब आठ घंटे तक उन्हें होटल में नजरबंद रखा और शाम को दादर स्थित चैत्यभूमि जाने की इजाजत दी लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया।
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चंद्रशेखर शनिवार को मुंबई के वर्ली स्थित जंबोरी मैदान में जनसभा करने वाले हैं जबकि मुंबई पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पुलिस को जब पता चला कि चंद्रशेखर पश्चिमी उपनगर मलाड के मनाली होटल में ठहरे हैं तो सुबह 11 बजे वह मनाली होटल पहुंची और चंद्रशेखर समेत उनके सहयोगियों को नजरबंद कर लिया। वे चैत्य भूमि जाना चाहते थे लेकिन उन्हें नहीं जाने दिया गया। इसकी खबर भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं को लगी तो वे मनाली होटल पहुंचे और उन्होंने चंद्रशेखर को नजरबंदी से मुक्त करने की मांग की।
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इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। आखिरकार, शाम को सात बजे के बाद पुलिस ने चंद्रशेखर को चैत्य भूमि जाने की इजाजत दे दी। भारिप रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर और सीपीआई (एम) केंद्रीय समिति के सदस्य डॉ. अशोक धवले ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया।
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चंद्रशेखर मुंबई समेत राज्य के चार स्थानों पर सभा करना चाहते हैं। भीम आर्मी के राज्य पदाधिकारी अशोक कांबले ने बताया कि पहली सभा शनिवार को वरली के जंबोरी मैदान में शाम 4 बजे और उसके बाद दूसरी सभा पुणे में तय की गई है। 31 दिसंबर को पुणे में ही सावित्री बाई फुले पीठ में उनका व्याख्यान और फिर 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव स्थित विजय स्तंभ पर पुष्प वर्षा की योजना है। 2 जनवरी को लातूर में और 4 जनवरी को अमरावती में भी जनसभा की योजना है।
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तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे : रावण
चंद्रशेखर रावण ने इस पर कहा, ‘यह संविधान पर हमला है। लोकतंत्र में ऐसा नहीं होना चाहिए। हमने कौन सा अपराध किया है जो पुलिस ने हमें बंद कर दिया और हमसे धक्कामुक्की की। हमें बाबा साहब डॉ. आंबेडकर की समाधि पर नहीं जाने दिया। संविधान के आर्टिकल-19 के तहत हमें सभा करने का अधिकार है। हम तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।’